जबलपुर ब्लास्ट के आरोपी पर शक, 20 किलो विस्फोटक इकट्ठा करने का क्या था मकसद

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जबलपुर में 25 अप्रैल को कबाड़ गोदाम में हुए ब्लास्ट का क्या कोई आतंकी कनेक्शन है? इस मामले की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहे है।

दरअसल, एनएसजी को जांच में पता चला कि विस्फोट TNT (ट्राई नाइट्रो टोल्यूइन) के चलते हुआ है। ये हाई क्वालिटी विस्फोटक है। इसका इस्तेमाल, तोप के गोले और बम बनाने में किया जाता है। जिस तरीके से विस्फोट हुआ है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मौके पर 15 से 20 किलो टीएनटी स्टोर किया गया होगा।

अब जांच एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाश रही है कि ब्लास्ट का मुख्य आरोपी और कबाड़ गोदाम का मालिक शमीम विस्फोटक इकट्ठा क्यों कर रहा था। जांच एजेंसियों के शक की सुई इस तरफ इसलिए घूम रही है, क्योंकि ऐसे विस्फोटक का इस्तेमाल जबलपुर में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) करती है।

ओएफके की तरफ से सफाई दी जा चुकी है शमीम की रजा फर्म से उसका स्क्रैप का पिछले 5 साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इस बात की भी तफ्तीश की जा रही है कि शमीम कबाड़ी हादसे के दिन सुबह 9 बजे गोदाम क्यों पहुंचा था और तत्काल वहां से क्यों निकल गया। फिलहाल कबाड़ी फरार है। उस पर 15 हजार रुपए के इनाम का ऐलान किया गया है।

जानिए ब्लास्ट मामले में एनआईए और एनएसजी की एंट्री क्यों हुई?

25 अप्रैल को शमीम कबाड़ी के कटनी बायपास स्थित खजरी-खिरिया कबाड़ गोदाम में जोरदार विस्फोट हुआ। इस धमाके से 5 वर्ग किमी का पूरा क्षेत्र दहल गया था। मौके पर अधारताल पुलिस पहुंची तो तोप-गोले के 200 से अधिक खोल के स्क्रैप मिले।

पुलिस ने मौके से शमीम के बेटे फहीम और आनंद नगर निवासी सुल्तान अली को गिरफ्तार किया। फहीम ने पुलिस को बताया कि उसने तोप के गोले आयुध निर्माण खमरिया से स्क्रैप में खरीदे हैं। इसका उसके पास ठेका भी है। इसी के बाद एनआईए और एनएसजी सक्रिय हुई।

कबाड़खाने में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बनाए जाने वाले बम के खोखे मिले हैं।
कबाड़खाने में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बनाए जाने वाले बम के खोखे मिले हैं।

एनएसजी की प्रारंभिक रिपोर्ट में पता चला 20 किलो विस्फोटक स्टोर था

गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए और एनएसजी की टीम 26 अप्रैल को घटनास्थल पर जांच करने पहुंची। मलबे में कोई जिंदा बम न हो, इसके लिए इंदौर से एनडीआरएफ टीम को भी बुलाया गया था। तीनों टीमों ने संयुक्त रूप से घटनास्थल की बारीकी से जांच की। विस्फोट वाली जगह से बारूद के सैंपल लिए।

घटनास्थल पर बिखरे पड़े तोप-बम के खोल के नंबर भी नोट किए। जांच एजेंसियों को कुछ एक्सपायरी बम भी मिले हैं, जिन्हें जब्त किया गया। एनएसजी की जांच में पता चला कि विस्फोट टीएनटी (ट्राई नाइट्रो टोल्यूइन) के चलते हुआ है। ये हाई क्वालिटी विस्फोटक बारूद है।

इसका इस्तेमाल, तोप के गोले और बम बनाने में किया जाता है। जिस तरीके से विस्फोट हुआ है, इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मौके पर 15 से 20 किलो टीएनटी स्टोर किया गया होगा।

इसी जगह विस्फोट को स्टोर कर रखा था।
इसी जगह विस्फोट को स्टोर कर रखा था।

NIA आतंकी कनेक्शन के एंगल पर जांच क्यों कर रही?

अधारताल पुलिस ने फहीम और सुल्तान को 1 जून तक रिमांड पर लिया है। पूछताछ में पता चला कि शमीम ने ओएफके से स्क्रैप खरीदने के लिए सिंडिकेट बना रखा था। इस सिंडिकेट के लोग अलग-अलग नाम-पते से स्क्रैप का ठेका लेते थे और फिर उसे शमीम के कबाड़खाने में पहुंचा दिया जाता था।

फहीम से पुलिस को जो दस्तावेज मिले हैं, उसके मुताबिक उसके पास खमरिया एलपीआर रेंज में गिरने वाले बम के खोल उठाने का ठेका है। जबकि आयुध निर्माणी खमरिया से स्क्रैप खरीदने का ठेका किसी सलमान के नाम पर है। इस ठेके में बतौर गवाह फहीम के दस्तखत हैं।

29 अप्रैल को आयुध निर्माण खमरिया के जनसंपर्क अधिकारी अविनाश शंकर द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर दावा किया गया है कि निर्माणी द्वारा कोई भी गोला-बारूद का स्क्रैप शमीम को नहीं बेचा गया है। यहां तक कि मौके पर मिले तोप-बम के खोल भी आयुध निर्माणी के नहीं हैं।

एनआईए ने सुरक्षा संस्थानों से पूछा कितने लोगों को स्क्रैप का ठेका दिया?

मिलिट्री इंटेलिजेंस सूत्रों के अनुसार शमीम की फर्म, रजा मेटल को खमरिया फैक्ट्री से डिस्पोज ऑफ बम स्क्रैप में मिलते रहे हैं। इसके अलावा उसके पास लॉन्ग प्रूफ रेंज में बम के परीक्षण स्थल से भी स्क्रैप उठाने का ठेका था। एयरफोर्स आमला से भी स्क्रैप लेने का उसके पास ठेका था।

कबाड़ खाने में बम को काटकर उनमें से मेटल पार्ट निकालने के बाद बारुद का भी स्टोरेज किया जा रहा था। इस बारुद को उसने 8 फीट गड्‌ढा करके रखा था। गड्‌ढे के ऊपर उसने कन्क्रीट की छत डाल दी थी। ये हाई क्वालिटी के एक्सप्लोसिव थे। इसमें कुछ इम्पोर्ट क्वालिटी के भी बताए जा रहे हैं।

अब एनआईए ने सुरक्षा संस्थानों से जानकारी मांगी है कि उसने कितने लोगों को स्क्रैप का खरीदने का ठेका दिया है? इसकी प्रक्रिया क्या है? कितने स्क्रैप वेंडर्स कब-कब कितना स्क्रैप खरीदे हैं। एनआईए के अलावा जबलपुर आईजी ने एक एसआईटी भी गठित की है, जो खोल में दर्ज नंबरों के आधार पर जांच कर रही है। इससे पता चलेगा कि इस नंबर के बम किस आयुध फैक्ट्री में बने हैं।

शमीम की बहू पाकिस्तानी, बेटे पर रेप का आरोप

शमीम का बेटा फहीम विदेश में पढ़ा है। उसी दौरान पाकिस्तानी युवती से उसकी पहचान हुई थी। बाद में दोनों की शादी हो गई। फहीम की पत्नी को अभी भारत की नागरिकता नहीं मिली है। वह वीजा पर जबलपुर में रह रही है।

उसने वीजा नवीनीकरण के लिए कुछ दिन पहले ही आवेदन किया था। एनआईए सहित स्थानीय पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है। शमीम पर चोरी, धोखाधड़ी के आरोप दर्ज है तो उसके बेटे फहीम के खिलाफ अधारताल में एक युवती ने रेप का मामला दर्ज कराया था।

विस्फोट के बाद मजदूरों के परिवार घटनास्थल पर पहुंच गए थे।
विस्फोट के बाद मजदूरों के परिवार घटनास्थल पर पहुंच गए थे।

अब विस्फोट में जान गंवाने वाले भोला के परिवार का दर्द भी जान लीजिए

इस हादसे में मौके पर काम कर रहे दो मजदूरों भोलाराम भूमिया (48) निवासी गौर खम्हरिया बरेला और हेल्पर मोहम्मद खलील की मौत हो गई। दोनों के शरीर के टुकड़े हो गए। दोनों के शरीर के अंगों को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रखवाया गया है। डीएनए जांच के बाद इन्हें परिजन को सौंपा जाएगा।

विस्फोट में जान गंवाने वाले भोलाराम भूमिया की पत्नी का 6 साल पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में अब 19 वर्षीय बेटा राजा और 20 वर्षीय बेटी रानी भूमिया ही बचे हैं। बेटे राजा के मुताबिक उसे दोपहर 12.30 बजे के लगभग कबाड़खाने में विस्फोट की सूचना मिली थी।

वह माैके पर पहुंचा तो उसके पिता भोलाराम कहीं नहीं मिले। मलबे में शव के बिखरे अंगों से पहचान होना मुश्किल था। शाम 5 बजे अधारताल में सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने डीएनए सैंपल लिए, जिससे मलबे में मिले लाश के अंगों से मिलान हो सके।

जो दो मजदूर इस हादसे में मारे गए उनके अंग इस तरह से पड़े मिले।
जो दो मजदूर इस हादसे में मारे गए उनके अंग इस तरह से पड़े मिले।

राजा ने बताया कि उसके पिता भोलाराम 15 साल की उम्र से शमीम कबाड़ी के कबाड़खाने में काम कर रहे थे। वे गैस कटर से तोप के गोले से तांबा-पीतल अलग करते थे। इसके अलावा वहां आने वाले इंजन, ट्रक सहित दूसरे वाहनों को काटकर पार्ट्स में अलग करते थे। इसके एवज में उन्हें 450 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। मोहम्मद खलील उनके हैल्पर थे। वे हादसे वाली सुबह 8.30 बजे घर से नाश्ता करके निकले थे।

राजा के मुताबिक पुलिस ने अभी तक डीएनए रिपोर्ट की सूचना नहीं दी है। घटना के बाद भी प्रशासनिक अमला सुध लेने नहीं आया। परिवार में हम भाई-बहन ही बचे हैं। मेरे पिता की बाइक भी अधारताल थाने में ही खड़ी है।

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