हिमाचल के मणिमहेश में दिल्ली के श्रद्धालु की मौत
उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान कल शाम दिल्ली के एक श्रद्धालु की मौत हो गई। दिल्ली के तिलक नगर निवासी 74 वर्षीय विक्रम मल्होत्रा की गौरीकुंड के पास अचानक तबीयत खराब हो गई, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। आज पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। 26 अगस्त से 11 सितंबर तक चलने वाली इस यात्रा के लिए पिछले गुरुवार को हेली टैक्सी सेवा शुरू कर दी गई है।
भरमौर से मणि महेश तक विभिन्न स्थानों पर रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के जवानों के अलावा पर्वतारोहण संस्थान के स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। 5 स्थानों पर लगाए गए शिविरों में मेडिकल टीम तैनात की गई है।
धार्मिक यात्रा में छोटा शाही स्नान का शुभ मुहूर्त इस बार 26 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह 3:40 बजे शुरू होगा, जो देर रात 2:20 बजे तक चलेगा। इस दौरान हजारों शिव भक्त डल में डुबकी लगाएंगे। वहीं, शाही स्नान राधा अष्टमी के अवसर पर यानी 11 सितंबर को होगा।

मणिमहेश यात्रा के लिए बीते 3-4 दिन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचने शुरू हो गए हैं। जम्मू कश्मीर के डोडा से भी शिव भक्तों का एक बड़ा जत्था मणिमहेश के डल में शाही स्नान कर चुका है। भरमौर से मणिमहेश तक शिव के जयकारों से गूंज रहा है।
देशभर से मणिमहेश पहुंचते हैं शिव भक्त
बता दें कि हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के दुर्गम क्षेत्र भरमौर में मणिमहेश यात्रा के लिए देशभर में बड़ी संख्या में शिव भक्त पहुंचते हैं। आधिकारिक तौर पर यात्रा 26 अगस्त से शुरू हो रही है। मगर प्रशासन ने वीरवार से ही हेली टैक्सी सेवा आरंभ कर दी है।

यहां बनाए गए कैंप, जहां मेडिकल टीम रहेगी तैनात
प्रशासन ने मणिमहेश यात्रा के लिए भरमौर, हड़सर, धनछो, सुंदरासी और गौरीकुंड में 5 जगह कैंप स्थापित किए है। यहां प्रत्येक श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य जांच के बाद ही आगे भेजा जाएगा, क्योंकि 13385.83 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश में कई बार ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इन कैंप में मेडिकल टीमें तैनात की गई है।
घोड़े और हेली टैक्सी से भी कर सकते हैं यात्रा
मणिमहेश यात्रा ज्यादातर श्रद्धालु पैदल करते हैं। जो चलना नहीं चाहते या चलने में सक्षम नहीं हैं, वह घोड़ों, हेली टैक्सी या कुली के माध्यम से भी यात्रा कर सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने हेली टैक्सी, कुली और घोड़ों का किराया तय कर दिया है। हेली टैक्सी से भरमौर से गौरीकुंड तक श्रद्धालुओं को 3875 रुपए एक साइड का किराया देना होगा। हेली टैक्सी का किराया इस बार पिछले साल की अपेक्षा 20 प्रतिशत कम है।

चंबा से गौरीकुंड तक पहली बार हेली टैक्सी सेवा
SDM भरमौर-कुलबीर सिंह राणा ने बताया कि पहली बार चंबा से भी गौरीकुंड तक हेली टेक्सी सेवा शुरू की जा रही है। इसके लिए 25 हजार रुपए किराया निर्धारित किया गया है। श्रद्धालु मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग करवा सकते हैं।
घोड़े पर यात्रा को देने होंगे 4700 रुपए
भरमौर के हड़सर से मणिमहेश तक घोड़ा-खच्चर से आने-जाने का किराया 4700 रुपए प्रति सवारी तय किया गया है। इसी तरह 5 कैंप के बीच का भी अलग अलग किराया निर्धारित किया गया है। तय किराया से ज्यादा दर्रें वसूलने पर कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह कुली के लिए भी किराया तय किया गया है।
उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा
मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा माना जाता है। 13 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थिति मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचे-ऊंचे पहाड़ चढ़ने पढ़ते हैं। यह यात्रा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुंदर दृश्यों के लिए भी जानी जाती है, क्योंकि इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को घने जंगलों, अल्पाइन घास के मैदानों और चट्टानों के बीच बीच से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान हिमालय का मनमोहक दृश्य भीदेखने को मिलता हैं। यही वजह है कि यह अध्यात्मिक यात्रा रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का भी आभास कराती है।
मणिमहेश के कैलाश शिखर में शिव का निवास
ऐसा मान्यता है कि भगवान शिव मणिमहेश के कैलाश शिखर पर निवास करते हैं, जो झील से दिखाई देता है। यह यात्रा हर साल, आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में हिंदू त्यौहार जन्माष्टमी के अवसर पर होती है। माना जाता है कि यह यात्रा 9वीं शताब्दी में शुरू हुई थी जब एक स्थानीय राजा, राजा साहिल वर्मन को भगवान शिव के दर्शन हुए थे जिन्होंने मणिमहेश झील पर एक मंदिर स्थापित करने का निर्देश दिया।

श्रद्धालुओं के जारी की एडवाइजरी
इस यात्रा के दृष्टिगत प्रशासन ने शिव भक्तों को एडवाइजरी जारी की है। इसका पालन सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य होगा है। बिना पंजीकरण यात्रा की इजाजत नहीं होगी। मणिमहेश यात्रा के दौरान कई बार ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। खतरनाक रास्तों के कारण कई बार अनहोनी भी हो जाती है। 3 दिन पहले भी ऊना के एक श्रद्धालु लैंडस्लाइड के कारण मौत हो चुकी है।
मणिमहेश यात्रा के लिए इन निर्देशों का करें पालन
- श्रद्धालुओं को चिकित्सा प्रमाण पत्र साथ लाने को कहा गया है। आधार शिविर हड़सर में स्वास्थ्य जांच करवाएं, चढाई धीरे-धीरे चढ़ें, सांस फूलने पर वहीं रुक जाएं
- छाता, बरसाती, गर्म कपडे, गर्म जूते, टॉर्च और डंडा साथ रखें
- प्रशासन की और से निर्धारित रास्तों पर चलें
- स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर निकटतम शिविर में संपर्क करें
- दुर्लभ जड़ी-बूटियों एवं पौधों के संरक्षण में सहयोग करें
- यात्री अपना पहचान पत्र/आधार कार्ड साथ रखें
- सुबह 4:00 बजे से पहले और शाम 5 बजे के बाद हड़सर से यात्रा न करें
- नशीले पदार्थों व मांस मदिरा का सेवन न करें
- छह सप्ताह से ज्यादा गर्भवती महिलाएं यात्रा न करें
- मौसम खराब होने पर हड़सर व डल झील के बीच धन्छो, सुंदरासी, गौरीकुंड एवं डल झील पर सुरक्षित जगह पर रुके
