भोपाल में TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक मोर्चा
भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन शुरू कर दिया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन करते हुए बुधवार को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेशभर में कलेक्ट्रेट कार्यलय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के नाम पर जारी आदेश से हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। संगठनों ने सरकार से टीईटी आदेश निरस्त करने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग उठाई है।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि भोपाल में विभिन्न शिक्षक संगठनों के जिलाध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें संयुक्त मोर्चा शाखा का गठन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 8 अप्रैल को राजधानी में जिलास्तरीय प्रदर्शन कर लोक शिक्षण संचालनालय मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपा जाएगा।

वहीं, राजधानी भोपाल में शाम 4 बजे मोर्चा के बेनर तले सैकड़ों शिक्षक डीपीआई मुख्यालय भोपाल पर एकत्र होकर टीईटी परीक्षा आदेश का विरोध कर रहे हैं। अपनी मांगों संबंधी ज्ञापन आयुक्त लोक शिक्षण को सौंपेंगे।
मोर्चा के राजेश साहू, मोहन शर्मा, निलेश आर्य , शीबा खान, रागिनी सैनी, कविता तिवारी, गिरीश द्विवेदी, राकेश पाण्डेय, दर्शन ओढ़, भंवरलाल, राकेश पटेल, इत्यादि ने समस्त शिक्षकों से अधिक से अधिक संख्या में DPI मुख्यालय पर ज्ञापन प्रदर्शन कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की है।

DPI भोपाल ने जारी किया था यह आदेश
हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है, लेकिन इस आदेश से शिक्षकों में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है।
शिक्षकों का तर्क- पुराने नियमों पर नई शर्त गलत
शिक्षक संगठनों का कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 में लागू हुआ और टीईटी 2011 से अनिवार्य किया गया, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर टीईटी लागू करना गलत है। शिक्षकों का आरोप है कि यह “रेट्रोस्पेक्टिव” निर्णय है, यानी पुराने मामलों पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं, जो न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि कानूनी रूप से भी कमजोर है।

1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे में
शिक्षक संगठनों के अनुसार इस आदेश से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। इनमें लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय टीईटी की कोई अनिवार्यता नहीं थी, ऐसे में अब इस आधार पर उनकी योग्यता तय करना और नौकरी पर संकट खड़ा करना अनुचित है।
संयुक्त लड़ाई की तैयारी
उपेंद्र कौशल ने बताया कि 29 मार्च को सभी शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी, जिसमें एकजुट होकर आगे की रणनीति बनाने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में टीईटी के अलावा “शिक्षक एप से अटेंडेंस” और “सेवा वृद्धि” जैसे मुद्दे भी उठाए गए। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि अब सभी शिक्षक एक मंच पर आकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक में शासकीय शिक्षक संगठन, प्रांतीय शिक्षक संघ, राज्य शिक्षक संघ, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ और गुरूजी अध्यापक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्षों सहित कई शिक्षक नेता मौजूद रहे। इनमें राकेश पटेल, उपेंद्र कौशल, राकेश पाण्डेय, गिरीश द्विवेदी, दर्शन ओढ़, जितेंद्र शाक्य, राजेश साहू, नीलेश आर्य, द्वारका पटेल, राजेंद्र गुप्ता, नितेश नागर, आनंद वाणी और महिला प्रतिनिधि शामिल थीं।
11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन
11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन करते हुए सभी स्थानीय विधायक, मंत्री और सांसदों को ज्ञापन दिए जाएंगे। इस दौरान टीईटी आदेश को निरस्त करने और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग प्रमुख रहेगी।
