हिमंता ने दुश्मन बताया, 85% मुस्लिम वोटर वाला धुबरी BJP के लिए पहेली

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‘बदरुद्दीन अजमल जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, वो असम के लिए खतरनाक है। वे समाज की सेवा के नाम पर कट्टरपंथी संगठनों से पैसे ले रहे हैं। ऐसा नेटवर्क बना रहे हैं, जो असम की संस्कृति के लिहाज से सही नहीं है। वे जैसे लोगों को साथ लेकर चल रहे हैं, उस लिहाज से वे असम के दुश्मन हैं।’

असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने ये बात फरवरी, 2021 में कही थी। सरमा तब BJP सरकार में मंत्री थे। अगले महीने राज्य में चुनाव हुए। हिमंता ने जिन बदरुद्दीन अजमल को असम का दुश्मन बताया था, उनकी पार्टी AIUDF ने 16 सीटें जीतीं। इससे ज्यादा सीटें सिर्फ कांग्रेस और सरकार बनाने वाली BJP के पास थीं।

बदरुद्दीन अजमल धुबरी सीट से लगातार तीन बार से सांसद हैं। इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं। दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। BJP असम की 14 में से 13 सीट जीतने का दावा कर रही है। एक सीट जो छोड़ दी, वो धुबरी ही है। वजह हैं बदरुद्दीन अजमल।

धुबरी में अजमल की हार तो दूर, कोई उनके बराबर भी नहीं पहुंच पाता। कांग्रेस का दबदबा रहा हो या मोदी लहर, अजमल 2009 से अजेय हैं। 2019 का चुनाव उन्होंने 2.26 लाख वोट से जीता था।

इसकी वजह जानने दैनिक भास्कर धुबरी पहुंचा। असम में 10 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है, 4 सीटों पर बाकी है। यहां थर्ड फेज में 7 मई को वोटिंग होगी। धुबरी में इनमें शामिल है। यहां बदरुद्दीन अजमल का मुकाबला कांग्रेस के रकीबुल हुसैन और असम गण परिषद के जाबेद इस्लाम से है। BJP ने कैंडिडेट नहीं उतारा है। वो सहयोगी पार्टी असम गण परिषद का समर्थन कर रही है।

धुबरी में लोगों, एक्सपर्ट और नेताओं से बात करने के बाद 5 बातें समझ आती हैं।

1. हिमंता भले अजमल को असम का दुश्मन कहते हों, गृह मंत्री अमित शाह उन पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगा चुके हों, लेकिन अजमल को धुबरी में हराना फिलहाल नामुमकिन है।

2. 1971 से 2004 तक धुबरी सीट पर लगातार कांग्रेस जीतती रही। इसके बाद भी पार्टी कैंडिडेट हमेशा दूसरे नंबर पर रहे। अब असम गण परिषद को BJP का सपोर्ट मिलने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

3. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि BJP ने बदरुद्दीन अजमल के साथ समझौता कर लिया है। CM हिमंता भी कह चुके हैं कि हम धुबरी नहीं जीतना चाहते। मैं वहां प्रचार के लिए नहीं जाऊंगा।

4. धुबरी में 85% वोटर मुस्लिम हैं। इस बार भी तीनों कैंडिडेट मुस्लिम हैं। मुकाबला AIUDF और असम गण परिषद के बीच ही दिख रहा है। कांग्रेस के रकीबुल बाहरी होने की वजह से पिछड़ रहे हैं।

5. बदरुद्दीन अजमल के सांसद रहते धुबरी में मेडिकल कॉलेज बना, ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे लंबा पुल बन रहा है। आम लोग इसका क्रेडिट अजमल को देते हैं।

धुबरी में बंगाली भाषी मुस्लिम सबसे ज्यादा, यही अजमल के वोटर
धुबरी की करीब 80% आबादी मुस्लिम है। इनमें भी बंगाली भाषी मुस्लिम ज्यादा हैं। ये बदरुद्दीन अजमल के कोर वोटर हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा ये शहर ब्रिटिश शासन में से आए मजदूरों ने बसाया था।

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 14 में से 7 सीटें जीती थीं। BJP को 4, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को एक-एक सीट मिली थी। इसी चुनाव में बदरुद्दीन अजमल ने पहली बार धुबरी सीट कांग्रेस से छीन ली थी।

कांग्रेस कैंडिडेट रैलियों में कह रहे- अजमल और हिमंता दोस्त
मुस्लिम आबादी की वजह से धुबरी में हर पार्टी मुस्लिम कैंडिडेट उतारती है। कांग्रेस कैंडिडेट रकीबुल हुसैन अपनी रैलियों में कह रहे हैं कि अगर हिमंता को हटाना है, तो अजमल को हराना पड़ेगा। अजमल और हिमंता के बीच दोस्ती है।

रकीबुल हुसैन की रैली में मिले रिंकु अली कहते हैं, ‘मैं सिर्फ रकीबुल को सुनने आया हूं। अभी तय नहीं है कि उन्हें वोट दूंगा या नहीं, क्योंकि पार्टी तो अच्छी है। हम पीढ़ियों से कांग्रेस को वोट देते रहे हैं।’

60 साल के बजलुल हक असम गण परिषद के डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट रहे हैं। चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी छोड़ दी। बजलुल हक कहते हैं ‘मेरी उम्र 60 साल है। मैंने धुबरी में बहुत बदलाव देखे हैं। इस बार लड़ाई संविधान बचाने की है। अगर संविधान बचाना है, तो कांग्रेस को वोट देना पड़ेगा।’

कांग्रेस कैंडिडेट रकीबुल हुसैन भी संविधान बचाने की बात कहकर वोट मांग रहे हैं। रकीबुल लोगों से कह रहे है कि अजमल को दिया वोट BJP को जाएगा। कुछ हद तक वे ये बात लोगों तक पहुंचाने में कामयाब भी हो रहे हैं।

हालांकि, इन बातों से अलग कई लोग डेवलपमेंट पर वोट देने की बात कह रहे हैं। धुबरी के इस्लाम अहमद कहते हैं, ‘कांग्रेस कैंडिडेट कह रहे हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। उन्हें लोगों को बताना चाहिए कि अगर वे जीते, तो धुबरी के लिए क्या करेंगे। वे बस डर का माहौल बनाकर वोट लेना चाहते है।’

अजमल का उदाहरण देते हुए इस्लाम बताते हैं, ‘पिछले चुनाव में अजमल ने वादा किया था कि वे जीते तो फूलबाड़ी ब्रिज बनाएंगे। उन्होंने अपना वादा पूरा किया। ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे ही सभी प्रत्याशियों को अपने प्लान के बारे में बात करनी चाहिए, न कि लोगों के बीच डर पैदा करने की।’

असम गण परिषद के कैंडिडेट बोले- धुबरी 15 साल पीछे हो गया, UCC पर चुप्पी
धुबरी में BJP ने कैंडिडेट नहीं उतारा है। उसकी सहयोगी पार्टी असम गण परिषद के जाबेद इस्लाम चुनाव लड़ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में जाबेद इस्लाम कहते हैं, ‘सरकार ने बहुत काम किया है। लोगों को योजनाओं के अलावा डेवलपमेंट भी मिला है। इससे उनकी आंखें खुली हैं। 15 साल में हम बहुत पीछे हो गए हैं।’

CM हिमंता कह रहे हैं कि हम लोग धुबरी नहीं जीतेंगे?
जाबेद इस्लाम जवाब देते हैं, ‘उन्होंने तीन बार कहा है कि धुबरी आएंगे और जीतेंगे भी। 15-20 दिन पहले जो बात थी, वह तो क्लियर नहीं थी। अब उन्हें कॉन्फिडेंस मिला है और यहां से रिपोर्ट भी गई है। हम लोग भी यहां रिमोट एरिया में जा रहे हैं। लोग इस बार लोकल आदमी को जिम्मेदारी देंगे।’

असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड, यानी UCC बड़ा मुद्दा है। हमने जाबेद इस्लाम से इस पर सवाल किया तो उन्होंने जवाब नहीं दिया।

कांग्रेस कैंडिडेट बोले- हिमंता घरों पर बुलडोजर चला रहे, अजमल कुछ नहीं कहते
कांग्रेस के कैंडिडेट रकीबुल हुसैन UCC का विरोध कर रहे है। रकीबुल सामगुरी विधानसभा सीट से विधायक हैं। 2021 से असम विधानसभा में विपक्ष के उपनेता भी हैं। कांग्रेस सरकार में 15 साल तक मंत्री रह चुके हैं।

वे कहते हैं, ‘धुबरी के लोग हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ हैं, लेकिन बदरुद्दीन अजमल हिमंता के साथ खड़े हैं। CM घरों पर बुलडोजर चलवा रहे हैं। पुलिस लोगों को उठाकर ले जा रही है, लेकिन अजमल CM के खिलाफ कुछ नहीं करते।’

बदरुद्दीन अजमल बोले- दोस्ती किसी से भी हो सकती है
दैनिक भास्कर ने हिमंता बिस्वा सरमा के साथ दोस्ती पर AUIDF चीफ बदरुद्दीन अजमल से सवाल पूछा। वे साफ जवाब नहीं देते, बस कहते हैं कि दोस्ती और दुश्मनी तो किसी से भी हो सकती है।

अजमल चुनाव में UCC को मुद्दा बना रहे हैं। वे कहते हैं कि सरकार को UCC नहीं लाना चाहिए। स्कूल में जैसे हर तरह के बच्चे रहते हैं, वैसे ही देश में अलग-अलग जातियां रहती हैं। किसी को बांधना नहीं चाहिए, ये देश के लिए ठीक नहीं है। आप सभी मर्दों को कुर्ता पहनने को कहें और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों को जींस की जगह कुर्ता पहनने को कहें, तो सरकार नामुमकिन जैसी बात कर रही है।

कश्मीर में आर्टिकल-370 हटाकर और ट्रिपल तलाक खत्म करके क्या किया, क्या मुस्लिम औरतों के लिए सिर्फ तलाक ही मसला है। ये सरकार उनकी एजुकेशन के लिए क्यों कुछ नहीं करती। सरकार उन पर हो रहे जुल्मों को क्यों नहीं रोकती। इस सरकार ने बेंगलुरु में हिजाब के बहाने बच्चों का साल खराब किया। ये सरकार असल मुद्दों से लोगों को भटकाती है।

एक्सपर्ट बोले- धुबरी डेवलपमेंट में पिछड़ा, अजमल एक फैक्ट्री नहीं लगवा पाए
धुबरी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट प्रणव आशीष रॉय बताते हैं कि धुबरी पिछड़ा जिला है, चाहे रोजगार की बात हो या फिर एजुकेशन की। इस बार का चुनाव बदलाव का चुनाव होगा। अजमल साहब के कार्यकाल को 15 साल हो गए हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि इन 15 साल में अजमल ने क्या किया है। धुबरी के लोगों को शहर में काम नहीं मिलता। उन्हें बाहर जाना पड़ता है।’

‘परिसीमन के बाद धुबरी में 27 लाख वोटर हो गए हैं। यहां मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। वे धर्म के नाम पर वोट करते हैं। यही वजह है कि अजमल चुनाव जीत जाते हैं। अजमल साहब यहां एक फैक्ट्री तक नहीं लगवा पाए। रोजगार की समस्या सबसे बड़ी है। पढ़े-लिखे वोटर शायद इस बार अजमल को वोट नहीं देंगे।’

धुबरी में हमेशा मुस्लिम कैंडिडेट जीते
धुबरी सीट पर कभी कोई हिंदू कैंडिडेट नहीं जीता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर मुस्लिम कैंडिडेट के अलावा कोई चुनाव लड़ेगा, तो वो चुनाव नहीं जीत सकता। धुबरी 50% या ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली 15 लोकसभा सीटों में से एक है। 1998 में BJP के डॉ. पन्नालाल ओसवाल ने यहां से चुनाव लड़ा था। उन्हें 24% वोट मिले थे। 1999 में उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम ने उनकी हत्या कर दी थी।

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