भोपाल वन मेले में “जादुई अंगूठियां”: नौकरी, संतान और सुख-शांति का दावा, पुलिस भी बनी ग्राहक!

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20 दिसंबर 2024। भोपाल के लाल परेड मैदान में चल रहे वन मेले में इन दिनों चर्चा का विषय बने हैं “जादुई अंगूठियों” के स्टॉल। ये अंगूठियां न सिर्फ नौकरी दिलाने, पारिवारिक कलह सुलझाने और संतान प्राप्ति का दावा कर रही हैं, बल्कि यहां तक कहा जा रहा है कि ये हर समस्या का ‘रामबाण’ इलाज हैं।

अंगूठियों का खेल: कीमत से ताकत का वादा!
हरिद्वार से लाई गई इन अंगूठियों की कीमत 250 रुपये से शुरू होकर 1100 रुपये तक है। विक्रेताओं का दावा है कि 1100 रुपये वाली अंगूठियां सबसे ज्यादा असरदार हैं। एक विक्रेता ने मुस्कुराते हुए कहा, “बस इसे पहन लीजिए, आपकी जिंदगी बदल जाएगी।”

पुलिस भी बनी ग्राहक!
चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पुलिसकर्मी भी इन अंगूठियों के खरीदार बने। मेले में घूमते हुए पुलिसकर्मियों को इन अंगूठियों की “चमत्कारी ताकत” पर चर्चा करते और मुस्कुराते हुए खरीदारी करते देखा गया।

वन मेला या अंधविश्वास का अड्डा?
वन मेला, जो आदिवासी समुदायों और वन उत्पादों की समृद्ध परंपरा को बढ़ावा देने के लिए आयोजित होता है, अब अंधविश्वास के प्रचार का केंद्र बन गया है। करीब एक दर्जन स्टॉल ऐसे हैं जिनका जंगल या आदिवासी परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है। आयोजकों ने इन स्टॉलों पर कड़ी नाराजगी जताई है।

प्रबंधन ने दिए जांच के आदेश
मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक विभाष ठाकुर ने कहा, “वन मेले का उद्देश्य वनों और आदिवासी संस्कृति का प्रचार करना है। ऐसे अंधविश्वासी उत्पादों का यहां कोई स्थान नहीं है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी स्टॉलों की जांच की जाएगी और अंधविश्वास फैलाने वाले स्टॉलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आलोचना और सवाल
मेले में इन अंगूठियों के स्टॉल ने जहां कुछ लोगों को आकर्षित किया है, वहीं कई लोग इसे खुलेआम अंधविश्वास का प्रचार मान रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या वन मेले जैसे सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य अब सिर्फ कमाई करना रह गया है?

जादुई अंगूठियों के दावों पर बहस जारी है, लेकिन यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम विज्ञान और तर्क के युग में भी अंधविश्वास से पीछा छुड़ा पाए हैं?

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