भारत की है यही निशानी हिंदी बोल

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में भोपाल डिग्री कॉलेज अशोक विहार भोपाल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की शिक्षिका ने भजन तुम धरती आकाश हमारे गाकर किया।
सर्वप्रथम बी.ए.द्वितीय वर्ष के छात्र कुलदीप ने हिंदी पर बेहतरीन कविता सुनाई, छात्रा साइना खान ने हिंदी पर व्याख्यान एवम मां पर कविता पाठ किया।
कवि सम्मेलन का संचालन देश की सुप्रसिद्ध कवयित्री डा. लता स्वरांजलि ने किया उन्होंने कुशल संचालन करते हुए जहां श्रोताओं को हंसाया भी तो वहीं चिंतन पर भी मजबूर किया।
उन्होंने एक रचना में
“दिल में लेके हिंद के प्यार का ज़ोर चलें।
आओ इंडिया से भारत की ओर चलें।।”
रचना से हिंदी और हिंदुस्तान की संस्कृति अपनाने पर ज़ोर दिया। वहीं विदेशी भाषा त्याग कर बोल चाल में हिंदी प्रयोग करने पर उन्होंने गीत के माध्यम से संदेश दिया –
” भारत की है यही निशानी हिंदी बोल।
हिंदी है तू हिंदुस्तानी हिंदी बोल।।
बन हिंदी का ऐसा सिपाही सदियों तक,
दोहराए इतिहास कहानी हिंदी बोल।।” इस गीत से सभी श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
निर्दलीय समाचार पत्र के प्रमुख संपादक एवम् वरिष्ठ कवि मुख्य अतिथि श्री कैलाश आदमी जी ने हिंदी का महत्व परिभाषित करते हुए उनकी रचना पढ़कर दाद बटोरी –
कविता खुद सोपान हो गई।
शब्द शब्द मिल गान हो गई।।
वरिष्ठ कवि एवम शायर डा. आज़म ने अपनी हिंदी ग़ज़लो से महफिल में ऊर्जा का संचार किया।
“आइना अंतःकरण होता रहा।
शुद्ध अपना आचरण होता रहा ।।
जिंदगी चलती रही जैसे मशीन,
आदमी भी उपकरण होता रहा।
मन में आज़म गंदगी जमती रही,
तन का बस शुद्धिकरण होता रहा।।”
निर्दलीय समाचार पत्र के कार्यकारी संपादक प्रिंस अभिषेक अज्ञानी जी ने कहा कि हम भारत के लोग भारतीय संस्कृति की बात करते हैं, किंतु अपने घर की नाम पट्टिका अंग्रेजी में लिखवाते हैं, यह देश की बड़ी विडंबना है। यहां के लोग ही हिंदी बोलने में शरमाते हैं, और अंग्रेजी बोलने में अपनी शान समझते हैं। यही ओछी मानसिकता हमारी भाषा को कहीं न कहीं अपाहिज बनाती है। अज्ञानी जी ने कहा लोग जी. पी. ठाकुर लिखते हैं, इससे उनका नाम गणेश प्रसाद है या गोबर प्रसाद ये पता ही नहीं चलता है। हिंदुस्तान में रह के हिंदी की ऐसी दुर्गति कहीं और नहीं होती, जहां आज पूरे नाम ही हिंदी में न लिए जाते हों।
अपने ऊर्जावान उद्बोधन में उन्होंने अपनी मातृभाषा को प्रेम करने और जीवन में उतारने को बात कही।
भोपाल डिग्री कॉलेज ग्रुप के संचालक श्री एन. डी. राही एवम् प्राचार्या डा. हसरत जहां जी ने सभी कवियों को शाल श्रीफल एवम् कलम भेंट कर सम्मानित किया। निर्दलीय समाचार पत्र की ओर से भी अज्ञानी जी ने सभी कवियों एवम् महाविद्यालय की प्राचार्या, संचालक को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर डा. लता ने उनकी चौथी पुस्तक प्रेमांजलि प्राचार्या को भेंट की। अंत में सभी कवियों अतिथियों विद्यार्थियों का आभार डा. हसरत जहां जी ने व्यक्त किया।
