आयुर्वेद विद्यार्थियों हेतु जागरूकता सत्र का आयोजन*

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 *सादर प्रकाशनार्थ*

 

*आयुर्वेद विद्यार्थियों हेतु जागरूकता सत्र का आयोजन*

 

*डिजिटल डिटॉक्स: आज के समय की आवश्यकता*

 

*छात्रों को भाया डिजिटल डिटॉक्स*

 

 

मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डिजिटल डिटॉक्स विषय पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि किस प्रकार सीमित और सजग डिजिटल उपयोग से एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा मानसिक संतुलन को बेहतर बनाया जा सकता है।

सत्र के दौरान विद्यार्थियों को डिजिटल आदतों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सरल व व्यवहारिक उपाय बताए गए। इसके साथ ही एक ध्यान एवं मेडिटेशन गतिविधि सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। ध्यान अभ्यास के माध्यम से उन्हें मन की शांति, तनाव से मुक्ति तथा आत्म-जागरूकता का अनुभव कराया गया। विद्यार्थियों ने इस सत्र को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक और दैनिक जीवन में अपनाने योग्य बताया।

सभी विद्यार्थियों ने स्वीकार किया कि आज वह मोबाइल को नहीं परंतु मोबाइल उनके मन को चल रहा है एवं बच्चे इस प्रकार की आदतों से छूटना चाहते हैं।

इसके साथ ही _बीके डॉ प्रियंका_ द्वारा नशा मुक्ति विषय पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार का नशा न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि मन की शक्ति, निर्णय क्षमता और आत्म-सम्मान को भी कमजोर करता है। राजयोग और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से नशे की लत से मुक्त होकर स्वच्छ, स्वस्थ और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।

 

वरिष्ठ राजयोगी शिक्षिका _बीके हेमा बहन_ द्वारा विद्यार्थियों को बताया गया कि राजयोग केवल ध्यान की विधि नहीं है, बल्कि आत्म-चेतना में स्थित होकर परमात्मा से जुड़ने की एक वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पद्धति है, जो मन, बुद्धि और संस्कारों को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।

सत्र के दौरान _बीके सोनम बहन_ द्वारा राजयोग अभ्यास को गाइडेड मेडिटेशन कमेंट्री के माध्यम से कराया गया, जिसमें विद्यार्थियों को स्वयं को आत्मा के रूप में अनुभव करने, विचारों को स्थिर करने तथा परमात्म-स्मृति में स्थित होने का अभ्यास कराया गया। इस ध्यान अनुभव से विद्यार्थियों ने आंतरिक शांति, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन का अनुभव किया।

 

सत्र के अंत में _बीके भारती_ बहन द्वारा विद्यार्थियों से नशा मुक्त जीवन, संतुलित डिजिटल उपयोग, स्वस्थ दिनचर्या एवं नियमित ध्यान अभ्यास से संबंधित प्रतिज्ञाएं भी कराई गईं। इसके साथ ही सहभागिता बढ़ाने के लिए कुशल मंच संचालन करते हुए _बीके खुशी_ द्वारा संवादात्मक गतिविधियाँ (एक्टिविटीज) भी करवाई गईं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों ने आत्ममंथन किया और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया।

विद्यार्थियों ने इस सत्र को अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं जीवन उपयोगी बताया।

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