☀ प्रभु प्रेमी संघ ? 11 मई, 2024 (शनिवार)
पूज्य सद्गुरुदेव आशीषवचनम्
।। श्री: कृपा ।।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया ।।
उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यैः ।
तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।।”
शुभ कर्म, आध्यात्मिक विचार एवं भगवत्कृपा के आश्रय में रहकर अनन्त-सामर्थ्य, शाश्वत आह्लाद एवं अक्षय ऊर्जा के साथ जीवन की दिव्य सम्भावनाओं को साकार करने का दिव्य पर्व “अक्षय तृतीया” एवं भगवान श्री परशुराम जी के प्राकट्य दिवस की हार्दिक शुभेच्छा ..! अक्षय तृतीया (आखातीज) को अनन्त-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है। जो कभी क्षय नहीं होती, उसे अक्षय कहते हैं। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है। भारतीय पर्वों में विशेष स्थान व महत्व रखने वाली अक्षय तृतीया को किए जाने वाले प्रत्येक शुभ कार्य का अक्षय फल मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि इस पवित्र दिवस पर यदि मनुष्य अपने अपराधों के लिए प्रभु से सच्चे हृदय से क्षमा याचना करता है, तो भगवान प्रसन्न होकर उसे क्षमा कर देते हैं और प्रसाद स्वरूप उसे सद्गुण प्रदान करते हैं। इसी मान्यता के चलते धर्मभीरू लोग अपने दुर्गुणों को भगवान के श्रीचरणों में अर्पित कर उनसे सद्गुणों का वरदान माँगते हैं। इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है। भविष्य पुराण के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग का प्रारम्भ अक्षय तृतीया से ही हुआ था। भगवान श्रीहरि विष्णु के नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी स्वरूप का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। जगतपिता ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव ही इस दिन हुआ। भगवान श्रीबद्री नारायण जी के कपाट भी इसी तिथि को खुलते हैं। वृंदावन स्थित श्रीबाँकेबिहारी जी महाराज के चरण दर्शन वर्ष में एक बार अक्षय तृतीया को ही होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन महाभारत का युद्ध भी समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ के प्रयासों से माँ गँगा का इस दिन धरती पर अवतरण हुआ था। इस पवित्र तिथि को किए दान का कभी क्षय नहीं होता है। इस तरह अक्षय तृतीया सेवाकार्य दान-पुण्य, पूजा-पाठ, जप-तप और शुभकर्मों के महत्व को भी प्रतिपादित करती है। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गँगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। अतः स्वयं में समाहित अनन्त-सामर्थ्य अखण्ड-आनन्द, अक्षय-ऊर्जा के साथ दिव्य-सम्भावनाओं को सिद्ध-साकार करने का पर्व ‘अक्षय तृतीया’ सम्पूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी सिद्ध हो ..।
