माननीय मुख्यमंत्री जी मोहन यादव जी आपके लिये विचार एक पत्रकार के
माननीय मुख्यमंत्री जी मोहन यादव जी आपके लिये विचार एक पत्रकार के
Mohan Yadav की कार्यशैली को लेकर इन दिनों एक दिलचस्प चर्चा सामने आ रही है। फरवरी 2026 से लेकर 11 अप्रैल 2026 तक राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञापनों की संख्या अपेक्षाकृत कम दिखाई दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों और मीडिया में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
आमतौर पर प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री की छवि को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पूर्व में Shivraj Singh Chouhan के कार्यकाल में यह देखा गया था कि लगभग हर महीने के शुरुआती दिनों में ही सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार होता था।
लेकिन वर्तमान परिदृश्य में विज्ञापनों की कम सक्रियता यह संकेत देती है कि क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव एक अलग रणनीति अपना रहे हैं? क्या यह बदलाव जानबूझकर किया गया है, या फिर प्रशासनिक प्राथमिकताओं में कोई परिवर्तन आया है—यह अभी स्पष्ट नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संभव है कि सरकार “काम पर ज्यादा, प्रचार पर कम” की नीति पर काम कर रही हो। वहीं कुछ लोगों का यह भी मानना है कि पब्लिसिटी में कमी से जनता के बीच सरकार की योजनाओं की जानकारी सीमित हो सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या Mohan Yadav बिना व्यापक प्रचार-प्रसार के ही जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए रख पाएंगे, या फिर आने वाले समय में प्रचार रणनीति में बदलाव देखने को मिलेगा?
फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक और जनचर्चा का विषय बन गया है, और आने वाले महीनों में इसकी दिशा स्पष्ट होने की संभावना है,।
DS /ES
