वे सिर्फ 5 सांसदों के नेता, हर हफ्ते पवार-सोनिया के घर जाते हैं

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तारीख- 3 जुलाई 2005, शनिवार का दिन था। पार्टी से धोखेबाजी के आरोप में बालासाहेब ठाकरे ने नारायण राणे को शिवसेना से बाहर कर दिया। एक वक्त था, जब बालासाहेब ने महाराष्ट्र के कद्दावर नेता मनोहर जोशी की जगह नारायण राणे को मुख्यमंत्री बनाया था। 6 साल बाद राणे पार्टी से ही निकाल दिए गए।

शिवसेना से बाहर हुए करीब 19 साल बीत गए, लेकिन नारायण राणे के मन में इसकी टीस अब भी है। राणे अब BJP में हैं और केंद्र में मंत्री हैं। BJP उन्हें सिंधुदुर्ग-रत्नागिरी सीट से चुनाव लड़ा रही है। ये पहला मौका है, जब इस सीट से BJP ने कैंडिडेट उतारा है।

शिवसेना में नारायण राणे को पसंद नहीं करने वालों में उद्धव ठाकरे सबसे पहले थे। वे नहीं चाहते थे कि राणे CM बनें। ये तल्खी अब भी है। राणे के खिलाफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना से विनायक राउत मैदान में हैं। वे लगातार दो बार से सांसद हैं। नारायण राणे ने बाला साहेब से अपनी करीबी और उद्धव ठाकरे से अदावत जैसे मुद्दों पर दैनिक भास्कर से बात की। देखिए और पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

सवाल: आपका टिकट सबसे आखिर में क्यों डिक्लेयर हुआ?
जवाब: 
मेरे टिकट को लेकर कोई शंका नहीं थी। पार्टी के लीडर्स ने सोचा कि पहले सब जगहों का फाइनल हो जाने दें। जहां-जहां उन्हें प्रॉब्लम थी, वो खत्म करने के बाद आखिर में मेरा नाम डिक्लेयर किया। पार्टी ने मुझे पहले ही टिकट के बारे में बता दिया था। 2 महीने पहले नड्डा जी ने मुझे चुनाव लड़ने का बताया था। मैंने पिछले 15 दिन से काम शुरू भी कर दिया था।

सवाल: आपने कहा कि नरेंद्र मोदी या अमित शाह को लेकर कोई आपत्तिजनक बोलता है तो वो रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से जा नहीं पाएगा?
जवाब: 
आपने नाम नहीं लिया, लेकिन मैं नाम लेकर बोलता हूं। ये बयान शिवसेना के लोगों और उद्धव ठाकरे के लिए था। वे दिल्ली के रामलीला मैदान में गए और मोदी जी के अब की बार 400 पार के नारे पर कहा कि अब की बार मोदी तड़ीपार। इनकी क्या औकात है। मोदी जी 10 साल से देश के प्रधानमंत्री हैं। अमेरिका के प्रेसिडेंट भी हमारे PM का सम्मान और तारीफ करते हैं।

वे (उद्धव ठाकरे) सिर्फ 5 सांसदों के नेता हैं। इस चुनाव के बाद वो भी जीरो हो जाएगा। इनकी मोदी, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ बोलने की औकात क्या है।

सवाल: शिवसेना के दो हिस्से हो गए, NCP दो हिस्सों में बंट गई, परिवार टूट गया, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस साथ मिल गए। महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स कैसी हो गई है?
जवाब:
 एक आदमी से क्या होता है। उद्धव ठाकरे का कोई अस्तित्व नहीं है। बालासाहेब ठाकरे जी के बाद शिवसेना बची ही नहीं है। हिंदुत्व के नाम पर इन्होंने मुख्यमंत्री पद पा लिया। इन्होंने हिंदुत्व से गद्दारी की है। वे हफ्ते में एक बार सोनिया गांधी के पास, शरद पवार के पास जाते हैं। बालासाहेब कभी किसी के घर या ऑफिस नहीं गए। किसी पद पर रहे बिना वे किंग की तरह जीवन जीते थे।

सवाल: बाला साहेब जब थे, तो क्या वो उद्धव ठाकरे की पॉलिटिक्स को लेकर कुछ बोलते थे?
जवाब:
 वे बहुत कुछ बोलते थे। बालासाहेब और मेरे संबंध बहुत पर्सनल थे। मैं आज तक उनकी पर्सनल बातों को बाहर नहीं लाया। मैंने उनकी फैमिली के बारे में कभी कुछ नहीं बोला। मैं आज जो कुछ भी हूं, बालासाहेब जी की वजह से हूं। मैं जिंदगी में जो कुछ भी बन पाया, वो सब उनका मार्गदर्शन है।

मैं 39 साल तक बालासाहेब और मातोश्री के करीब था। साहेब हर दिन किसी न किसी बहाने से मुझे बुलाते थे। उसके (उद्धव) बारे में मुझसे बहुत सी बातें करते थे। उन्होंने उद्धव के होते हुए मुझे मुख्यमंत्री बनाया। उसकी औकात होती तो वो मुझे मुख्यमंत्री बनाते क्या।

साहेब जानते थे कि ये किसी काम के नहीं, इन्हें सिर्फ गाली देनी आती है। साहेब के जाने के बाद इन्होंने फ्री ऑफ चार्ज गाली देने का धंधा चालू किया है।

सवाल: महाराष्ट्र में राणा (नवनीत) और राणे (नारायण) उद्धव ठाकरे को परेशान नहीं कर रहे हैं?
जवाब:
 हम परेशान नहीं कर रहे हैं। उद्धव राजनीति में हमारे नेताओं पर गलत भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिवसेना ने BJP के साथ इतने साल के अलायंस का फायदा उठाया।

सवाल: आपने कहा कि उद्धव ठाकरे ने आपके नाम की सुपारी दी थी। ये बात कहां से आई?
जवाब: 
ये फैक्ट है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इन्होंने जिसे सुपारी दी थी, उस शख्स ने मुझे फोन पर सब बताया। उसने कहा, आपका काम दिया गया है, अभी क्या करना है। आप मेरे भाई हैं।

अभी चुनाव का वक्त है इसलिए मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूं।

सवाल: आपने पुलिस को नहीं बताया, कभी कोई कम्प्लेंट नहीं की?
जवाब: 
मैं कभी कम्प्लेंट नहीं करता हूं। सामने वाले को भी पता है कि अगर वो मुझ पर अटैक करेगा तो उसका क्या हश्र होगा।

सवाल: आपने दिशा सालियान केस में कई बार आदित्य ठाकरे का नाम लिया है। आपके पास सबूत थे तो कभी केस क्यों नहीं दर्ज करवाया?
जवाब: 
मैं बिना एविडेंस कोई मामला नहीं उठाता हूं। मैंने संबंधित लोगों तक ये विषय और सबूत पहुंचाए हैं। दिशा पर अत्याचार कर उसे ऊपर से फेंका गया था। यह फैक्ट है। उस वक्त कौन मंत्री था, उसकी जांच आप और पुलिस करिए।

दूसरी बात, सुशांत को मारा ही गया है। उसने आत्महत्या नहीं की थी। ये सब लोग सुशांत के घर गए और उसके साथ झगड़ा किया। उस वक्त मंत्री (आदित्य ठाकरे) भी वहां था।

सुशांत के घर में मौजूद नौकर ने एविडेंस दिए थे कि इन लोगों ने उसे मारा है। बाद में एविडेंस चेंज किए गए। आज भी मेरा वही मत है जो पहले था। ये विषय मैं नहीं भूलूंगा। उस दौरान मुझे उद्धव ठाकरे ने फोन भी किया और बोला था कि इस विषय में आप आदित्य का नाम मत लो।

फोटो रत्नागिरी में BJP कैंडिडेट नारायण राणे के नॉमिनेशन के वक्त की है। 19 अप्रैल को नॉमिनेशन से पहले राणे ने गोवा के CM प्रमोद सावंत के साथ रोड शो किया था।
फोटो रत्नागिरी में BJP कैंडिडेट नारायण राणे के नॉमिनेशन के वक्त की है। 19 अप्रैल को नॉमिनेशन से पहले राणे ने गोवा के CM प्रमोद सावंत के साथ रोड शो किया था।

सवाल: अगर उद्धव ठाकरे साथ आना चाहें, तो क्या आप उन्हें साथ लेंगे?
जवाब: 
हमारी पार्टी ने तय किया है कि उद्धव ठाकरे के विचार से जुड़े लोगों को हम नहीं लेंगे। उद्धव के खिलाफ अगर किसी का ओपिनियन होगा, तो उसे पार्टी में एंट्री मिलेगी। उद्धव ठाकरे की नो एंट्री।

सवाल: मराठा आरक्षण मिलना चाहिए या नहीं?
जवाब: 
बिल्कुल मिलना चाहिए। मैं तो कमेटी का अध्यक्ष था, मैंने अपने कार्यकाल में 16% आरक्षण भी दिया था।

सवाल: जरांगे पाटिल की मांग आपको कितनी वाजिब लगती है?
जवाब: 
अभी चुनाव के टाइम इस सब्जेक्ट पर बात नहीं करना चाहता हूं।

सवाल: आपके हिसाब से महाराष्ट्र में NDA कितनी सीटें जीत रहा है?
जवाब: 
हम 40 सीट जीतेंगे।

सवाल: रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग को लेकर आपका क्या विजन है?
जवाब: 
रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग दो डिस्ट्रिक्ट हैं। रत्नागिरी के मुकाबले सिंधुदुर्ग का काफी विकास हो गया है। रत्नागिरी में युवाओं को जॉब न मिलना बड़ी समस्या है। यहां का यूथ एजुकेशन के बाद मुंबई, पुणे या देश के बाहर जाता है।

हम सबसे पहले यहां इंडस्ट्री लाएंगे। इंडस्ट्री से जॉब आएगी। वहीं, युवाओं को हम उद्योग क्षेत्र में एंट्री करने में मदद करेंगे। हम MSME के जरिए यहां उद्योग लाएंगे और लोगों को ट्रेनिंग देंगे।

सवाल: 2021-22 में 6 हजार MSME कंपनियां बंद हुईं। 2022-23 में 10 हजार कंपनियां बंद हुईं। यह कुछ अलग तरीके से विकास नहीं हो रहा है?
जवाब: 
आप खाली कोरोना कार्यकाल की बात कर रहे हैं। इंडस्ट्रीज सरकार की वजह से बंद नहीं हुईं। कोरोना जैसी बीमारी आई, तो कामगार बीमार होने की वजह से काम पर नहीं गए। इसलिए फैक्ट्रीज बंद हो गईं। लोगों का होटल में जाना बंद हुआ, तो कई होटल बंद हुए। हालांकि, आपने जितने बंद कारखानों की संख्या बताई, वे फिर से शुरू हो चुके हैं।

PM मोदी ने बंद पड़ी सारी फैक्ट्रीज फिर से शुरू कर दी हैं। उन्होंने लोगों को फिर से रोजगार और रोजी-रोटी दी है। PM ने लोगों के पुनर्वास के लिए डिपार्टमेंट को 5.5 लाख करोड़ रुपए दिए हैं।

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