विजयवर्गीय को भाया अफसर का भाषण, कहा-इन्हें नेता बनना चाहिए

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ACS संजय दुबे की तारीफ या तंज? हाल ही में अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय दुबे ने प्रदेश के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार उजागर किया था। अब विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जब मंच से इसी अधिकारी की तारीफ की, तो उनका बयान चर्चा में आ गया।

विजयवर्गीय इंदौर में आयोजित मध्य प्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले ACS संजय दुबे ने प्रेजेंटेशन दिया था। इसे लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- मेरे ही ACS संजय दुबे जी, जिन्होंने इतना अच्छा भाषण दिया कि मेरा भार हल्का कर दिया।

कैलाश विजयवर्गीय को संजय दुबे में भविष्य के नेता की संभावना भी नजर आ गई। उन्होंने कहा- आप रिटायरमेंट के बाद एक अच्छे नेता बन सकते हो, क्योंकि आपने आत्मविश्वास के साथ बहुत ही अच्छा भाषण दिया।

मंत्री की यह बात सुनकर मंच पर बैठे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री तुलसी सिलावट समेत दूसरे नेता, अधिकारी और कार्यक्रम में मौजूद लोग मुस्कुरा दिए।

दरअसल, हाल ही में ACS संजय दुबे का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने नगरीय निकायों में वाहन समेत अन्य सामग्री की खरीदी में हुई गड़बड़ियों का जिक्र किया था। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।

अब चर्चा इस बात की है कि विजयवर्गीय ने अधिकारी की तारीफ की या फिर तंज कसा। आखिर उनके बयान का इशारा किस ओर था? इंदौर के कार्यक्रम में दिए गए संजय दुबे के प्रेजेंटेशन की ओर या उस भाषण की ओर, जिसमें उन्होंने नगरीय निकायों में खरीदी की गड़बड़ियों को उजागर किया था?

इंदौर में एक कार्यक्रम में मंत्री विजयवर्गीय ने एसीएस संजय दुबे की जमकर तारीफ की।
इंदौर में एक कार्यक्रम में मंत्री विजयवर्गीय ने एसीएस संजय दुबे की जमकर तारीफ की।

कांग्रेस विधायक ने दी खुली चेतावनी छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव से कांग्रेस विधायक सुनील उईके बड़े जोश में नजर आए। उन्होंने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को खटमल की तरह मसलने की बात कह दी।

जिले के परासिया में आयोजित जन आक्रोश रैली में उन्होंने कहा- सांसद से लेकर बूथ तक, जो भाजपा का पट्टा डालता है, उसको खटमल की तरह मसलेंगे, तब हमारे दिल को शांति मिलेगी।

दरअसल, विधायक ने पुलिस और प्रशासन पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। उनका कहना था कि कांग्रेस नेताओं पर बेवजह मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

विधायक ने भाजपा नेताओं के इशारों पर काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी लोगों की सूची बना ली जाए। जब कांग्रेस की सरकार आएगी, तब उनकी परेड कराई जाएगी।

वैसे, इस आयोजन को लेकर एक और चर्चा रही। मंच पर कांग्रेस से ज्यादा कमलनाथ कांग्रेस की छाप नजर आई। दरअसल, मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ की ही तस्वीर लगी थी।

छिंदवाड़ा के परासिया में कांग्रेस की एक रैली को संबोधित करते विधायक सुनील उईके।
छिंदवाड़ा के परासिया में कांग्रेस की एक रैली को संबोधित करते विधायक सुनील उईके।

‘अब राहुल गांधी को कौन समझाए?’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से संवाद के एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को नसीहत दी।

उन्होंने कहा कि अगर आप चुनाव हार जाते हैं, तो हार के बाद क्या करना चाहिए? पांच साल मेहनत करो, अगले चुनाव के लिए लोगों का दिल जीतो और फिर आगे बढ़ो। लेकिन हार गए तो कहने लगे कि चुनाव खराब हुआ, ऐसा होता है क्या?

इसके बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, ‘अब ये बात राहुल गांधी को कौन समझाए?’

दरअसल, कांग्रेस लगातार भाजपा पर वोट चोरी के आरोप लगा रही है। इसके जवाब में भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवाद किया।

इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि केरल में जीत मिलती है, तो सब अच्छा है, लेकिन बंगाल में हारने पर चुनाव खराब हो जाता है?

अब सियासत में दोनों दलों के अपने-अपने दावे हैं। कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, तो भाजपा उसके आरोपों का जवाब दे रही है। इस सियासी खींचतान के बीच दोनों दलों की नजर युवाओं पर है, जिन्हें अपने पाले में लाने की कोशिशें जारी हैं।

राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से संवाद किया
राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से संवाद किया

और अब अंदर की बात..

कोर्ट की नाराजगी बन रही अफसर की राह में रोड़ा मालवा में आशियानों से जुड़े एक विभाग के मुखिया का प्रमोशन हो गया है। अब मुश्किल यह है कि नए मुखिया की पदस्थापना नहीं होने से ये साहब उच्च पद का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। फिलहाल मजबूरी में इन्हें इसी पद पर काम करना पड़ रहा है।

दरअसल, इस पद पर अब तक नए मुखिया की नियुक्ति नहीं हुई है। इसकी वजह है कि कुर्सी के चार दावेदार मैदान में हैं। इनमें से एक को ‘सरकार’ आगे बढ़ा रहे हैं, तो दूसरा मंत्री का खास है। तीसरे पर एक बड़े अफसर का आशीर्वाद है, जबकि चौथा दावेदार किस्मत के भरोसे है।

इनमें तीसरे दावेदार, जो बड़े अफसर के करीबी हैं, की राह में अब कोर्ट की नाराजगी रोड़ा बन गई है। एक मामले में कोर्ट उन्हें फटकार लगा चुका है और उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दे चुका है।

सुना है कि ये अफसर चुनिंदा लोगों के ही फोन अटेंड करते हैं। नेताओं को भी खास तवज्जो नहीं देते। लेकिन अब कुर्सी की चाह में नेताओं को भी भाव देने लगे हैं, ताकि कोर्ट से राहत पाने का कोई रास्ता निकल सके। हालांकि, अब तक उन्हें कहीं से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

अब माना जा रहा है कि इस कुर्सी पर ‘सरकार’ के करीबी या मंत्री के खास में से किसी एक की ताजपोशी की संभावना बढ़ गई है। देखना दिलचस्प होगा कि आखिर इस कुर्सी पर कौन काबिज होता है।

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