परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्धता से हो रहा क्रियान्वयन : आयुष मंत्री श्री परमार

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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य एक मंच पर सस्ती-सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की स्वास्थ्य सेवा व्यवसायी पंजीयिका” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

प्रदेश के लोगों के जीवन को स्वथ्य और बेहतर बनाने में स्वस्थ भारत मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस मिशन की सफलता के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ साथ परंपरागत चिकित्सा पद्धति को भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कोरोना संकटकाल में परंपरागत चिकित्सा पद्धति ने समाज में अपनी उपयोगिता सिद्ध की हैं। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के सभागार में राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग, नई दिल्ली द्वारा “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की स्वास्थ्य सेवा व्यवसायी पंजीयिका” विषय पर प्रायोजित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कही। मंत्री श्री परमार ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को एक व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा प्रदान करना, स्वास्थ्य सेवा सस्ती-सुलभ करना और नागरिकों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की सुविधा उपलब्ध कराना है। समस्त रोगों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कर कम समय में अधिक उपयोगी एक मंच उपलब्ध कराना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का लक्ष्य है। श्री परमार ने अपील करते हुए कहा कि सभी पंजीकृत आयुष चिकित्सक, स्वास्थ्य संस्थान एवं नागरिक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) में अपना पंजीकरण कर स्वस्थ भारत के संकल्प की पूर्ति में सहभागिता करें। भारत को 2047 तक “स्वस्थ भारत, विकसित भारत” बनाने के संकल्प में यह मिशन, मील का पत्थर सिद्ध होगा। श्री परमार ने कहा कि होम्योपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धति के उत्थान के राज्य सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। आमजन को सस्ता एवं उत्तम उपचार देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्री परमार ने कार्यशाला के आयोजन के लिए बधाई भी दी। उन्होंने कहा कार्यशालाओं के आयोजन का लाभ सम्पूर्ण प्रदेश को मिलेगा। राज्य सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति के उत्थान के लिए बेहतर कार्ययोजना के साथ कार्य कर रही है, इसके लाभजनक परिणाम आने वाले समय में दिखेंगे।

भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों की अपनी उपयोगिता है, लेकिन इनके प्रभाव एवं कुप्रभाव पर चर्चा के लिए कार्यशालाओं का आयोजन आवश्यक है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से सभी चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ लाने का कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी, आयुर्वेद जैसी चिकित्सा पद्धति हमारी मिट्टी से जुड़ी हुई विधा है।

नागदा-खाचरौद विधायक एवं होम्योपैथी चिकित्सक डॉ तेज बहादुर सिंह चौहान ने होम्योपैथी सबसे सस्ती चिकित्सा पद्धति है, जो दीर्घकालिक प्रभावी, सुलभ और सरलता से उपलब्ध भी है। यह पद्धति रोगों के असामान्य लक्षणों को जड़ से खत्म करती है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के विकास के लिए हम संकल्पित हैं। श्री चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर भी होम्योपैथी चिकित्सा जगत में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किए जाने की बात कही।

आयुक्त आयुष श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने कार्यशाला के आयोजन के लिए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग, नई दिल्ली का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) अभिनव एवं क्रांतिकारी योजना है। इससे आयुष से जुड़ी समस्त पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के क्रियान्वयन में दृढ़ता से कार्यरत है।

प्रदेश के लगभग 30 हजार पंजीकृत शासकीय एवं अशासकीय होम्योपैथी चिकित्सकों में से 800 होम्योपैथी चिकित्सकों ने उक्त कार्यशाला में सहभागिता की। इस अवसर पर राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के चेयरमैन डॉ. अनिल खुराना, अपर सचिव आयुष श्री संजय मिश्र, आयोग के एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पिनाकिन एन. त्रिवेदी, आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता एवं विभिन्न विभागीय अधिकारीगण सहित प्रदेश भर से आए होम्योपैथी चिकित्सक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय भोपाल और मप्र राज्य होम्योपैथी परिषद के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ. जूही गुप्ता ने एवं प्रधानाचार्य डॉ. एस.के. मिश्र ने आभार व्यक्त किया।

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