पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा

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पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा: “सुप्रीम कोर्ट विधायिका के निर्णय को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए समय सीमा कैसे तय कर सकते हैं?”
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उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पूछा कि जब संविधान में ऐसी कोई शर्त नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट ऐसा फैसला कैसे दे सकता है।
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राष्ट्रपति मुर्मू के सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल

जब राज्यपाल के सामने कोई बिल आता है, तो उनके पास कौन-कौन से संवैधानिक विकल्प होते हैं।
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क्या राज्यपाल फैसला लेते समय मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे हैं।
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क्या राज्यपाल के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
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क्या आर्टिकल 361 राज्यपाल के फैसलों पर न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह रोक सकता है।
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अगर संविधान में राज्यपाल के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है, तो क्या अदालत कोई समय सीमा तय कर सकती है।
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क्या राष्ट्रपति के फैसले को भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
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क्या राष्ट्रपति के फैसलों पर भी अदालत समय सीमा तय कर सकती है।
क्या राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से राय लेना अनिवार्य है।
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क्या राष्ट्रपति और राज्यपाल के फैसलों पर कानून लागू होने से पहले ही अदालत सुनवाई कर सकती है।
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क्या सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करके राष्ट्रपति या राज्यपाल के फैसलों को बदल सकता है।
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क्या राज्य विधानसभा द्वारा पारित कानून, राज्यपाल की स्वीकृति के बिना लागू होता है।
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क्या संविधान की व्याख्या से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच को भेजना अनिवार्य है।
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क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसे निर्देश/आदेश दे सकता है जो संविधान या वर्तमान कानूनों मेल न खाता हो।
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क्या केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही सुलझा सकता है।
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पहली बार किसी महामहिम राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय को फटकार लगाई है अब सर्वोच्च न्यायालय देशहित में लिए गए राज्यपाल और राष्ट्रपति के निर्णय में अपनी टांग नाही अड़ाए तो ठीक रहेगा ।
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वन्देमातरम्
जय श्री राम

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