एग्जाम सेंटर पर वॉशरूम में छात्रा की डिलीवरी

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मध्य प्रदेश का औद्योगिक केंद्र पीथमपुर इन दिनों एक ऐसी घटना से सुर्खियों में है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। ये घटना 24 फरवरी की है। 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान, गणित के सवालों में उलझी एक 17 वर्षीय छात्रा ने स्कूल के वॉशरूम में एक बच्चे को जन्म दिया।

इस घटना को 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी कई सवालों का जवाब नहीं मिला है। पुलिस उस आरोपी की तलाश कर रही है जिसने नाबालिग को इस हालत में लाकर छोड़ दिया। वह नाबालिग का प्रेमी बताया जाता है।

वहीं मामले में एक पेंच ये भी है कि परिवार ने नाबालिग की सगाई कर दी थी। ऐसे में बच्चे का असली पिता कौन है इसे लेकर असमंजस बना है, इसलिए पुलिस डीएनए टेस्ट का सहारा लेगी। फिलहाल बच्चा इंदौर की एक संस्था के पास है।

जब वॉशरूम से गूंजी नवजात की किलकारी

24 फरवरी का दिन था। पीथमपुर के प्रतिष्ठित सेंट जॉन स्कूल में 10वीं बोर्ड परीक्षा चल रही थी। गणित का पेपर था, और परीक्षा हॉल में स्टूडेंट पेपर हल करने में बिजी थे। छात्रों के बीच पीथमपुर के शासकीय कन्या हाईस्कूल की एक 17 वर्षीय छात्रा भी थी।

परीक्षा शुरू हुए कुछ ही घंटे बीते थे कि छात्रा को पेट में असहनीय दर्द महसूस हुआ। उसने पर्यवेक्षक का ध्यान अपनी ओर खींचा और वॉशरूम जाने की इजाजत मांगी। वह वॉशरूम चली गई। समय बीतता गया। पांच मिनट, दस मिनट, और फिर पंद्रह मिनट।

जब वह वापस नहीं लौटी, तो पर्यवेक्षक को चिंता हुई। उन्होंने एक महिला कर्मचारी को वॉशरूम जाकर देखने को कहा। महिला कर्मचारी जब वॉशरूम के पास पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद था। उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

तभी अंदर से एक नवजात शिशु के रोने की धीमी आवाज आई। यह सुनकर कर्मचारी के होश उड़ गए। उसे यकीन नहीं हुआ कि वह जो सुन रही है, वह सच है। उसने घबराकर स्कूल के अन्य स्टाफ को बुलाया। स्टाफ ने मिलकर छात्रा से बात करने की कोशिश की और उसे दरवाजा खोलने के लिए मनाया।

कुछ देर बाद जब दरवाजा खुला, तो अंदर का नजारा देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया। फर्श पर खून था, और छात्रा एक स्वस्थ, नवजात बालक को गोद में लिए बैठी थी। वह खुद भी दर्द और घबराहट से कांप रही थी।

एम्बुलेंस से बच्चे और छात्रा को अस्पताल ले गए थे।
एम्बुलेंस से बच्चे और छात्रा को अस्पताल ले गए थे।

अफरा-तफरी और मेडिकल इमरजेंसी

स्कूल प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना एक पल गंवाए 108 एम्बुलेंस और बेटमा थाना पुलिस को सूचित किया। कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस और पुलिस की टीम स्कूल पहुंच गई। मेडिकल टीम ने तेजी से छात्रा और नवजात का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया।

दोनों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत पीथमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद, डॉक्टरों ने बेहतर देखभाल के लिए उन्हें धार के जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

नवजात को स्पेशल केयर की जरूरत थी, इसलिए उसे जिला अस्पताल के NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में भर्ती कराया गया। कुछ दिनों के इलाज के बाद, जब बच्चा स्वस्थ हो गया, तो उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं और बच्ची की नाबालिग उम्र के कारण, नवजात को उसके परिवार को नहीं सौंपा गया। उसे इंदौर की एक बाल कल्याण संस्था की देखरेख में भेज दिया गया है, जहां उसकी परवरिश हो रही है।

नाबालिग छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
नाबालिग छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पुलिस की जांच: 15 दिन, दो टीमें और आरोपी फरार

घटना के 15 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। आरोपी, जिसे छात्रा अपना प्रेमी बताती है, पुलिस की पकड़ से कोसो दूर है। ग्रामीण एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस की दो विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आरोपी ने तकनीकी दुनिया से खुद को पूरी तरह काट लिया है। वह न तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है और न ही किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना लगभग असंभव हो गया है।

पुलिस अब पुराने तरीकों, जैसे कि मुखबिरों का नेटवर्क और उसके दोस्तों-रिश्तेदारों से पूछताछ पर निर्भर है। पुलिस ने मानपुर स्थित आरोपी के घर पर भी कई बार दबिश दी, लेकिन हर बार वह वहां से नदारद मिला।

उसके परिवार वाले भी उसके बारे में कोई जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं। एसपी ने बेटमा पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।

बच्चे को आईसीयू में रखा गया था। फिलहाल वो पूरी तरह स्वस्थ है।
बच्चे को आईसीयू में रखा गया था। फिलहाल वो पूरी तरह स्वस्थ है।

सबसे बड़ा सवाल: बच्चा किसका है? DNA टेस्ट खोलेगा राज

इस मामले में एक और बड़ा पेंच है, जिसने जांच को और जटिल बना दिया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बच्चे का पिता कौन है? छात्रा का बयान: पुलिस को दिए अपने बयान में छात्रा ने अपने प्रेमी का नाम लिया है।

उसने बताया कि उसकी दोस्ती करीब दो साल पहले हुई थी और पिछले एक साल से वे शारीरिक संबंध में थे। उसने यह भी कहा कि डर के मारे उसने यह बात अपने परिवार में किसी को नहीं बताई।

वहीं, परिवार के लोगों का कहना है कि छात्रा की सगाई हो चुकी थी और उसका मंगेतर अक्सर घर आता-जाता था। इससे एक और संदेह पैदा होता है। इस विरोधाभास के कारण, पुलिस किसी भी नतीजे पर पहुंचने से बच रही है। एसपी भुटिया के अनुसार, “बच्चा किसका है, यह अभी आधिकारिक तौर पर नहीं कहा जा सकता। इसके लिए DNA टेस्ट करवाया जाएगा।

परिवार का दर्द- हमें तो पता ही नहीं चला कि बेटी प्रेग्नेंट है

इस घटना का सबसे हैरान करने वाला और सामाजिक रूप से चिंताजनक पहलू यह है कि छात्रा के परिवार, खासतौर पर उसकी मां को, गर्भावस्था के नौ महीनों तक इसकी भनक तक नहीं लगी। मां ने पुलिस को भी यही बयान दिया है।

मां ने कहा कि मेरी बेटी रोज की तरह स्कूल जाती थी, घर का काम करती थी। उसके व्यवहार या स्वास्थ्य में ऐसा कोई बदलाव नहीं दिखा, जिससे हमें शक होता। अब परिवार एक और लड़ाई लड़ रहा है। वे नवजात को अपने पास रखना चाहते हैं।

छात्रा की मां ने इसके लिए अपनी सहमति भी दी है, लेकिन कानून के अनुसार, जब तक पितृत्व साबित नहीं हो जाता और बच्ची के नाबालिग होने के कारण पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होता, तब तक बच्चा उन्हें नहीं सौंपा जा सकता। परिवार अब इस बात की जानकारी जुटा रहा है कि वे कानूनी रूप से बच्चे को कैसे हासिल कर सकते हैं।

पुलिस की दो टीमें आरोपी युवक की तलाश कर रही है।
पुलिस की दो टीमें आरोपी युवक की तलाश कर रही है।

प्राचार्य और सहायक केंद्राध्यक्ष को नोटिस

इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धार के सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शासकीय कन्या हाईस्कूल की प्राचार्य कल्पना भार्गव और परीक्षा के सहायक केंद्राध्यक्ष मुकेश परमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

1. प्राचार्य से सवाल: “आप संस्था की प्रधान हैं। आपकी जिम्मेदारी है कि आप छात्राओं के स्वास्थ्य और उनकी गतिविधियों पर नजर रखें। एक छात्रा नौ महीने तक गर्भवती रही और आपको इसकी जानकारी नहीं हुई। यह आपकी ओर से एक गंभीर लापरवाही है। आपने इस वस्तुस्थिति से वरिष्ठ कार्यालय को अवगत क्यों नहीं कराया?”

2. सहायक केंद्राध्यक्ष से सवाल: “बोर्ड परीक्षा एक संवेदनशील और आवश्यक सेवा है। आपके केंद्र पर इतनी बड़ी घटना घटी, और आपने तत्काल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करना जरूरी नहीं समझा? अधिकारियों को इस घटना की जानकारी अगले दिन अखबारों से मिली, जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?”

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