हुरमुचो उस वस्त्र कसीदाकारी कला का नाम

हुरमुचो उस वस्त्र कसीदाकारी कला का नाम है जो राष्ट्र विभाजन के कारण लुप्त हो रही थी, लेकिन इसे बचाया है ग्वालियर निवासी सुश्री सरला सोनेजा ने जो गत 50 वर्ष से 10,000 से अधिक बालिकाओं और महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
समय के साथ अन्य शिल्प सामने आए तो इस पुराने हुनर के जानकार भी कम होते गए। किसी समय यह हुनर समाज के निर्धन वर्ग की महिलाओं विशेष कर विधवाओं की जीविका का सहारा भी था। समाज संपन्न होता है लेकिन विरासत को नहीं भूलना चाहिए।
वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन ने भी सरला जी के प्रयासों की सराहना की है।
बीते तीन चार दशक में सरला जी ने ममत्व मेला लोकरंग और राज्य हस्तशिल्प विकास निगम के अनेक कार्यक्रमों में हिस्सेदारी की है।
खादी बोर्ड में प्रबंध संचालक रहते हुए श्रीमती रेनू तिवारी और हस्तशिल्प विकास निगम की एमडी रही श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव जी ने सरला जी को मंच प्रदान किया। महिला पॉलिटेक्निक भोपाल की फैशन टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम की छात्राओं ने भी सरला जी से भोपाल हाट में दो वर्ष पहले प्रशिक्षण हासिल किया है।
सिंध से जुड़ी इस अनोखी कला के संरक्षण के लिए भोपाल की सिंधी सेंट्रल पंचायत ने संस्था संरक्षक श्री भगवान देव इसरानी के मार्गदर्शन में एक 10 दिन की कार्यशाला भोपाल में प्रारंभ करवाई है।
भोपाल की ईदगाह पहाड़ी के सामुदायिक भवन में बड़ी संख्या में यह वस्त्र शिल्प कला सीखने महिलाओं का पहुंचना जारी है। इस कला और कलाकार पर संवाद का मुझे भी एक अवसर मिला।
Ref इस लिंक को ओपन कर आप सरला जी से गंगा और अशोक द्वारा लिए गए एक साक्षात्कार को भी देख सकते हैं।
आभार: श्री भगवान देव इसरानी,संस्था अध्यक्ष किशोर जी,संयोजक
श्री प्रदीप आर्तवाणी और
श्री प्रेम कुमार सावलानी फिल्म निर्देशक
Ganga Ashok Manwani
