जम्मू-कश्मीर में पहले फेज में NC-कांग्रेस भारी

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‘जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। यूथ परेशान है। यहां न सरकारी नौकरियां मिल रही हैं, ना प्राइवेट सेक्टर इतना आगे बढ़ा है कि जॉब मिल जाए। मैं पोस्ट ग्रेजुएट हूं। नौकरी नहीं मिली। इस वजह से कार एसेसरीज की छोटी सी दुकान चला रहा हूं।’

ये सिर्फ जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले इरफान अहमद सोफी की परेशानी नहीं है। यहां का हर युवा इसी मुश्किल का सामना कर रहा है। युवा मुजैर कहते हैं, ‘यहां बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। PhD करने वाले भी घर बैठे हैं। मैंने नर्सिंग की पढ़ाई की है। नौकरी नहीं मिली, इसलिए मंडी में काम करने जाता हूं।’

जम्मू-कश्मीर की लोकल पार्टियों के लिए चुनाव में बेरोजगारी नहीं, बल्कि आर्टिकल-370 को वापस कराना सबसे बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी दूसरे नंबर पर है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों की मानें तो आर्टिकल-370 बेशक कश्मीर के लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। पर इसकी वापसी का रोडमैप क्या होगा, इस पर बात नहीं हो रही है।

जम्मू-कश्मीर की 24 सीटों पर पहले फेज में 18 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। इनमें 16 सीटें कश्मीर की हैं, जबकि 8 जम्मू की। यहां हवा का रुख समझने के लिए दैनिक भास्कर ने पॉलिटिकल पार्टियों, एक्सपर्ट्स और लोकल लोगों से बात की।

इन 4 पॉइंट्स में समझिए रुझान और सियासी समीकरण…

1. पहले फेज में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस अलायंस सबसे मजबूत बनकर उभर सकता है। उसे 12-13 सीटों पर जीत मिल सकती है। दूसरे नंबर पर BJP और PDP रह सकती हैं। दोनों को 4-6 सीटें मिल सकती हैं। निर्दलीय को 1-2 सीटें मिलने की उम्मीद है। साउथ कश्मीर से NC-कांग्रेस अलांयस को सबसे ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं।

2. पहले फेज में साउथ कश्मीर की सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। यहां महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP की मजबूत पकड़ रही है, लेकिन इस चुनाव में PDP अपने ही गढ़ में कमजोर दिख रही है। महबूबा मुफ्ती की पार्टी जिस बिजबेहरा सीट पर लगातार 3 बार से जीत हासिल कर रही है, इस पर उस पर भी कांटे की टक्कर है।

3. आर्टिकल-370 हटाने और डेवलपमेंट के दावों के बावजूद कश्मीर घाटी में BJP की जीत के आसार कम हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि पहले फेज में BJP का किसी सीट पर दूसरे नंबर पर आना भी मुश्किल है। जम्मू में पहले फेज की 8 सीटों में से भदरवाह, डोडा पश्चिम, रामबन और बनिहाल में BJP को बढ़ मिल सकती है।

4. कश्मीर में पहले फेज में 16 सीटों पर चुनाव में इस बार जमात-ए-इस्लामी से जुड़े निर्दलीय कैंडिडेट मजबूत स्थिति में हैं। इंजीनियर राशिद की अवामी इत्तेहाद पार्टी के कैंडिडेट भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। एक से दो सीटों पर निर्दलीय कैंडिडेट जीत सकते हैं। कुलगाम सीट पर जमात से समर्थन वाले सयार अहमद रेशी 28 साल से हर चुनाव जीतने वाले CPI(M) उम्मीदवार यूसुफ तारिगामी को टक्कर दे रहे हैं।

एक्सपर्ट्स बोले- आर्टिकल-370 की वापसी बड़ा मुद्दा, लेकिन रोडमैप नहीं उर्दू अखबार कश्मीर उजमा के सीनियर जर्नलिस्ट बिलाल फुरकानी कहते हैं, ‘आर्टिकल-370 बेशक लोगों के इमोशन से जुड़ा मुद्दा है। इसकी वापसी का मुद्दा सभी लोकल पार्टियों ने उठाया है। ये कैसे होगा, इसके लिए कोई रोडमैप नहीं है। फिर भी सभी लोकल पार्टियों के मैनिफेस्टो में इसे मुद्दा बनाया है।‘

‘स्टेटहुड का भी मुद्दा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अगर माहौल सुधरा तो स्टेटहुड वापस कर सकते हैं। ऐसे में लोगों से जुड़े जो बुनियादी मुद्दे हैं, वो इस विधानसभा चुनाव में प्राथमिकता में दूसरे और तीसरे नंबर पर आते हैं।‘

पॉलिटिकल एक्सपर्ट अजहर हुसैन भी यही मानते हैं। वो कहते हैं, ‘हाल में नेशनल कॉन्फ्रेंस के लीडर उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि पार्टी जैसे ही विधानसभा में सरकार बनाएगी, वैसे ही आर्टिकल-370 पर एक रेजोल्यूशन लाएंगे।‘

‘हालांकि, इस बयान पर LG ने भी साफ कर दिया है कि अगर आप कोई ऐसा रेजोल्यूशन लाते भी हैं तो उसके कोई मायने नहीं हैं। इसलिए आर्टिकल-370 एक बड़ा मामला जरूर है, लेकिन वोटिंग सिर्फ इसी आधार पर होगी।‘

जम्मू में BJP मजबूत, 4-6 सीट मिल सकती है, आजाद की पार्टी सिर्फ वोट काटेगी जम्मू में पहले फेज में 8 सीटों पर वोटिंग होनी है। इन 8 सीटों पर कौन सी पार्टी मजबूत है और कौन सी कमजोर। इस पर हमने जम्मू के पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रो. हरिओम से बात की। वे कहते हैं, ‘8 सीटों में BJP को इस बार 5-6 सीटें मिल सकती हैं। परिसीमन की वजह से हिंदू वोटर एकजुट हुए हैं।’

BJP ने पुराने प्रत्याशियों की जगह चुनाव में नए उम्मीदवार उतारे हैं। इसे लेकर नाराजगी भी सामने आ चुकी है। ऐसे में BJP को कैसे बढ़त मिलेगी। इस पर प्रो. हरिओम कहते हैं, ‘इससे एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर कम हुआ है। इसका फायदा BJP को मिलेगा।‘

सीनियर जर्नलिस्ट बिलाल फुरकानी कहते हैं, ‘रामबन और बनिहाल में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के कैंडिडेट भी लड़ रहे हैं। अलायंस होने के बावजूद दोनों चुनाव लड़ रहे हैं। इससे दोनों पार्टियों के वोट कटेंगे।‘

‘ऐसे में पहले फेज में रामबन, भदरवाह, बनिहाल और डोडा में BJP की बढ़त रहेगी। पहले फेज में जम्मू रीजन से BJP को 3-4 सीटें आसानी से मिल सकती हैं। बाकी सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस के कैंडिडेट जीत सकते हैं।‘

कश्मीर में BJP को कितनी सीटें मिलेंगी? इस पर प्रो. हरिओम कहते हैं, ‘पहले फेज में BJP को कश्मीर में एक भी सीट नहीं मिलेगी। जमानत भी जब्त हो सकती है। पहले फेज में साउथ कश्मीर में वोटिंग है। वहां इंजीनियर राशिद दमदार साबित नहीं हो सकते, क्योंकि उनकी पकड़ नॉर्थ कश्मीर में है। साउथ कश्मीर में NC-कांग्रेस सबसे ज्यादा सीट पाने वाली पार्टी बनकर सामने आएंगी।‘

कश्मीर के सीनियर जर्नलिस्ट बिलाल फुरकानी कहते हैं, ‘पहले फेज की ज्यादातर सीटें साउथ कश्मीर में हैं। यहां PDP मजबूत मानी जाती है। PDP की शुरुआत ही साउथ कश्मीर से हुई है। 2014 के विधानसभा चुनाव में PDP को सबसे ज्यादा सीटें इसी एरिया से मिली थीं। इसी की बदौलत सरकार भी बनाई। अब की PDP की वैसी स्थिति नहीं है।‘

वे आगे कहते हैं, ‘पहले 3 से 4 हजार वोट के अंतर से कोई जीतता था, तो उसे काफी बड़ा माना जाता था। फिर भी PDP की कई सीटों पर मजबूती है। इल्तिजा मुफ्ती की टक्कर बशीर अहमद से है। दोनों में कड़ा मुकाबला है। बशीर के पिता भी 3 बार विधायक रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भी एक बार पूर्व CM मुफ्ती मोहम्मद सईद को हरा चुके हैं।’

‘पिछले कई चुनाव से इस सीट पर मुफ्ती मोहम्मद सईद, महबूबा और इनकी पार्टी के कैंडिडेट लगातार जीतते रहे हैं। पहले फेज में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस अलायंस को 8-10 सीटें मिल सकती हैं। PDP को 5-6 सीटें ही मिलेंगी। कश्मीर घाटी में जिन 16 सीटों पर वोटिंग है, वहां BJP को ज्यादा फायदा मिलने के चांस कम हैं।‘

अब बात पॉलिटिकल पार्टियों के दावों की… नेशनल कॉन्फ्रेंस: PDP चैलेंज नहीं, BJP को सरप्राइज करेंगे नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ स्पोक्सपर्सन इमरान के मुताबिक, आर्टिकल-370 और बेरोजगारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। वे कहते हैं, ‘हमारे लिए सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी और महंगाई है। यहां 23% के आसपास बेरोजगारी दर है। हमने मैनिफेस्टो में 1 लाख नौकरियां देने का वादा किया है। इसके साथ ही 200 यूनिट तक फ्री बिजली देंगे। महिलाओं के लिए फ्री बस सर्विस भी देंगे।

इमरान कहते हैं, ‘हमारे स्टार कैंपेनर लगातार प्रचार कर रहे हैं। पहले फेज में ज्यादातर सीटों पर हम जीतेंगे। जम्मू में भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है। हम BJP को वहां से बहुत सरप्राइज करने वाले हैं। हमारी पार्टी हर सीट पर चुनाव प्रचार कर रही है।‘

इमरान PDP को बड़ा चैलेंज नहीं मानते। वे कहते हैं, ‘अब लोगों को समझ आ गया है कि सिर्फ नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और अन्य पार्टियों के अलायंस ही BJP की ध्रुवीकरण की राजनीति को रोक सकते हैं। इस बार PDP की परफॉर्मेंस अब तक की सबसे खराब परफॉर्मेंस साबित होगी।‘

जहां दोनों पार्टियों के कैंडिडेट, वहां भी जीत अलायंस की होगी पहले फेज में जम्मू की 3 सीटों पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इमरान कहते हैं, ‘इस चुनाव में कुछ जगहों पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों के कैंडिडेट उतर रहे हैं।’

‘असल में वहां पर सीनियर नेताओं के बीच किसी एक कॉमन कैंडिडेट पर फैसला नहीं हो पाया। लेकिन जिन सीटों पर दोनों पार्टी से कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं। वहां हम मजबूत हैं। कोई भी पार्टी जीते वो अलायंस का ही हिस्सा रहेगा। इस तरह हमें फायदा ही होगा, नुकसान नहीं।

PDP: हर सीट जीतने का टारगेट, BJP को जम्मू में नुकसान होगा विधानसभा चुनाव में सीटों के टारगेट को लेकर PDP में मंत्री रह चुके अब्दुल गफ्फार सोफी कहते हैं, ‘10 साल बाद यहां चुनाव हो रहे हैं। हमारी तैयारी लोकसभा चुनाव से ही चल रही है। हमारा काम चुनाव में हर सीट पर लड़ना है। हर पॉलिटिकल पार्टी का टारगेट होता है कि सभी सीटें जीते। हमारा भी यही टारगेट है।’

वे आगे कहते हैं, ‘आर्टिकल-370 हटने पर सबसे ज्यादा जश्न जम्मू वालों ने मनाया था। आज वो पछता रहे हैं। इसकी वजह से उनका रोजगार छिन गया है। पहले बाहर से कोई यहां नौकरी करने नहीं आ सकता था। यहां के लोगों को रोजगार मिलता था। आज हर विभाग में बाहर से लोग आ रहे हैं।‘

‘BJP को अब जम्मू से भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। BJP के कश्मीर में कदम जमाने का कोई सवाल ही नहीं बचता है।’

‘यहां 1 लाख पोस्ट खाली हैं। अगर हम सरकार में आते हैं तो उसे तुरंत भरेंगे। 3 महीने के अंदर इन पोस्ट के विज्ञापन निकालेंगे। 9 महीने के अंदर सभी सीटों को भरेंगे। यहां भारी भरकम बिजली बिल आना भी बड़ा मुद्दा है। इसे लेकर भी हमने कहा है कि हर घर को 200 यूनिट फ्री बिजली देंगे। यहां स्मार्ट मीटर सिस्टम को खत्म करेंगे। वाटर टैक्स भी नहीं लेंगे।‘

कांग्रेस: 370 के साथ बेरोजगारी बड़ा मुद्दा, BJP ने कश्मीरियों के जज्बात से खेला कश्मीर के दोरू से कांग्रेस कैंडिडेट और पूर्व मंत्री गुलाम अहमद मीर कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव 5 साल पहले होने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। BJP ने 5 अगस्त 2019 को जो फैसला लिया, उससे देश को गुमराह किया गया।‘

‘ये बताया कि जम्मू कश्मीर को आगे बढ़ाने के लिए कुछ अड़चनें थी, जिसे दूर कर दिया गया। उनके हिसाब से ये अड़चनें थीं, लेकिन लोगों के हिसाब से ये जज्बात थे। BJP ने यहां के लोगों के जज्बात के साथ खिलवाड़ किया। आर्टिकल-370 के अलावा बेरोजगारी और महंगाई बड़ा मुद्दा है। यहां दुकानदार, किसान और नौजवान सभी परेशान हैं।’

नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस अलायंस गुलाम अहमद मीर कहते हैं, ‘लोकसभा चुनाव में आपने देखा होगा एक साथ चुनाव लड़ने का कितना असर हुआ। इस विधानसभा चुनाव में भी अलायंस को पूरा फायदा मिलेगा। ये अलायंस नेताओं की कुर्सी के लिए नहीं हुआ है।‘

PDP पर वे कहते हैं, ‘PDP इस बार सिर्फ अपने परिवार के लिए चुनाव लड़ रही है। उनके पास अब कुछ बचा नहीं है। पहले फेज में सबसे ज्यादा सीटें NC-कांग्रेस गठबंधन को ही मिलेंगी।

BJP: ज्यादातर सीटें जीतने का टारगेट, कितनी जीतेंगे ये साफ नहीं जम्मू कश्मीर में BJP के स्पोक्सपर्सन अभिजीत जसरोटिया कहते हैं, ‘हमारा टारगेट यही है कि हम ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल करें। हालांकि, आंकड़ों को लेकर अभी कुछ साफ नहीं कह सकते हैं। हम लोगों ने सभी सीटों पर जीतने का टारगेट रखा है।‘

अभिजीत जसरोटिया कहते हैं, ‘जम्मू वालों के लिए सभी एक जैसे हैं। इंजीनियर राशिद के जेल में रहने या जेल से बाहर आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। बेरोजगारी के मुद्दे को विपक्ष ज्यादा उठा रहा है। पुरानी खानदानी पार्टियों ने अपने ही लोगों को रोजगार दिए, इसलिए इसे रोजगार देना नहीं कह सकते हैं। PDP वालों ने भी धांधली की है। हमने एक भी शख्स को गलत तरीके से रोजगार नहीं दिया।‘

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