यह जनकल्याण पर्व था या मीडिया कल्याण पर्व…?

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सरकारी विज्ञापनों के मार्फ़त मीडिया को साधने में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज की खासी शोहरत रही है.विधानसभा में जानकारी दी गई है की उन्होंने सात महीनों में सिर्फ लाड़ली बहना के प्रचार पर जनता का 120 करोड़ फूंक डाला था.मोहन यादव विज्ञापनबाजी में उनको पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं.वो मौके बेमौके मीडिया को ज्यादातर एक पेज और कभी कभार ही आधे पेज विज्ञापनो से नवाजने में देर नहीं करते.मुख्यमंत्री बनने के 60 दिन,100 दिन और 180 दिन के बाद 365 दिन की ख़ुशी में उन्होंने 11 से 15 दिसंबर तक जनकल्याण पर्व मनाया.एक साल के सेलेब्रेशन/पर्व से जनता से कोई लेना देना नहीं रहा,पर रोज ही विज्ञापनों की अनवरत बारिश से मीडिया की पौ बारह रही,वही पर्व का लाभार्थी रहा.विज्ञापनबाजी पर लुटाए जनधन के अनुमान से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
इस फिजूलखर्ची के बीच कल राज्य सरकार की कर्ज पर कर्ज लेने की मानसिकता पर हैरान करने वाली खबर छपी हैं.पर्व का कोई दिन ऐसा नहीं गया जब अखबारों को विशाल विज्ञापन ना मिला हो,जिससे इंडिया टुडे (दो पेज) के साथ अन्य राष्ट्रीय मीडिया भी लाभान्वित हुआ.इन विज्ञापनों के केंद्र में रहे-रामलीला उत्सव,विक्रमोत्सव,दुर्गावती जयंती,शिवाजी जयंती,विवेकानंद जयंती,नर्मदा जयंती,मकर संक्रांति उत्सव,दशहरा शस्त्रपूजन उत्सव,केबिनेट की अयोध्या यात्रा,तानसेन समारोह,कालिदास समारोह,जलकलश यात्रा,चित्रकूटआध्यात्म,गोरक्षा संवाद,सागर गौरव दिवस,मोदी गारंटी,पीएम पोर्टल शुभारंभ,संस्कारधानी में केबिनेट,भभूतसिंह की स्मृति में केबिनेट और श्रीकृष्ण पर्व आदि आदि.
मोहन यादव को एक साल हो गया पर शुरुआत के छह महीने स्वागत/अभिनंदन/लोकसभा चुनाव की भेंट चढ़ गए थे.बाकी के छह महीनों का दिखावटी नगाड़ा ही पर्व में पीटा गया.पर्व का शुभारंभ वृहद गीता पाठ से हुआ.पूछा जा सकता है जनकल्याण से इसका क्या लेना देना.? खरगोन में एक संत के निधन पर शोक जताने पहुँचे मुख्यमंत्री ने उनके आश्रम को धार्मिक पर्यटनस्थल बनाने की घोषणा कर दी.जब उनके जैसे सक्षम अनुयायी हैं तो इस पर जनधन के खर्च का क्या मतलब..? उधर गृह जिले उज्जैन के प्रति जरूरत से ज्यादा लगाव पर उनसे वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा ही सवाल खड़े गए हैं.!
पर्व के दौरान जयंती/जलसा/उद्घाटन/शिलान्यास/भूमिपूजन/इंडस्ट्री कानक्लेव की धूम थी पर जनता के बुरे हाल पर गौर नहीं किया गया.जिन अख़बारों में मध्यप्रदेश शाइनिंग के छप रहे थे उनमे ही पेयजल के लिए प्राणों की बाजी लगातीं महिलाएँ और बच्चे,अस्पतालों और स्कूलों की दुर्दशा और सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की दहलाने वाली खबरें छपती रहती हैं.पर्व के दौरान आयोजित इंडस्ट्री कानक्लेव पर विरोधाभासी खबर छपी है.(दैनिक भास्कर/टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबरें) श्री प्रकाश दीक्षित द्वारा
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