मोदी जी की लीला मोदी जी ही जाने …?

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जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, जैसे-जैसे पाँव के नीचे की जमीन खिसकने का अहसास बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे पार्टीयो की घबराहट बौखलाहट से सन्निपात में बदलती जाती दिखने लगी है। अब तो यह इसके एकमात्र प्रचारक नरेंद्र मोदी की धड़ाधड़ हो रही आम सभाओं में उनके सुर और बोलों में यह लगातार बढ़ती गति में उजागर होने लगा है। उनके ज्यादातर भाषणों में एक ही प्रलाप और एक से आत्मालाप का दोहराव हो रहा है ।

 

उत्तरप्रदेश के सहारनपुर और उसके बाद राजस्थान के अजमेर में हुयी सभा में दिया उनका भाषण ऐसे अनेक उदाहरणों में एक उदाहरण है। यहाँ बोलते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस – जो जिस उत्तरप्रदेश में वे बोल रहे थे, उस प्रदेश में मुख्य राजनीतिक शक्ति नहीं है – को कोसते हुए उन्होंने हिन्दू–मुस्लिम के अपने विषाक्त आख्यान के साथ यह भी आरोप जड़ दिया कि अब उस पर वामपंथी पूरी तरह से हावी हो चुके हैं। ये वही मोदी थे, जो आज से ठीक दो साल पहले अपनी चहेती न्यूज़ एजेंसी ए एन आई से बोलते कह रहे थे कि “अब वे (कम्युनिस्ट) कहीं नजर ही नहीं आते, कहीं सत्ता में नहीं हैं, एक केरल के कोने में बैठे हैं।“ इतने के बाद भी अपनी खुन्नस निकालने से नहीं चूके और “एक खतरनाक विचारधारा” कहकर भड़ास निकाली थी। ऐसी ही भड़ास वे सहारनपुर में निकालते दिखाई दिए। जोरदार बात यह है कि यह प्रलाप वे उस इलाके में कर रहे थे, जो भारत के शानदार स्वतन्त्रता संग्राम और उसमें कम्युनिस्टों की उतनी ही चमकदार भूमिका और उसके जरिये आजादी की लड़ाई को एक नया जोश, दिशा, तेवर और उभार देने के गवाह हैं। सहारनपुर और उसके नजदीक का मेरठ 1857 के आजादी के उस पहले संग्राम की भूमि है, जिस लड़ाई ने जो सिलसिला शुरू किया था, वह आखिरकार अपने मकसद को हासिल करके ही पूरा हुआ। सहारनपुर इसी मेरठ का हिस्सा था, जिसमें 1929 से 1933 तक देश भर से गिरफ्तार करके लाये गए 31 कम्युनिस्ट नेताओं पर “अंग्रेजों के राज को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने” का मुकदमा चलाया गया था और उन्हें लम्बी-लम्बी सजाएं दी गयी थीं। इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान इन देशभक्त कम्युनिस्टों ने अदालत में जो बयान दिए थे, उन बयानों ने समूचे देश में एक लहर पैदा की थी, जो अन्य ऐसे मामलों के साथ महज 14 वर्ष में भारत को आजादी का सूरज दिखाने में कामयाब हो गयी थी।

 

ऐसी जमीन पर खड़े होकर देश की आजादी के बेहतरीन लड़ाके कम्युनिस्टों के खिलाफ प्रलाप मोदी के ही बस का है।

 

सहारनपुर की इसी सभा और इसके बाद की बाकी सभाओं में गाल बजाते हुए मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक के बाद एक दावा ठोंके जा रहे थे। उन्होंने फरमाया कि “भ्रष्टाचारी गरीब के सपनों को तोड़ते हैं, आपको लूटते हैं, आपके अधिकारों को लूटते हैं। आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं। अगर आपका बेटा या बेटी नौकरी के लिए योग्य है। लेकिन भ्रष्टाचार करके किसी और को नौकरी दे दी जाए, तो आपके बेटे-बेटी का भविष्य क्या होगा?“ यह दावा वे प्रधानमंत्री कर रहे थे, जिनकी खुद की पार्टी व्यापम जैसे घोटालों के कीर्तिमान कायम कर चुकी है, उनके शासित हर प्रदेश में पटवारी से लेकर पुलिस, आंगनबाडी से लेकर स्कूल मास्टर तक की भर्तियों में घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं। जो खुद राफेल से इलेक्टोरल बांड तक की यात्रा पूरी कर कांडों के विश्वगुरु का खिताब अर्जित कर चुके हैं। वे उस वाम को कोस रहे थे, राजेंद्र सिंह जादौन

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