महाराष्ट्र में 11 सीटों पर MLC चुनाव, BJP सबसे मजबूत

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महाराष्ट्र में 11 सीटों पर विधान परिषद (MLC) के चुनाव होने हैं। 12 जुलाई को वोटिंग है और उसी दिन नतीजों का भी ऐलान होगा। 11 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों ने नॉमिनेशन फाइल किया है। एक कैंडिडेट को जीत के लिए 23 विधायकों के वोट चाहिए।

लोकसभा नतीजों के बाद महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी का पलड़ा भारी है, लेकिन MLC के चुनाव में BJP और उसके गठबंधन वाली महायुति मजबूत दिख रही है। दैनिक भास्कर ने इस बारे में पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और सीनियर जर्नलिस्ट्स से बात की। ज़्यादातर के मुताबिक महायुति 11 में से 9 सीटें जीत सकती है। वहीं, महाविकास अघाड़ी को फिलहाल सिर्फ 2 सीटें ही मिलती दिख रही हैं।

हालांकि, लोकसभा चुनावों के बाद माहौल बदला है और शिंदे गुट वाली शिवसेना और अजित पवार वाली NCP के कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। ऐसे में चुनाव में अगर क्रॉस वोटिंग हुई, तो महाविकास अघाड़ी को इसका फायदा मिल सकता है।

ये फायदा कितना होगा ये देखना अभी बाकी है, लेकिन इस चुनाव के नतीजों का असर महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों पर भी देखने को मिलेगा।

चुनाव में 6 पार्टियों ने उतारे 12 कैंडिडेट
महाराष्ट्र में सत्ता संभाल रही महायुति ने चुनाव में 9 कैंडिडेट उतारे हैं। इसमें BJP ने सबसे ज्यादा 5 कैंडिडेट खड़े किए हैं। वहीं, अजित पवार की NCP और शिवसेना शिंदे गुट ने दो-दो कैंडिडेट उतारे हैं। विपक्ष में बैठी महाविकास अघाड़ी के 3 उम्मीदवार मैदान में हैं।

इसमें कांग्रेस और शिवसेना- UBT ने 1-1 कैंडिडेट खड़ा किया है, जबकि शरद पवार की NCP यानी NCP-SP शेतकरी कामगार पक्ष के उम्मीदवार जयंत पाटिल का समर्थन कर रही है। जयंत पाटिल अभी MLC हैं।

सबसे बड़ी पार्टी BJP के पास जीत के लिए पूरे नंबर्स
महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स को समझने वाले सीनियर जर्नलिस्ट बृजमोहन पांडे का कहना है कि विधायकों के नंबर्स के हिसाब से महायुति मजबूत दिख रही है। वो 11 में से 9 सीटें जीत सकती है। महाविकास अघाड़ी अभी की स्थिति में वो 2 सीटें जीतती ही नजर आ रही है। हालांकि, क्रॉस वोटिंग से इनकार नहीं किया जा सकता है।

सीनियर जर्नलिस्ट श्रीकांत देशपांडे बताते हैं, ‘विधानसभा में नंबर्स के हिसाब से BJP सबसे बड़ी पार्टी दिख रही है। उसे अपने सभी 5 उम्मीदवारों की जीत के लिए कम से कम 115 वोट चाहिए। अभी BJP के पास 103 विधायक हैं। इसके अलावा उसे 9 अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलियों का समर्थन हासिल है। ऐसे में उसके पास पर्याप्त नंबर्स नजर आ रहे हैं।’

महाविकास अघाड़ी की जीत 3 समीकरणों पर टिकी
बृजमोहन पांडे बताते हैं, ‘लोकसभा चुनाव में जिस तरह महाविकास अघाड़ी ने जीत दर्ज की है, उससे वे बेहद उत्साहित हैं। महाराष्ट्र में जल्द ही विधानसभा चुनावों का ऐलान हो सकता है। इस स्थिति में महाविकास अघाड़ी के पास दो साल पहले हुई गद्दारी और पार्टी को तोड़ने का बदला लेने का एक बड़ा मौका है।

बृजमोहन बताते हैं कि मौजूदा वक्त में इन समीकरणों के आधार पर जीत और हार तय होगी…
1. NCP में टूट की संभावना: BJP में टूट की संभावना कम है। उद्धव ठाकरे पहले ही शिंदे गुट के विधायकों को वापस ना लेने की बात कह चुके हैं। ऐसे में सभी की नजर शरद पवार पर है। उनकी पार्टी के नेता पहले कह भी चुके हैं कि अजित पवार गुट के कई विधायक उनके कॉन्टैक्ट में हैं।

ऐसे में अगर NCP में टूट और क्रॉस वोटिंग हुई तो महाविकास अघाड़ी एक सीट ज्यादा जीत सकती है।

2. समाजवादी पार्टी और AIMIM का समर्थन: इन दोनों पार्टियों के 3 विधायक हैं। अगर वे अपना समर्थन महाविकास अघाड़ी को देते हैं तो उनकी जीत की संभावना बढ़ जाएगी। हालांकि, AIMIM ने अभी अपनी रणनीति साफ नहीं की है।

3. इन दो पार्टियों के वोट निर्णायक: बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी और प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी के पास मिलाकर करीब 6 विधायक हैं। उनका समर्थन या विरोध महाविकास अघाड़ी की जीत को प्रभावित कर सकता है।

उद्धव ठाकरे ने उतारा पार्टी का सबसे मजबूत कैंडिडेट
बृजमोहन पांडे बताते हैं, ‘महाविकास अघाड़ी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है, इसलिए उद्धव ने अपने पर्सनल सेक्रेटरी मिलिंद नार्वेकर को मैदान में उतारा है। उन्हें उम्मीद है कि उनके उम्मीदवार सामने वाली पार्टी में सेंध लगाने में कामयाब होंगे।’

क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो शिवसेना के दोनों उम्मीदवार की जीत की संभावना
श्रीकांत देशपांडे कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में क्रॉस वोटिंग नहीं हुई, तो उनके भी दोनों उम्मीदवार जीत सकते हैं। अभी शिंदे की शिवसेना के पास 38 विधायक हैं। उन्हें करीब 10 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है।’

‘उप मुख्यमंत्री अजित पवार की NCP ने भी अपने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। उनके पास 40 विधायक हैं। उन्हें 6 वोट और चाहिए। अघोषित तौर पर कांग्रेस का एक विधायक अजित के पाले में आ चुका है। फिर भी दोनों उम्मीदवारों की जीत के लिए 5 विधायकों का समर्थन चाहिए।’

देशपांडे आगे कहते हैं, ‘NCP-SP के अध्यक्ष शरद पवार और शिवसेना-UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मोर्चा संभाल लिया है। महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जिसमें से एक विधायक ने अजित पवार गुट को समर्थन देने का ऐलान किया है। ऐसे में अब उनके पास 36 वोट बचते हैं।’

‘हालांकि, उनके पास 13 वोट एक्स्ट्रा हैं। ये वोट शेतकरी कामगार पक्ष के जयंत पाटिल को ट्रांसफर होंगे। शरद पवार की पार्टी के 12 विधायक पहले ही जयंत को समर्थन दे चुके हैं। ऐसे में उनकी जीत भी लगभग पक्की मानी जा रही है।

क्रॉस वोटिंग की संभावना से NCP-SP का इनकार नहीं
NCP-SP के प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो कहते हैं, ‘महाविकास अघाड़ी के तीनों कैंडिडेट्स की जीत होगी। हमने सभी समीकरण सेट कर लिए हैं, लेकिन ये कैसे होगा इसका खुलासा अभी नहीं किया जा सकता है।’

क्रॉस वोटिंग के सवाल पर क्लाइड कहते हैं, ‘लोकसभा चुनाव में जनता ने जिस तरह अजित पवार गुट को नकारा है, इससे उनके साथ गए लोगों को भी ये साफ हो चुका है कि आने वाले समय में कुछ भी हो सकता है।’

‘सबको पता है कि अजित पवार के साथ जाने का नुकसान हुआ है, ऐसे में विधायक घर वापसी कर सकते हैं। सोर्सेज की मानें तो पार्टी के अंदर इस बात को लेकर चर्चा है कि अजित पवार गुट के कम से कम 10 विधायक इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग करेंगे।’

शिवसेना-UBT को सहयोगियों का सहारा, बोले- गद्दारों से नहीं लेंगे मदद
इस चुनाव में असली चुनौती शिवसेना-UBT के सामने है। मौजूदा समय में उनके पास सिर्फ 16 वोट हैं। उन्हें 7 और वोटों की जरूरत है। शिवसेना-UBT प्रवक्ता आनंद दुबे कहते हैं, ‘हमारे पास कांग्रेस, NCP- SP और सहयोगी दलों का समर्थन है। इन सबके आंकड़े मिला लिए जाएं तो ये 23 से काफी ज्यादा होंगे। ऐसे में हमें अपनी जीत पर पूरा भरोसा है।’

वहीं, शिवसेना शिंदे गुट के विधायकों के उद्धव ठाकरे से संपर्क के सवाल पर आनंद दुबे कहते हैं, ‘वे सभी गद्दार हैं और हमें उनका समर्थन नहीं चाहिए। जैसे लोकसभा चुनाव में उनकी हार हुई है, वैसे ही विधानसभा चुनाव में जनता उन्हें जवाब देगी।’

NCP चुनाव के लिए BJP की नाराजगी सहने को भी तैयार
इस चुनाव में NCP के लिए एक-एक वोट मायने रखता है। यही वजह है कि BJP के मना करने के बावजूद अजित पवार ने डी-कंपनी से संबंध के आरोप में अरेस्ट हुए और जमानत पर बाहर आए नवाब मलिक को भी अपने साथ शामिल कर लिया है।

इससे पहले भी अजित पवार, मलिक को पार्टी में शामिल कराना चाहते थे, लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के नाम पर एक खुला खत लिखा था। इसके बाद फैसला बदला गया। अब मलिक के आने से BJP में फिर नाराजगी बढ़ सकती है।

विधायकों को मुंबई के फाइव स्टार होटलों में लॉक करने की तैयारी
क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए शिवसेना शिंदे गुट ने अपने विधायकों को होटल में रखने की तैयारी की है। मुंबई के फाइव स्टार होटल में पार्टी ने 60 रूम बुक कराए हैं। जानकारी ये भी मिली है कि उद्धव गुट ने भी अपने सभी 16 विधायकों को 3 दिन के लिए मुंबई के होटल में रखने की तैयारी की है।

इसके अलावा अजित पवार की NCP और BJP विधायकों के भी अलग-अलग होटल में रुकने की जानकारी मिल रही है। 9 जुलाई को अजीत पवार अपने विधायकों के साथ सिद्धि विनायक के दर्शन के लिए पहुंचे। यहां से वे एक फाइव स्टार होटल में शिफ्ट हो गए हैं।

एक्सपर्ट: ये चुनाव विधानसभा के चुनावों की दिशा तय करेंगे
सीनियर जर्नलिस्ट श्रीकांत देशपांडे कहते हैं, ‘विधान परिषद के चुनाव में एक कैंडिडेट को जीत के लिए 23 वोट चाहिए। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल ढाई से तीन महीने में पूरा हो जाएगा। ऐसे में आगे होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से ये चुनाव बेहद अहम हैं। यहीं से चुनावों की दिशा तय होगी। यानी कौन किसके साथ खड़ा है और किसके पास कितनी ताकत है?’

देशपांडे के मुताबिक, ‘विधान परिषद चुनाव में हर सदस्य को 6 साल का वक्त मिलता है। इसलिए दोनों गठबंधन और सभी 6 पार्टियां अपनी-अपनी ताकत लगा रहे हैं। महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में अभी 274 विधायक हैं। 14 सीटें विधायकों के निधन और कुछ के सांसद बनने के कारण खाली हुई हैं।’

4 सीटों पर हुए चुनावों में NDA-INDIA ब्लॉक बराबरी पर
महाराष्ट्र विधान परिषद की चार सीटों पर बीते 26 जून को चुनाव हुए। 1 जुलाई को आए नतीजों में महायुति और महाविकास अघाड़ी बराबरी पर रहीं। मुंबई ग्रेजुएट और मुंबई शिक्षक सीट पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना-UBT का दबदबा रहा। मुंबई ग्रेजुएट सीट से अनिल परब और मुंबई शिक्षक सीट से जे. एम. अभ्यंकर ने जीत हासिल की।

वहीं, कोंकण ग्रेजुएट सीट पर BJP के निरंजन डावखरे ने जीत हासिल की। जबकि नासिक शिक्षक सीट से शिवसेना के किशोर दराडे ने जीत दर्ज की है।

राज्यसभा की तरह विधान परिषद भी उच्च सदन, ये है चुनाव की प्रक्रिया
सीनियर जर्नलिस्ट जितेंद्र दीक्षित बताते हैं कि विधान परिषद, राज्यसभा की तरह ही उच्च सदन होता है। भारतीय संविधान की धारा 169 में ये प्रावधान है कि कई राज्य विधान परिषद को स्थापित या खत्म कर सकते हैं। अभी कुल 6 राज्यों में विधान परिषद है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

जितेंद्र आगे बताते हैं कि राज्यसभा की तरह ही विधान परिषद भी एक परमानेंट सदन है। इसे बीच में डिसॉल्व नहीं किया जा सकता है। इसके लिए भी हर दो साल में चुनाव होते हैं। इन चुनावों में आम नागरिक हिस्सा नहीं ले सकते हैं। विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर्ड हो जाते हैं।

एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं
महाराष्ट्र विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य नगर निगम या महानगर पालिका के प्रतिनिधि चुनते हैं। जबकि एक तिहाई सदस्य विधानसभा में चुनकर आए विधायक चुनते हैं। 1/6 सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, जो कला, खेल, विज्ञान, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से आते हैं। इसके अलावा टीचर वर्ग और ग्रेजुएट वर्ग भी अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त करता है।

विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधानसभा की संख्या से एक तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकती। महाराष्ट्र में विधानसभा के 288 सदस्यों के साथ विधान परिषद में 77 सदस्य हो सकते हैं। विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिए योग्यताएं लगभग एक जैसी हैं।

हालांकि विधानसभा के लिए उम्र 25 साल और विधान परिषद के लिए 30 साल है। विधानसभा के सदस्य 5 साल के लिए चुने जाते हैं, जबकि विधान परिषद के सदस्य 6 साल के लिए निर्वाचित होते हैं।

विधानसभा ज्यादा पावरफुल है। मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना होता है, वरना सरकार गिर जाती है। मुख्यमंत्री को विधान परिषद या विधानसभा में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी है।

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