फर्जी कंपनियों के माध्यम से विश्व में भारत को शर्मसार करने वाले गौतम अदाणी पर आखिर मोदी सरकार की मेहरबानी की क्या है वजह?

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क्या मोदी सरकार के दवाब में आकार गुजरात सरकार ने अदाणी को भारत-पाक सीमा पर निर्माण की अनुमति दी?

फर्जी कंपनियों के माध्यम से विश्व में भारत को शर्मसार करने वाले गौतम अदाणी पर आखिर मोदी सरकार की मेहरबानी की क्या है वजह?

टाटा, बिरला, अंबानी से अधिक गौतम अदाणी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नजदीकियों की क्या हो सकती है वजह?

विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के 11 वर्ष पूरे गये हैं। वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में जब शपथ ली थी और देश के विकास और अर्थव्यवस्था को मजबूत देने का जो वादा उन्होंने किया था, उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि देश कभी गौतम अदाणी नाम के किसी व्यक्ति के नीचे दबकर रह जायेगा। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 11 वर्षों के कार्यकाल में गौतम अदाणी की कंपनियों को जिस तरह से फर्श से अर्श तक पहुंचाया है उसके पीछे कई सवाल खड़े होते हैं। सवाल खड़े होना स्वभाविक है क्योंकि यह मोदी सरकार का ही कमाल है कि उन्होंने पूरे देश में प्रमुख कार्यों को गौतम अदाणी की कंपनियों को समर्पित कर दिया। फिर बात चाहे कोयला की हो, बिजली उत्पादन की हो, सौर ऊर्जा उत्पादन की हो या फिर ग्रीन एनर्जी की। वर्ष 2014 के पहले तक महज कुछ हजार करोड़ रुपये की अदाणी की कंपनी आज विश्व की टॉप 20 कंपनियों में शामिल है। यही नहीं एशिया के दूसरे नंबर के सबसे अमीर व्यक्तियों में उनका स्थान आता है। गौतम अदाणी की यह उन्नति स्पष्ट संकेत देती है कि उन्हें गुजरात से निकालकर पूरे विश्व में स्थान दिलाने में मोदी और भाजपा सरकार का बड़ा योगदान है।

देश की सीमा किनारे तक निर्माण की परमीशन दी मोदी सरकार ने
राष्ट्रीय सुरक्षा और सरहदों की रक्षा के मद्देनज़र भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से 10 किलोमीटर तक मौजूदा गांवों और सड़कों को छोड़कर किसी भी बड़े निर्माण की अनुमति नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के मित्र अडानी ने कच्छ के रण में भारत-पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 01 किलोमीटर दूर एक बहुत बड़े सोलर और विंड पॉवर प्लांट का निर्माण कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार गुजरात के कच्छ क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एसईसीआई को गुजरात सरकार ने एक नवीकरणीय ऊर्जा पार्क के लिए 23,000 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी, लेकिन एक बाधा थी। एसईसीआई को आवंटित ज़मीन भारत-पाकिस्तान सीमा के काफी करीब थी और वहाँ रक्षा प्रतिबंधों का मतलब था कि वह जमीन पर केवल विंड टरबाइन ही बन सकता था, सोलर पैनल नहीं लग सकता था। गुजरात सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के दबाव में सोलर और विंड प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 21 अप्रैल 2023 को दिल्ली में एक गोपनीय सरकारी बैठक बुलाई और इसमें सैन्य संचालन महानिदेशक, गुजरात और न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा SECI ने भी भाग लिया। रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टैंक मूवमेंट और सुरक्षा निगरानी में सोलर पैनलों से दिक्कतें आने की “आशंकाएं” जताई गईं थीं पर डेवलपर्स ने आश्वासन दिया कि “दुश्मन की टैंक गतिविधियों को देखने में सोलर पैनल बाधा नहीं बनेंगे। लेकिन सोलर पैनल के साइज में बदलाव की सैन्य अधिकारियों के अनुरोध को डेवलपर्स ने खारिज कर दिया था। अंत में रक्षा मंत्रालय ने सोलर पैनलों को 02 किमी और विंड टरबाइनों को पाकिस्तान से 01 किमी के करीब बनाने की अनुमति दे दी।

अदाणी के कारण भारत की छवि हुई धूमिल
भारत के लोग यह कभी नहीं भूल सकते हैं कि गौतम अदाणी वह व्यक्ति है जिसने अपनी कंपनी के फायदे और अपने वित्तीय लाभ के लिये फर्जी कंपनियां बनाकर खुद के कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाई। जब इसका खुलासा अमेरिका की रिसर्च एजेंसी हिंडनबर्ग ने किया तो पूरे विश्व में हाहाकार मच गया। हर तरफ भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दोस्ती के खुलासे होना शुरू हो गये।

कई बार करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाया अदाणी को
जानकारी के अनुसार पिछले दिनों मोदी सरकार द्वारा एक ऐसा फैसला लिया गया, जिसका मकसद गुपचुप तरीके से सेज़ से संबंधित नियमों को बदलना था। नियमों में हुए इस बदलाव से अडानी समूह की एक कंपनी को 500 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचेगा। हालांकि, अदाणी समूह ने उम्मीद के अनुरूप और सही फरमाया कि कंपनी ने कुछ भी ग़लत या ग़ैर क़ानूनी नहीं किया है, मगर वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ ही उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने लगभग एक महीने पहले इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली द्वारा भेजी गई एक विस्तृत प्रश्नावली का अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। इस प्रश्नावली में उनसे सरकार के इस कदम के पीछे के तर्क को समझाने को कहा गया था जो प्रकट तौर पर एक खास कंपनी को मदद पहुंचाता हुआ दिख रहा है। गुजरात में एपीएसईजेड के वरिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने गोपनीयता की शर्त पर ईपीडब्‍ल्‍यू से बात की, के मुताबिक ‘अडानी पॉवर ने एपीएसईजेड के डेवलपमेंट कमिश्नर के सामने 506 करोड़ के रिफंड का दावा करते हुए एक आवेदन दाखिल किया। वाणिज्य विभाग ने सेज़ नियमों के नियम 47 को संशोधित किया, जिसका मकसद इस रिफंड को मुमकिन बनाना था।

टाटा, बिरला और अंबानी रह गये पीछे
देखा जाये तो जिस समय गुजरात में भूकंप आया और उसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हुए नरेन्द्र मोदी ने व्यापारियों से मदद की गुहार लगाई थी। उस समय केवल रतन टाटा और धीरूभाई अंबानी ही मोदी के पास मदद के लिये पहुंचे। कुछ समय बाद बिरला कंपनी ने भी हाथ बढ़ाया और देखते ही देखते गुजरात की सूरत ही बदल दी गई। तीनों ही व्यापारियों ने अपने खजाने गुजरात को विकसित बनाने के लिए खोल दिये। जिसका परिणाम यह हुआ गुजरात के बाद तीनों ही बिजनेसमेन परिवारों ने देश की आर्थिक अवस्था को बदलने में बड़ा योगदान दिया। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद सिर्फ एक ही बिजनेसमेन परिवार बढ़ा और वह है गौतम अदाणी। न अंबानी बढ़ पाये, न टाटा और न ही बिरला। सिर्फ हर तरफ एक ही गूंज है गौतम अदाणी की।
क्रमश:

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