BJP ने 57 साल का रिकॉर्ड कैसे तोड़ा

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हरियाणा में BJP का फॉर्मूला तीसरी बार हिट हो गया, लेकिन एक ट्विस्ट के साथ। ‘जाट वर्सेज नॉन जाट’ की राजनीति से गैर जाटों को इकट्ठा कर लिया, वहीं जाटों के गढ़ में भी 7 नई सीटें जीत लीं। हरियाणा के 57 साल के इतिहास में पहली बार कोई पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है।

8 अक्टूबर को आए चुनावी नतीजों में BJP ने हरियाणा में कुल 48 सीटें जीत ली हैं। 2019 में 40 सीटें और 2014 में 47 सीटें जीती थीं। इस चुनाव में BJP ने 22 नई सीटें जीतीं और 26 मौजूदा सीटें भी बचाने में कामयाब रही।

हरियाणा में BJP ने 2024 में रिकॉर्ड जीत कैसे हासिल की, तमाम अनुमानों से उलट कांग्रेस सिर्फ 37 सीटों पर कैसे सिमट गई; भास्कर एक्सप्लेनर में हरियाणा के नतीजों के पीछे की कहानी…

सबसे पहले 3 आंकड़े, जो जानना जरूरी…

1. BJP ने 67% मौजूदा सीटें रिटेन की, 22 नई सीटें जीतीं 2019 विधानसभा चुनाव में BJP ने 40 सीटें जीती थीं। 2024 में इनमें से 27 सीटें रिटेन कर ली हैं। यानी मौजूदा हर 3 में से 2 सीट जीत ली है। इसके अलावा 22 नई सीटें भी जीतीं।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने 19 नई सीटें तो जीतीं, लेकिन 50% पुरानी सीटें रिटेन नहीं कर सकी। इससे कांग्रेस को नई सीटें जीतने का फायदा नहीं मिला।

2. BJP ने हरियाणा के 7 में से 4 इलाकों में अपनी सीटें बढ़ाईं ​​​​​​​हरियाणा को 7 कल्चरल और पॉलिटिकल जोन में बांटा जाता है। 7 में से 4 इलाकों में BJP ने 2019 के मुकाबले सीटों में इजाफा किया है। बागड़, साउथ हरियाणा और मेवात बेल्ट में कोई अंतर नहीं आया।

जीटी रोड बेल्ट: दिल्ली से चंडीगढ़ को जाने वाली रोड के अगल-बगल के 6 जिले जीटी रोड बेल्ट में आते हैं। इसमें पंचकूला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, यमुनानगर, करनाल और अंबाला की 23 सीटें शामिल हैं। इन जिलों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए हुए पंजाबी हैं। 2014 में इस बेल्ट से BJP ने 21 और 2019 में 12 सीटें जीती थीं। वहीं इस बार यहां से BJP 14 सीटें जीतने में कामयाब रही।

बांगर बेल्ट: पंजाब से लगे हुए हरियाणा के 2 जिले जींद और कैथल बांगर बेल्ट में आते हैं। इन दोनों जिलों में कुल 9 सीटें हैं। 2014 में BJP ने इनमें से 2 और 2019 में 3 सीटें जीती थीं। इस बार BJP ने बांगर बेल्ट की 5 सीटें जीतीं, यानी 2 सीटें बढ़ीं। इस इलाके में भूमिगत जल का स्तर बहुत ऊंचा है और खेती यहां का मुख्य काम है।

देशवाल बेल्ट: इसे जाटलैंड भी कहा जाता है। इस बेल्ट में 3 जिले रोहतक, झज्जर और सोनीपत शामिल हैं और कुल 14 विधानसभा सीटें हैं। BJP यहां से 2014 में 4 सीट और 2019 में सिर्फ 2 सीटें जीत पाई थी। इस बार यानी 2024 के विधानसभा चुनाव में BJP 4 सीट जीतने में कामयाब रही है।

बागड़ बेल्ट: राजस्थान और पंजाब से सटे इस इलाके में बागड़ी बोली और पंजाबी वोटर्स हैं। इस बेल्ट में 5 जिले हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी और चरखी-दादरी आते हैं। इनमें कुल 21 सीट हैं। जाट वोटर डॉमिनेंट हैं। 2014 में BJP ने इस बेल्ट से 6 और 2019 में 8 सीटें जीती थीं। इस बार BJP यहां फिर से 8 सीटें जीतने में कामयाब रही। (नोट- बांगर और बागड़ अलग-अलग इलाके हैं)

अहीरवाल बेल्ट: अहीर बाहुल्य इलाका, जिसमें 3 जिले- रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, और गुरुग्राम जिले आते हैं। यहां कुल 11 सीटें हैं। 2014 में BJP ने यहां की 11 और 2019 में 8 सीटें जीतीं थीं। इस बार BJP ने यहां की 10 सीटें जीतीं हैं।

साउथ हरियाणा: उत्तर प्रदेश से लगे पलवल और फरीदाबाद जिले आते हैं। ब्रज भाषा के असर वाले इस इलाके की 9 सीटों पर गुर्जर वोटर निर्णायक हैं। यहां से BJP ने 2014 में सिर्फ 3 सीट और 2019 में 7 सीट जीतीं थीं। पिछला नतीजा दोहराते हुए इस बार BJP ने यहां से 7 सीटें जीती हैं।

मेवात: हरियाणा के ‘मेव’ मुस्लिम बाहुल्य नूंह जिला मेवात कहलाता है, जिसमें 3 सीटें हैं। 2014 और 2019 में BJP को कोई सीट नहीं मिली थी। इस बार भी BJP को यहां कोई सीट नहीं मिली है। मेवात में करीब 70% आबादी मुस्लिम है।

3. जाटों के गढ़ में BJP ने 7 नई सीटें जीतीं ​​​​​​​हरियाणा में BJP लगातार तीसरी बार ‘जाट वर्सेज नॉन-जाट’ के फॉर्मूले पर चुनाव लड़ी। हालांकि, चुनावी मैनेजमेंट की बदौलत BJP ने जाटों के गढ़ में भी घुसपैठ की है।

BJP ने 22 नई सीटें जीतीं, इनमें 7 सीटें जाट बहुल बागड़ और देशवाल बेल्ट में जीती हैं। इसके अलावा पंजाबी और शहरी बहुल जीटी रोड बेल्ट को एक्सपर्ट्स BJP की कमजोर कड़ी मान रहे थे, लेकिन BJP ने वहां भी 7 नई सीटें जीती हैं।

BJP की इस रिकॉर्ड जीत के 5 बड़े फैक्टर्स

1. BJP ने 60 नए चेहरों को मौका दिया, 34 जीते 2024 चुनाव से पहले BJP ने 60 सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया। इनमें से 34 कैंडिडेट्स जीते हैं।

इसे ऐसे समझिए कि BJP ने कुल 90 सीटों पर कैंडिडेट उतारे, उनमें से 48 जीते हैं, यानी करीब 56%। वहीं BJP ने 60 सीटों पर टिकट बदले, उनमें 34 जीते हैं, यानी करीब 57%। यानी BJP के टिकट बदलने का फॉर्मूला काम कर गया।

2. खट्टर की जगह सैनी को CM बनाने का दांव कामयाब RSS के बैकग्राउंड और पंजाबी समुदाय से आने वाले मनोहर लाल खट्टर करीब 9.5 साल तक हरियाणा के सीएम रहे। चुनाव से 6 महीने पहले मार्च 2024 में खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को CM बनाया गया। हरियाणा की करीब 44% OBC आबादी को अपनी ओर करने का दांव चला। इसके अलावा पार्टी ने सर्वे में पाया कि किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के विरोध के कारण खट्टर के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी लहर है।

इसके अलावा खट्टर चुनाव प्रचार से भी नदारद रहे। यहां तक कि राज्य के ज्यादातर पोस्टर्स में खट्टर का चेहरा नहीं दिखा। PM नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में 4 रैलियां कीं। इनमें से केवल एक रैली में ही खट्टर मौजूद रहे। सीनियर जर्नलिस्ट पवन पवन कुमार बंसल बताते हैं,

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मनोहर लाल खट्टर को लेकर लोगों में नाराजगी रही। उनके अंदर एरोगेंस था, वो लोगों से बदतमीजी से मिलते थे। उन्होंने लोगों का काम करने से मना किया। वहीं सैनी मिलनसार रहे और उन्होंने लोगों से मुलाकात की।

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एंटी इनकम्बेंसी को बेअसर करने के लिए मार्च 2024 में BJP ने मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सिंह सैनी को CM बनाया था।
एंटी इनकम्बेंसी को बेअसर करने के लिए मार्च 2024 में BJP ने मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सिंह सैनी को CM बनाया था।

3. BJP का जाट वर्सेज गैर-जाट फॉर्मूला तीसरी बार कामयाब हरियाणा में 36 बिरादरियां हैं। इनमें 27% के साथ सबसे बड़ी कम्युनिटी जाट है। BJP ने गैर-जाट की राजनीति करनी शुरू की। पारंपरिक तौर पर सवर्णों की पार्टी कहलाई जाने वाली BJP ब्राह्मण, पंजाबी, बनिया और राजपूत वोटों को लेकर आश्वस्त थी। इसके अलावा पार्टी ने पिछड़े और दलित वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की। ये फॉर्मूला 2014 और 2019 के बाद इस बार भी कामयाब रहा।

इसकी एक बानगी देखिए। हरियाणा में अनुसूचित जातियों (SC) की आबादी करीब 20% है, जिनके लिए 17 सीटें रिजर्व हैं। 2019 में BJP ने इनमें से 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार BJP SC रिजर्व 8 सीटों पर जीत हासिल की है।

सीनियर जर्नलिस्ट और लेखक सतीश त्यागी कहते हैं,

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हरियाणा में दो ही तरह के वोटर हैं। एक जो कमजोर और चुप है और दूसरा जिसमें हिम्मत है और बोल रहा है। BJP के लिए कहा जाता है कि उसके साथ गैर-जाट हैं, जो इस रिजल्ट से साबित हुआ। कमजोर और चुप गैर-जाट जातियों ने BJP को सपोर्ट किया।

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सतीश त्यागी कहते हैं, ‘हरियाणा के ज्यादातर गैर-जाटों ने किसान, पहलवान और जवान के मद्दे पर खुद को अलग रखा। उनका मानना था कि ये मुद्दे केवल जाटों के हैं।’

4. JJP का जनाधार टूटा, BJP को फायदा 2019 के चुनाव में JJP ने 10 सीटें जीती थीं। इनमें से 5 बागड़, 4 बांगर और 1 जीटी रोड बेल्ट की सीट थी। 2024 में JJP का सफाया हो गया। JJP की 10 सीटों पर BJP और कांग्रेस ने बढ़त बनाई है। BJP 4 सीटों पर काबिज हुई है। इनमें बांगर और बागड़ बेल्ट की 2-2 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस 6 सीटों पर कामयाब हुई। इनमें बागड़ बेल्ट की 3, बांगर बेल्ट की 2 और जीटी रोड बेल्ट की 1 सीट शामिल है।

दरअसल, 2019 में चुनाव के बाद BJP और JJP ने अलायंस कर सरकार बनाई थी। JJP के दुष्यंत चौटाला डिप्टी CM बने, लेकिन मार्च 2024 में JJP ने अलायंस तोड़ दिया और BJP से अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। 2019 में JJP के साथ हुए अलायंस का फायदा 2024 में BJP को मिला और JJP के हिस्से नुकसान आया।

2019 में चुनाव के बाद दुष्यंत चौटाला की पार्टी JJP ने BJP के साथ अलायंस कर सरकार बनाई थी।
2019 में चुनाव के बाद दुष्यंत चौटाला की पार्टी JJP ने BJP के साथ अलायंस कर सरकार बनाई थी।

सतीश त्यागी कहते हैं, ‘JJP और INLD की पॉलिटिक्स को गैर-जाट ने नकारा। साथ ही 2019 में JJP ने BJP के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में एलायंस कर सरकार बना ली थी। इससे JJP का कोर-वोटर पार्टी से नाराज हुआ। ऐसे में JJP की सीटों पर BJP को सपोर्ट मिला।’

पवन कुमार बंसल कहते हैं,

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BJP के साथ एलायंस करने को लेकर JJP के समर्थकों में नाराजगी थी, लेकिन एलायंस तोड़ने का फायदा BJP को मिला और JJP के हिस्से नुकसान आया।

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5. कांग्रेस की 70 सभाओं पर BJP की 150 रैलियां भारी BJP ने हरियाणा में करीब 150 रैलियां कीं। इनमें से 4 रैलियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और 10 रैलियां गृहमंत्री अमित शाह ने की। मोदी ने रैली कर करीब 20 सीटों को कवर किया, जिनमें से 10 सीटों पर BJP काबिज हुई है। इसके अलावा UP के CM योगी आदित्यनाथ ने आधा दर्जन से ज्यादा सभाएं कीं। साथ ही 40 से ज्यादा केंद्रीय मंत्री और सांसदों ने BJP के लिए वोट मांगे।

वहीं कांग्रेस ने केवल 70 सभाएं कीं। इनमें से 4 रैलियां और 2 रोड शो विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने किए, जबकि प्रियंका गांधी ने 2 सभाएं और राहुल के साथ एक रोड शो किया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2 रैलियां कीं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ कई पूर्व मुख्यमंत्रियों और सांसदों ने कांग्रेस के लिए वोट मांगे। इस चुनाव में कांग्रेस की 70 सभाओं पर BJP की 150 रैलियां भारी पड़ीं।

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