देश-विदेश तक गूंज रही जीजीबाई मंदिर की आस्था
भोपाल के कोलार क्षेत्र की ऊंची पहाड़ी पर विराजमान माता कामेश्वरी शक्तिपीठ को लोग जीजीबाई माता मंदिर के नाम से जानते हैं। अनोखी परंपरा के कारण यह मंदिर ‘चप्पल वाली माता’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां देवी को चप्पल, जूते, सैंडल और मनपसंद वस्तुएं अर्पित करने से वे प्रसन्न होती हैं।
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 121 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और हर कदम पर वे भक्ति और विश्वास का अनुभव करते हैं। 1999 में स्थापित यह शक्तिपीठ आज देश-विदेश तक ख्याति प्राप्त कर चुका है, जहां अमेरिका, इंग्लैंड, दुबई और सऊदी अरब तक से भक्त माता के लिए भेंट भेजते हैं।

अजब परंपरा और इसकी कहानी मंदिर के संस्थापक ओमप्रकाश महाराज बताते हैं कि यहां देवी जी को पुत्री स्वरूप माना जाता है। हम देवी को बेटी मानते हैं और उनके हर शौक को पूरा करने की कोशिश करते हैं। जैसे पिता अपनी बच्ची को खुश करने के लिए कुछ भी करता है, वैसे ही भक्त भी चप्पल, घड़ी, चश्मा और पोशाक चढ़ाते हैं। देवी जी हर पोशाक सिर्फ एक बार पहनती हैं और फिर उसे भक्तों में बांट दिया जाता है। अब तक वे लगभग 10-15 लाख रुपए की पोशाकें पहन चुकी हैं।”

विदेशों से श्रद्धालु ड्रेस,चश्मे और घड़ी लाते
विदेशों से आने वाले श्रद्धालु साल में एक बार मंदिर आते हैं और माता के लिए खास वस्तुएं जैसे फरी की ड्रेस, स्टाइलिश चश्मे और घड़ी लाते हैं। ओमप्रकाश महाराज का कहना है कि “बेटी के बचपन को संजोने की तरह हम देवी जी का हर शौक पूरा करते हैं। यहां देवी नहीं बल्कि पुत्री के रूप में हमारी मां विराजमान हैं।

पूजा-पाठ और दर्शन की व्यवस्था जीजीबाई मंदिर की एक और खासियत यह है कि यहां किसी प्रकार का ताला या चाबी नहीं लगती। मंदिर हमेशा खुला रहता है, ताकि भक्त किसी भी समय दर्शन कर सकें। नवरात्रि के दिनों में यहां का नजारा अद्भुत होता है। दिन-रात यज्ञ, भजन-कीर्तन, भागवत कथा और विशेष पूजन चलते रहते हैं।
ओमप्रकाश महाराज बताते हैं कि “इस मंदिर का कोई ट्रस्ट या समिति नहीं है। यहां दान-पेटी तक नहीं है, सब कुछ माता की कृपा से अपने आप होता है। अब तक यहां 100 से ज्यादा भागवत कथाएं और करीब 100 यज्ञ हो चुके हैं। साल में पांच-छह बड़े यज्ञ और नियमित हवन अनुष्ठान माता की कृपा का प्रमाण हैं। मंदिर परिसर में हर समय भक्तों की आवाजाही रहती है। कुछ लोग सेल्फी लेने आते हैं, कुछ मनोकामना लेकर, तो कुछ माता की अद्भुत परंपरा को देखने के लिए।

भक्तों की आस्था की कहानियां
- 20 साल से मंदिर आ रहे भक्त विशाल कहते हैं, “मेरी कई मनोकामनाएं यहां पूरी हुई हैं। कुछ निजी वजहों से सब साझा नहीं कर सकता, लेकिन माता जी के दरबार से खाली लौटना नामुमकिन है। यहां का वातावरण इतना सच्चा है कि हर बार मन को शांति और विश्वास मिलता है।
- भक्त पकी सोनी बताती हैं, “मैं पिछले चार साल से यहां आ रही हूं। यहां 12 ज्योतिर्लिंग और कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं। नवरात्रि में यहां की भीड़ और ऊर्जा अद्भुत होती है। हमारे परिवार की कई शुभ कामनाएं यहां आकर पूरी हुई हैं। माता कामेश्वरी का यह दरबार हर भक्त को अपनी ओर खींचता है।
मंदिर परिसर और अन्य आकर्षण मंदिर परिसर में 51 मूर्तियां स्थापित हैं। यहां राम-सीता, राधा-कृष्ण, हनुमान जी, नवग्रह, शिव-पार्वती और मां काली के मंदिर भी हैं। ओमप्रकाश महाराज का सपना है कि आने वाले समय में सभी 51 शक्तिपीठों की मूर्तियां यहां स्थापित की जाएं। वे कहते हैं, “यदि हमें 20 साल और मिल जाएं, तो हम हिंदुस्तान के नक्शे पर ऐसा मंदिर बना देंगे जहां दुनिया की कोई ताकत रुकावट नहीं डाल सकेगी।” परिसर में तीन साल पहले नवग्रह मंदिर की स्थापना हुई, जबकि 2011 में 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित किए गए। हर कोने में भक्ति और शक्ति का एहसास होता है।

करवा चौथ का मंदिर अनोखा
पहाड़ी पर माता जीजीबाई मंदिर के अलावा मां दुर्गा के नौ स्वरूप देखने को मिलते हैं. इसके अलावा यहां विश्व का इकलौता करवा चौथ माता मंदिर भी स्थित है. साथ ही नवग्रह शनि मंदिर, हजारों भुजाओं वाली काली माता मंदिर, श्री राम दरबार और 12 ज्योतिर्लिंग सहित भगवान की करीब 40 प्रतिमाएं विराजमान हैं।

