हरियाणा में खिलाड़ी न बिगाड़ दें BJP का खेल
‘ये हाथ का निशान थप्पड़ का काम करेगा। 5 तारीख को ये थप्पड़ दिल्ली में जाकर लगेगा। पिछले 10 साल में हमारा जो अपमान हुआ है, उसका बदला लेना है।’ हरियाणा की जुलाना सीट से कांग्रेस कैंडिडेट विनेश फोगाट प्रचार के दौरान जीत को लेकर कॉन्फिडेंट दिख रही हैं।
पेरिस ओलिंपिक के फाइनल में डिसक्वालिफाई होने के बाद रेसलर विनेश ने 6 सितंबर को कांग्रेस जॉइन की। अब वो सियासी दंगल में किस्मत आजमा रही हैं। BJP ने उनके सामने कैप्टन योगेश बैरागी को उतारा है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने WWE रेसलर कविता दलाल को कैंडिडेट बनाया है। INLD की तरफ से सुरेंद्र लाठर चुनाव लड़ रहे हैं।
हरियाणा में खेल और खिलाड़ी बड़ा सियासी मुद्दा हैै। BJP सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोपों पर पहलवानों के प्रदर्शन से लेकर पेरिस ओलिंपिक तक हरियाणा के खिलाड़ी चर्चा में रहे। विनेश फोगाट प्रदर्शन का मुख्य चेहरा रहीं।
पहले कांग्रेस ने पहलवानों के प्रदर्शन को समर्थन दिया। फिर विनेश को टिकट देकर और बजरंग पूनिया को किसान कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पहलवानों के मुद्दे को भुनाने की कोशिश की। इससे पहले कांग्रेस लीडर दीपेंद्र हुड्डा हरियाणा को खेलों के लिए मिले कम बजट का मुद्दा संसद में उठा चुके हैं।
पहलवानों के आरोप और जंतर-मंतर पर उनके साथ हुए बर्ताव से क्या इस चुनाव में BJP को नुकसान होगा, इस प्रदर्शन का हरियाणा के युवा खिलाड़ियों पर क्या असर पड़ा, हरियाणा में खेल और उनसे जुड़े लोगों के मुद्दे क्या हैं? ये समझने के लिए हमने खिलाड़ियों, उनके ट्रेनर्स और आम लोगों से बात की। पॉलिटिकल पार्टीज और एक्सपर्ट्स की राय भी जानी। पढ़िए हरियाणा चुनाव पर ये रिपोर्ट…

शुरुआत चरखी-दादरी में विनेश के गांव बलाली से… हरियाणा के चरखी-दादरी के बलाली गांव का नाम खेल में दिलचस्पी रखने वालों के लिए नया नहीं है। आमिर खान की फिल्म दंगल में दिखाई गईं गीता और बबीता फोगाट इसी गांव की रहने वाली हैं। विनेश फोगाट इनकी चचेरी बहन है। इनके अलावा संगीता फोगाट और नेहा सांगवान जैसी पहलवान भी इसी गांव से निकली हैं।
यहां हमारी मुलाकात प्रैक्टिस कर रही पहलवान नविता से हुई। उन्हें लगता है कि अगर विनेश विधायक-मंत्री बनीं तो खिलाड़ियों को सपोर्ट मिलेगा और उनके लिए सुविधाएं बढ़ेंगी। नेशनल में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकीं नविता ओलिंपिक में विनेश के डिस्क्वालिफिकेशन को राजनीति बताती हैं।
वे कहती हैं, ‘केंद्र सरकार ने उनके लिए जरा भी कोशिश नहीं की। केस भी विनेश ने ही डाला था।’ नविता को बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों में सच्चाई दिखती है।
नेशनल खेल चुके युवा कोच अंकेश बलाली में बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं। वे भी मानते हैं कि विनेश और दूसरे पहलवानों के साथ गलत हुआ है। विनेश के राजनीति में आने के फैसले पर अंकुश कहते हैं, ‘कुछ सोच समझकर ही आई होगी। जब वो धरने पर बैठी, तो कांग्रेस ने ही साथ दिया।‘

अंकेश कहते हैं, ‘अगर वो जीती, तो खेल मंत्री बनेगी। उससे बहुत उम्मीदें हैं। वो खेल नीति को और बेहतर करेगी। BJP ने खिलाड़ियों और किसानों के मुद्दे पर बहुत गलत किया। हमारी बहनें घसीटी गईं, किसानों के साथ भी ऐसा ही किया गया।‘
सरकार ने रेसलिंग कॉम्प्लेक्स बनाया, सुविधाओं के लिए चंदा जुटाया रेसलिंग को प्रमोट करने के लिए हरियाणा के CM रहे मनोहर लाल खट्टर ने 2016 में बलाली गांव में रेसलिंग कॉम्प्लेक्स बनवाने की घोषणा की थी। बिल्डिंग लगभग 4 साल से बनकर तैयार है, लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। रेसलिंग मैट और कूलर भी गांव वालों के चंदे से लगा है। यहां आसपास के 25-30 बच्चे प्रैक्टिस करते हैं।
गांव में रहने वाले बिट्टू बताते हैं, ‘अखाड़े में न बिजली है और न ही पीने का पानी। बच्चे घर से पानी लेकर आते हैं, इसलिए जो ये काम कराएगा, वो उसी को वोट देंगे।‘
यहां लोग एक किलोमीटर दूर से मटके में पानी भरकर लाते हैं। किसान दीनदयाल शिकायत करते हुए कहते हैं, ‘3 साल से AC ऐसे ही रखे पड़े हैं। हॉल गर्मी से तपता रहता है।‘

यहां ड्यूटी देने वाले चौकीदार ऋषिपाल और सरपंच प्रतिनिधि बिंदराज सांगवान भी मानते हैं कि खेल और खिलाड़ी का मुद्दा काफी प्रभावित करेगा। वोटिंग भी इसी आधार पर होगी।
अब बात विनेश की ससुराल जुलाना की… ससुराल में बहू विनेश का न विरोध, न सपोर्ट, बोले- वो गांव में रहती ही नहीं जींद जिले में पड़ने वाली जुलाना सीट से विनेश फोगाट चुनाव लड़ रही हैं। यहीं के बख्ता खेड़ा गांव में उनकी ससुराल है। उनकी फैमिली सोनीपत के खरखोदा में रहती है। चुनाव में टिकट मिलने के बाद विनेश और उनकी फैमिली काफी एक्टिव हो गई है। बख्ता खेड़ा गांव में एंट्री करते ही हमें गांव के कुछ लोग मिले।
इनमें से एक बुजुर्ग गुड्डल BJP को वोट देने की बात कहते हैं। वो कहते हैं, ‘BJP से कोई भी कैंडिडेट हो, मैं वोट BJP को ही देता हूं। गांव की बहू विनेश को वोट न देने के सवाल पर दोहराते हैं, ‘नहीं जी, हम तो BJP को वोट देते हैं।’
वहीं पास में खड़े बुजुर्ग लच्छा ने भी BJP के जीतने का ही दावा किया। उन्होंने PM मोदी के नाम पर वोट देने की बात कही। बहू विनेश को वोट देने के नाम पर कोई जवाब नहीं दिया। यहीं मिली फूलवीर कहती हैं, ‘विनेश को ही वोट देंगे, वो हमारी बहू है, मुद्दा कुछ नहीं है।’

गांव के युवा प्रमोद राठी के मुताबिक, जनता बदलाव चाह रही है। पहलवानों के आंदोलन की वजह से विनेश को सहानुभूति मिलने के सवाल पर प्रमोद कहते हैं, ‘जो चीज गलत हो रही है, उसके लिए तो अपने आप सहानुभूति आ जाती है। उसके साथ जो राजनीति हुई, ये चुनाव उसका बदला होगा।‘
गांव में चर्चा है कि विनेश के ससुराल की तरफ से मंदिर के लिए चंदा नहीं दिया गया। हालांकि, लोकसभा चुनाव में BJP को वोट देने वाले लाभ सिंह कहते हैं, ‘चंदा न देने की बात अफवाह है। मैं उस कमेटी का मेंबर हूं, उन्होंने पूरा चंदा दे रखा है। जब मंदिर की शुरुआत हुई थी, तो गांव में पहला चंदा लिया गया था। उन्होंने 61 हजार रुपए चंदा दिया था।‘

विनेश के ससुराल बख्ता खेड़ा में ही वोट बंटे नजर आ रहे हैं। जाट आबादी वाली जुलाना सीट पर 5 बड़ी पार्टियों मे से 4 के कैंडिडेट जाट हैं। बैरागी कम्युनिटी से आने वाले BJP कैंडिडेट जाट वोटों में बंटवारे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अगर जाट वोट बंटे तो विनेश को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जाटों के अलावा दलित वोटर्स से भी उन्हें झटका मिल सकता है।
BSP-इनेलो की रैली में जा रहे अशोक कहते हैं कि पहले हमारा समाज बिखरा हुआ था, सब अलग-अलग थे। अब सब मिलकर चल रहे हैं। पूरा दबदबा है और सब एकजुट होकर ही वोटिंग करेंगे।

गांव में मिले ऋषिलाल कहते हैं, ‘विनेश बहू तो है, लेकिन वो तो अभी आई है, वोट लेकर चली जाएगी। 2018 में इसकी शादी हुई थी। शादी में आई थी और अब आई है। इनका परिवार यहां नहीं रहता। जेठ-देवर सभी बाहर रहते हैं।‘
वहीं, गांव की निधि का कहना है, ‘विनेश धरने पर बैठीं, BJP सरकार से फाइट की। तभी चुनाव भी लड़ रही हैं। वो सिर्फ यहां की बहू नहीं, देश का भविष्य हैं। उनमें कुछ न कुछ बात है, इसीलिए हम उसके साथ हैं।‘
हर खिलाड़ी सरकार की नीति से नाखुश, चुनाव में दिखेगा नतीजा इसके बाद हम भिवानी पहुंचे। इसे मुक्केबाजों का गढ़ कहा जाता है। भिवानी से आने वाले ओलिंपिक चैंपियन विजेंदर सिंह ने 2019 में कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़ा था। 2024 लोकसभा से पहले BJP में शामिल हो गए।
2019 के विधानसभा चुनाव में BJP के टिकट पर पहलवान योगेश्वर दत्त, बबीता फोगाट और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कैप्टन संदीप सिंह चुनाव लड़ चुके हैं। योगेश्वर और बबीता चुनाव हार गए, जबकि संदीप सिंह को जीतने पर खेल मंत्री बनाया गया था। हालांकि, इस बार BJP ने इनमें से किसी को टिकट नहीं दिया।


यहां हमारी मुलाकात दर्शना से हुई। वो इंटरनेशनल लीग में सिल्वर और ऑल इंडिया पुलिस गेम में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। दर्शना कहती हैं, ‘विनेश ने रेसलिंग में जितना वक्त दिया, वो बेस्ट रही हैं। अगर वो विधायक बनती हैं और उन्हें मंत्री पद मिलता है तो ये अच्छी बात है।‘
‘जब इनेलो की सरकार थी, तब भी जॉब के बहुत ऑफर थे। कांग्रेस सरकार में भी थे, लेकिन BJP सरकार में ऐसा कुछ नहीं देखा। पहले कोच की भी नौकरियां निकालती थीं, अब वो भी कॉन्ट्रैक्ट बेस हो गई।‘
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में रेसलिंग कोच की जिम्मेदारी संभाल चुके भूपेंद्र सिंह लगातार 35 साल से कोचिंग दे रहे हैं। उनका मानना है, ‘पहलवानों के प्रोटेस्ट से कुश्ती को नुकसान हुआ है। पहलवानों और फेडरेशन के बीच तालमेल अच्छे होने चाहिए। दोनों मिलकर ही कुश्ती को आगे बढ़ा सकते हैं।‘
भूपेंद्र कहते हैं, ‘खिलाड़ियों के साथ शोषण हुआ और दुनिया ने देखा। आज तक दुनिया में किसी सरकार के खिलाफ खिलाड़ियों का इतना बड़ा आंदोलन नहीं हुआ।
क्या खेल-खिलाड़ी चुनावी मुद्दा हैं? इसके जवाब में वे कहते हैं, ‘निश्चित तौर पर ये मुद्दा रहेगा। खेल के साथ किसानों का मुद्दा भी रहेगा। जब कोई घटना होती है तो विपक्ष का काम इसे उठाना है।‘
पूर्व मुक्केबाज और द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित बॉक्सिंग कोच जगदीश सिंह BJP के वोटर रहे हैं। वो भिवानी में ही बॉक्सिंग क्लब चलाते हैं। विजेंद्र सिंह ने इसी क्लब में बॉक्सिंग सीखी है। जगदीश कहते हैं, ‘हरियाणा में हर खिलाड़ी सरकार की नीति से नाखुश है। सरकार ने कुछ नहीं किया।’
‘खिलाड़ियों को 2020-21 यानी 4 साल से नकद पुरस्कार नहीं मिला है। इन पुरस्कारों में सबसे बड़ी कटौती भी की है। अगर कोई खिलाड़ी नेशनल, एशियन या वर्ल्ड में गोल्ड ले आता है, तो उसे इन सभी मेडल्स में से किसी एक का पुरस्कार मिलेगा।‘
‘पिछली सरकार में हर मेडल के पैरामीटर के हिसाब से पुरस्कार राशि दी जाती थी। ये राशि फाइनेंशियल ईयर के आखिर में मिल जाती थी। अप्रैल-मई में फॉर्म भरवा लिए जाते थे और जून-जुलाई में पेमेंट हो जाता था। अब स्थितियां अलग हैं।‘

भिवानी में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हॉस्टल में हम कुछ युवा खिलाड़ियों से भी मिले। बॉक्सिंग प्लेयर अंकुश कहते हैं, ‘सुविधाएं तो ठीक हैं, लेकिन सरकार से सपोर्ट बहुत कम मिल रहा है। ओलिंपिक में भी कम कोटा मिल रहा है।‘ बॉक्सिंग प्लेयर देवेंद्र सिंह सोलंकी का मानना है, ‘सीनियर खिलाड़ियों के साथ जो कुछ हुआ, उसका उनके खेल पर भी असर पड़ा।‘
रेसलिंग प्लेयर हैप्पी के मुताबिक, ‘आंदोलन देखकर एक बार तो लगा कि कुश्ती छोड़ दें। रेसलिंग में कुछ नहीं रखा, सारे गलत काम हो रहे हैं। राजनीति ने सिस्टम को ज्यादा बिगाड़ रखा है।‘
अब बात पॉलिटिकल पार्टीज की… BJP: सबको न्याय मिले, हम भी यही चाहते हैं हरियाणा चुनाव में खेल और खिलाड़ी के मुद्दे को लेकर BJP के राष्ट्रीय सचिव ओपी धनखड़ का मानना है, ‘पहलवानों का पहला आंदोलन उनके न्याय के लिए था। विनेश ने भी कहा है कि उसमें BJP के लोग भी पहलवानों के साथ थे। आंदोलन में कौन लोग बैठते थे और उस आंदोलन के बाद क्या हुआ, ये सबने देखा।‘
‘दूसरे आंदोलन से टिकट तक की यात्रा भी लोगों के जेहन में है। लोग इतने भोले-भाले नहीं है। अंतिम नतीजे देखकर सब समझ गए हैं।‘

कांग्रेस: इस चुनाव में BJP सरकार का हिसाब-किताब होगा कांग्रेस प्रवक्ता अनुपम कहते हैं, ‘महिला पहलवानों के साथ जिस तरह की बदसलूकी हुई, सड़कों पर घसीटा गया, वो हरियाणा के एक-एक व्यक्ति को याद है। पहलवानों के साथ BJP का बर्ताव लोगों के बीच सेंटिमेंटल इश्यू है।‘
‘PM पहलवानों के मेडल जीतने पर उनसे ऐसे संवाद करते थे, जैसे उनकी गाइडेंस में ही मेडल मिला है। वही पीड़ित पहलवान न्याय की गुहार लगा रहे थे, तो उन्होंने बात तक नहीं की।‘

अब बात एक्सपर्ट्स की राय की… पहलवानों की नाराजगी से BJP को होगा नुकसान इलेक्शन एनालिस्ट संजय कुमार के मुताबिक, ‘पहलवानों का मुद्दा कोई अकेला मुद्दा नहीं है। किसान, पहलवान और नौजवान सब ओवरलैपिंग कैटेगरीज हैं। इन सभी कैटेगरीज में अगर जाति के हिसाब से देखें तो जाट समुदाय के लोग बड़ी संख्या में हैं। अगर पहलवानों की बात करें तो निश्चित रूप से लोगों के बीच नाराजगी है, जिससे BJP को नुकसान होगा।’
सीनियर जर्नलिस्ट धर्मेंद्र कंवारी कहते हैं, ‘पहलवानों के आंदोलन का असर 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा। तब लोग कह रहे थे कि ये तो अभी ट्रेलर है। पहलवानों का मुद्दा हरियाणा के हर घर से जुड़ा है। ये सिर्फ मेडल से जुड़ा मसला नहीं है, बल्कि पेट से जुड़ा हुआ है। यहां हर व्यक्ति को लगता है कि अगर उनका बच्चा पढ़ नहीं पाया तो उसे खिलाड़ी बनाकर नौकरी लगवा देंगे।‘
कंवारी कहते हैं, ‘हरियाणा में पदक लाओ, नौकरी पाओ की नीति थी, जिसके तहत काफी लोगों ने नौकरियां हासिल कीं। BJP सरकार इसे बरकरार नहीं रख पाई। इसलिए हरियाणा के लोग पदक लाओ वाली नीति दोबारा लाना चाहते हैं।’


