झोला छाप ख़बरी

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बच्चों की अच्छि शिक्षा ,एक छत और सम्मान को तरस रहे रहे श्रमजीवी पत्रकार …?

श्रमजीवी पत्रकारो के नाम से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने खूब पैसा बहाया ..? पत्रकार भवन का उदघाटन ,प्रचार प्रसार बेनर ,पोस्टर ,फ़िल्म निर्माण ,अगेरा वगेरा पत्रकारो के लिए कई घोषणा भी हुई । पर सब की सब बे काम ..?

श्रमजीवी पत्रकारो के नाम पर उद्योगपति के काले कार नामो सफेद फैक्ट्री जो मीडिया घराने है ..? उन्हें भरपूर लाभ दिया जाता है ?

श्रमजीवी पत्रकार के बच्चों का भविष्य अब अंधकार की और बढ़ रहा है । और एक आशियाने के लिए पत्रकार दिन रात कलम तोड़ रहा है ।

सरकार पत्रकारो के बच्चों को अगर चाहें तो फ्री शिक्षा की योजना बना सकती है । यही नही खेल विभाग में भी पत्रकारों के बच्चों को फ्री एडमिशन दे सकती है ?

लेक़िन सरकार तो सिर्फ यही कर सकती है कि किराये के लाइसेंस पर सारे नियमो को ताख पर रख कर चलने वाले धन्ना सेठो को लाखों का विज्ञापन बाट रही है । और श्रमजीवी पत्रकार इन सेठो का गुलाम बनता जा रहा है …?

पत्रकारो की पीड़ा को समझने वाले अधिकारी जंसम्पर्क से रिटायर्ड हो गए है । बचे कूचे अधिकारीयो को इधर उधर कर दिया गया है । जो सिर्फ दबे कुचले से हो गये है । और कमीशन खोर ,स्वार्थी ,लालची ऐसी कमरों में बैठकर सफेद मार्वर्ल से कोठियां बना रहे है …?

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