जहां गणेश प्रतिमा गिरी, वहां 100 से ज्यादा गड्‌ढे

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ग्वालियर में गणेश प्रतिमा जिस रोड पर गिरकर खंडित हुई, उस रोड पर 2 किलोमीटर के दायरे में 100 से ज्यादा गड्‌ढे हैं।  जब सोमवार को शहर के जीवाजीगंज से शिंदे की छावनी तक की रोड देखी, तो पूरी रोड जर्जर और खुदी पड़ी मिली। छोटे-बड़े इतने गड्‌ढे मिले कि इन्हें अंगुलियों पर नहीं गिना जा सकता।

रोड की हालत ऐसी है कि जिस रथ पर गणेश प्रतिमा थी, उसे 2 किलोमीटर तक ही आगे बढ़ाने में 300 से ज्यादा भक्तों को 20 घंटे लग गए। रथ 2 बार पंक्चर भी हुआ।

जीवाजीगंज में यह प्रतिमा बनाई गई थी। भक्त इसे यहां से लेकर गड्‌ढों और झूलते बिजली के तारों से बचाते हुए आगे बढ़ रहे थे। प्रतिमा शिंदे की छावनी के खल्लासीपुरा मोहल्ले में स्थापित होनी थी, लेकिन वहां से 500 मीटर पहले नवाब साहब का कुआं (शिंदे की छावनी) के पास बड़े गड्‌ढे में रथ का पहिया आने से प्रतिमा गिर गई।

इस घटना से भक्तों की आस्था पर चोट तो लगी ही है, स्मार्ट सिटी के दावे की पोल भी खुली है। नगर निगम का अमला इस रोड और शहर की दूसरी रोड के गड्‌ढों को भरने में जुट गया है। लोगों का कहना है कि गड्‌ढों को पहले ही भर दिया जाना चाहिए था। प्रतिमा खंडित होने का दाग शहर की सड़कों पर नहीं लगता।

हम बचते-बचाते हुए आगे बढ़ रहे थे… गणेश प्रतिमा लाने वाली टीम में शामिल भक्त बिट्‌टू पाल ने बताया, ‘हम शनिवार रात को प्रतिमा लेकर निकले थे। दो बार रथ का टायर पंक्चर हुआ। ढाई घंटे तो जैक लगाकर पंक्चर सुधारने में लगे। बहुत गड्‌ढे थे। संभालते हुए, बचते-बचाते हुए आगे बढ़ रहे थे। स्थापना स्थल की दूरी 500 मीटर रह गई थी। रास्ते में बड़ा गड्‌ढा आया, तो इसमें पत्थर रखकर आगे बढ़े, लेकिन रथ अनबैलेंस हो गया और प्रतिमा गिरकर खंडित हो गई। तीन – चार लोग मामूली घायल हुए, किसी का हाथ, किसी का कान छिल गया।

ग्वालियर सिर्फ नाम की स्मार्ट सिटी स्थानीय लोगों में घटना से आक्रोश है। जिन लोगों ने गड्‌ढे की वजह से प्रतिमा को गिरकर खंडित होते देखा, वे उस मंजर को नहीं भुला पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ग्वालियर सिर्फ नाम की स्मार्ट सिटी है, हकीकत में तो यह गड्‌ढों का शहर है। यहां सड़क बनने के अगले ही दिन खोद दी जाती है। खोदने वाले उसे सही कभी नहीं कराते हैं।

लोगों के मुताबिक, ग्वालियर की सबसे ऊंची गणेश प्रतिमा को बनवाना और इसे स्थापना स्थल तक लाने के लिए 300 से ज्यादा कार्यकर्ता भूखे – प्यासे लगे हुए थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल 1 फीट बढ़ाकर गजानन की प्रतिमा लाई जाती है। इतनी बड़ी प्रतिमा को लाने के लिए पूरे भक्त मंडल ने कमर कस ली थी। शनिवार रात 11.50 बजे प्रतिमा को जीवाजीगंज से लेकर चले थे, रविवार रात करीब 9 बजे आते-आते हादसा हो गया।

लोगों का कहना है कि पेच रिपेयरिंग का काम भी हल्के स्तर का हो रहा है। आधे अधूरे गड्‌ढे भरकर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि ग्वालियर की हर सड़क जर्जर हालत में है।
लोगों का कहना है कि ग्वालियर की हर सड़क जर्जर हालत में है।

ट्रांसपोर्ट नगर, शताब्दीपुरम में भी गड्‌ढों से परेशानी यह हाल किसी एक जगह का नहीं है, बल्कि पूरे शहर का है। सड़कों की स्थिति इतनी खराब है कि लोगों का बीमारी से लेकर आर्थिक नुकसान हो रहा है। ग्वालियर के ट्रांसपोर्ट नगर में तो हालात बेहद खराब हैं। यही हाल शताब्दीपुरम से लेकर डीडीनगर का है।

पेच रिपेयरिंग का काम सभी जगह चल रहा है नगर निगम के उपायुक्त इंजीनियर एपीएस चौहान का कहना है कि पेच रिपेयरिंग का काम पूरे शहर में चल रहा है। जहां-जहां से गणेश प्रतिमाएं निकलना हैं, वहां मुस्तैदी के साथ काम कराया जा रहा है। जहां एक दिन पहले हादसा हुआ है, वहां भी काम जारी है।

ऊर्जा मंत्री बोले- एजेंसी के खिलाफ एक्शन होगा ऊर्जा मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर का कहना है कि जहां हादसा हुआ है, वहां सड़क सही थी। किसी एजेंसी के जरिए वहां खुदाई की गई है। प्रतिमा गिरकर खंडित होने से लोगों की आस्था को चोट पहुंची है। गड्‌ढे के लिए जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई होनी चाहिए और होगी।

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