सही नहीं चीफ सेक्रेटरी को लेकर लेटलतीफी/कयासबाजी..!

श्री अनुराग जैन को मध्यप्रदेश का चीफ सेक्रेटरी बनाने का ऐलान 30 सितम्बर को ठीक उस दिन हुआ जो बाहैसियत चीफ सेक्रेटरी मैडम वीरा राणा का अंतिम दिन था और वो रिटायर्मेंट की औपचारिकताओं में व्यस्त थीं.उनके पति भारतीय पुलिस सेवा के डीजी रैंक के अफसर संजय राणा उनके चीफ सेक्रेटरी बनने से पहले ही रिटायर हो चुके हैं.मैडम राणा के उत्तराधिकारी को लेकर इस लेटलतीफी के कारण मीडिया में जो बेमतलब कयासबाजी हुई उससे मुख्यमंत्री मोहन यादव की ही किरकिरी हुई है.कई अख़बारों ने दूसरे दावेदार राजेश राजौरा की नियुक्ति की घोषणा ही कर दी थी और एक बड़े अख़बार के मुताबिक अनुराग जैन इस पद की दौड़ से कुछ दिन पहले ही बाहर हो गए थे.इतना ही नहीं श्री जैन की घोषणा के दिन सुबह एक बैठक में अफसरान राजौरा को बधाई देते नजर आए थे.
इस लेटलतीफी ने कुछ लोगों को कहने का मौक़ा जरूर दे दिया की मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से सम्पूर्ण सूबा है पर राजनैतिक और प्रशासनिक लिहाज से केंद्रशासित राज्य हो गया है.तभी मुख्यमंत्री का हर बड़ा फैसला दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद होता है.वैसे जब अनुराग जैन को ही बनाना था तो ऐन वक्त पर घोषणा क्यों हुई.? जैन की प्रतिनियुक्ति से वापसी और नियुक्ति के आदेश पहले हो सकते थे.अनुराग जैन के नाम पर मोहन यादव की ना नजर आने वाली झिझक इस कारण हो सकती थी की वो दो बार तब के मुख्यमंत्री शिवराज के सचिव रह चुके हैं.! केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने अपने चुनावक्षेत्र गुना के कलेक्टर अमनवीर सिंह का लोकसभा चुनाव से पहले तबादला करवा दिया था जिन्हें वहां पदस्थ हुए थोड़ा समय हुआ था.दरअसल वो शिवराज के विश्वस्त इकबालसिंह बैंस के सुपुत्र हैं.(दैनिक भास्कर/पब्लिकवाणी की खबरें)sreepralash dixet
