बैसाखी (Baisakh) भारत के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है।

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बैसाखी (Baisakh)

भारत के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह त्योहार मुख्यतः पंजाब और हरियाणा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। बैसाखी एक साथ तीन महत्वपूर्ण अर्थ रखती है: यह रबी फसल की कटाई का उत्सव है, सिख नव वर्ष (Sikh New Year) का आरम्भ है और सबसे महत्वपूर्ण, यह खालसा पंथ (Khalsa Panth) की स्थापना की वर्षगांठ है।

“बैसाखी” नाम हिन्दू पंचांग के महीने “वैशाख” से आया है, जो बिक्रम संवत (Bikram Sambat) कैलेंडर का पहला महीना होता है। इस दिन सूर्य मेष राशि (Mesh Rashi) में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मेष संक्रांति (Mesha Sankranti) भी कहा जाता है।

हर साल बैसाखी १३ या १४ अप्रैल को पड़ती है। यह त्योहार सौर पंचांग (Solar Calendar) पर आधारित है, इसलिए इसकी तिथि लगभग स्थिर रहती है। वर्ष २०२६ में यह पावन पर्व १४ अप्रैल को आएगा।

बैसाखी का इतिहास (Baisakhi Ka Itihas) :- सदियों पुराना है। पंजाब की उपजाऊ भूमि पर सदियों से किसान वैशाख के महीने में रबी फसल, विशेषकर गेहूं की कटाई करते आए हैं। यह समय किसानों के लिए साल की सबसे बड़ी खुशी का होता है जब खेत सुनहरे रंग से लहलहाते हैं और मेहनत का फल मिलता है। किसान ईश्वर का आभार व्यक्त करते हुए एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं।

बैसाखी क्यों मनाई जाती है :-
१. रबी फसल की कटाई का उत्सव: पंजाब और उत्तर भारत में किसान गेहूं की कटाई के बाद ईश्वर का आभार व्यक्त करते हैं।

२. खालसा पंथ की स्थापना की वर्षगांठ: १६९९ में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना को याद करने के लिए सिख समुदाय इसे धूमधाम से मनाता है।

३. सिख नव वर्ष: नानकशाही कैलेंडर के अनुसार बैसाखी नए साल की शुरुआत है।

४. मेष संक्रांति: इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, जिसे कई हिंदू समुदाय नव वर्ष के रूप में मनाते हैं।

५. एकता और समानता का संदेश: खालसा पंथ की स्थापना ने जाति, धर्म और वर्ग की सीमाओं को तोड़कर समानता का संदेश दिया था। (साभार)

सभी देशवासियों को वैसाखी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
राजेश नारायण श्रीवास्तव (एड.)

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