धोती-कुर्ता और स्पोर्ट्स शूज पहनते हैं; वाराणसी से मोदी के खिलाफ भी लड़ेंगे
लोकसभा चुनाव में कई पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के रिटायर्ड डीजीपी मैथिलीशरण गुप्त का नाम भी शामिल हो गया है। वे मप्र के लोकसभा चुनाव में इकलौते पूर्व नौकरशाह हैं, जो चुनावी मैदान में हैं।
मैथिलीशरण 2 लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। गुप्त ने भोपाल सीट से पर्चा भरा है और दूसरा चुनाव वे पीएम मोदी के सामने वाराणसी सीट से लड़ने वाले हैं। वाराणसी में सबसे आखिरी चरण में चुनाव होने वाला है।
दैनिक भास्कर से बातचीत में गुप्त ने कहा कि मैं इसके जरिए पीएम मोदी का ध्यान खींचना चाहता हूं, क्योंकि उन्होंने मेरे क्राइम फ्री इंडिया के प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया था।
मैथिलीशरण के प्रचार का अंदाज जुदा है। बाकी प्रत्याशियों की तरह कुर्ता-पजामा नहीं, बल्कि धोती-कुर्ता और स्पोर्ट्स शूज पहनते हैं। वे हाथ में गुब्बारे लेकर लोगों के घर चाय पीने जाते हैं। उन्हें क्राइम फ्री इंडिया के कॉन्सेप्ट के बारे में बताते हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इसकी मुहिम चलाई है।
पढ़िए कैसे चुनाव लड़ रहे हैं पूर्व नौकरशाह मैथिलीशरण गुप्त।

हलफनामे में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर बताई
19 अप्रैल को मैथिलीशरण गुप्त ने भोपाल लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया है। उन्होंने अपनी संपत्ति करीब 19 करोड़ रुपए बताई है, जबकि वे खुद कहते हैं कि उनकी संपत्ति की कीमत इतनी नहीं है। उन्होंने इसे 5 गुना बढ़ाकर बताया है।
इसकी वजह क्या है? इसका जवाब देते हुए मैथिलीशरण कहते हैं कि मैं लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। इस देश को जगाने के लिए नाटक करना पड़ता है। मैंने भी नाटक किया है। नेता नाटक ही तो करते हैं।

वाराणसी से चुनाव लड़ने पर बोले- मेरा मकसद भगत सिंह जैसा
भोपाल सीट के अलावा मैथिलीशरण गुप्त वाराणसी से भी पर्चा दाखिल करने वाले हैं। यहां से बीजेपी के प्रत्याशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के सवाल पर वे कहते हैं कि उन्होंने मेरे प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया, इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं। मेरा मकसद भगत सिंह जैसा है।
भगत सिंह ने असेंबली में स्मोक बम उस जगह पर फेंका था जहां कोई व्यक्ति नहीं था। स्मोक बम से कोई नुकसान भी नहीं होता है। ये सब उन्होंने असेंबली का ध्यान खींचने के लिए किया था। ठीक उसी तरह मैं वाराणसी से सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं, ताकि पीएम मोदी को बता सकूंगा कि भारत बिना एक रुपए खर्च किए क्राइम फ्री हो सकता है।
वे कहते हैं कि मैंने 2017 में भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव में मैंने ऐसी स्कीम और डिजिटल टेक्नोलॉजी का जिक्र किया था जिससे देश को अपराध मुक्त किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का 2 साल तक परीक्षण किया। जब मैं रिटायर हुआ तो मैंने क्राइम फ्री इंडिया की मुहिम शुरू की।

क्या है क्राइम फ्री भारत का कॉन्सेप्ट?
मैथिलीशरण के मुताबिक इस कॉन्सेप्ट में देश के हर व्यक्ति को रोजगार की गारंटी का मौलिक अधिकार मिलेगा। किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तो मिलेगा ही और वो खाद्यान्न का मालिक बना रहेगा। वे कहते हैं कि किसान को उत्तम क्वालिटी का बीज मिलेगा व भुगतान डेबिट अकाउंट से होगा।
फसल का भुगतान खेत में होगा और उसे डेबिट अकाउंट का खर्च नहीं चुकाना होगा। साथ ही श्रमजीवियों की आय में 10 गुना तक इजाफा होगा। गरीबों की 2029 में आय 1 लाख और खर्च करने की शक्ति 2 लाख प्रति परिवार प्रति माह होगी।
सरकारी कर्मचारियों की आय दोगुना होगी। रेवेन्यू स्ट्रीम के जरिए काम पूरा होते ही भुगतान होगा। केंद्र सरकार का खर्च आधा हो जाएगा। साथ ही थाने पहुंचे बगैर आम आदमी की एफआईआर दर्ज होगी। 15 दिन में कोर्ट में चालान पेश होगा। वीडियो बेस ट्रायल सिस्टम के माध्यम से अधिकतम 30 दिन में न्याय मिल जाएगा।

गुप्त बोले- पीएम मोदी को कॉन्सेप्ट समझ नहीं आया
मैथिलीशरण गुप्त का कहना है कि उन्होंने 2017 से लगातार कई कॉन्सेप्ट दिए हैं, जो पीएम को समझ नहीं आए हैं। वे कहते हैं कि जो कॉन्सेप्ट मैंने दिए हैं वह इतने पावरफुल हैं कि आने वाले दिनों में भारत का लोकतंत्र राजनीतिक दलों से मुक्त हो जाएगा।
वे कहते हैं कि जब मुझे लगा कि मैं लोगों को जगा नहीं पाया तो इससे जग हंसाई होगी, इसलिए मैं लोगों से अपील कर रहा हूं कि वे अपना नामांकन भरें। मैं चुनाव में उनका एक रुपए भी खर्च नहीं होने दूंगा। जो क्राइम फ्री भारत से जुड़ेगा, वह नंबर वन होगा और क्राइम फ्री भारत उसे समर्थन देगा। बाकी लोग नामांकन वापस ले लेंगे। तब जो चुनाव मैदान में रहेगा, उसे हम बिना किसी खर्च के जिता लेंगे।

प्रचार का तरीका नेताओं जैसा नहीं
मैथिलीशरण गुप्त के चुनाव प्रचार का तरीका बेहद अलग है। वे बाकी नेताओं की तरह कुर्ता-पजामा नहीं पहनते, बल्कि धोती-कुर्ता और स्पोर्ट्स शूज पहनते हैं। वे कहते हैं कि मैं लोगों के पास नहीं जा रहा हूं, बल्कि मैंने लोगों से अपील की है कि वे मुझे चाय पर बुलाएं फिर मैं उन्हें बताऊंगा कि मैं उनकी जिंदगी कैसे बदल सकता हूं।
इनमें किसान, गरीब और व्यापारी सभी वर्ग शामिल है। मेरे कॉन्सेप्ट से सरकार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं आएगा। वे कहते हैं कि मेरे पास वह मॉडल भी है जो सरकार के राजस्व को कई गुना बढ़ा सकता है।

दो साल पहले विवादित पोस्ट से चर्चा में आए थे गुप्त
मैथिलीशरण जनवरी 2022 में मुस्लिम समाज पर विवादित पोस्ट को लेकर वह चर्चा में आए थे। दरअसल, मप्र आईपीएस एसोसिएशन के आधिकारिक वॉट्सऐप ग्रुप IPS MP में उन्होंने संदेश पोस्ट कर देश की बर्बादी के लिए मुस्लिमों को जिम्मेदार ठहराया था।
उनके इस संदेश पर आपत्ति जताते हुए तत्कालीन डीजीपी विवेक जौहरी ने गुप्त को ग्रुप से बाहर कर दिया था, लेकिन वे अब भी अपनी इस बात पर कायम हैं। मैथिलीशरण बेबाक राय के लिए चर्चा में रहते हैं। कोरोना काल में उन्होंने नींबू की 2 बूंद नाक में डालने की सलाह भी दी थी।
