नर्सिंग कॉलेज घोटाले के लिए एएफआरसी भी जिम्मेदार,एमपी ऑनलाइन से नहीं मिले 18 करोड़

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नर्सिंग कॉलेज घोटाला, आरजीपीवी में घोटाला, एमपी ऑनलाइन फीस घोटाला सहित इंदौर के देवी अहिल्या विवि के पेपर लीक मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शनिवार को राष्ट्रीय मंत्री शालिनी वर्मा, प्रांत मंत्री संदीप वैष्णव के नेतृत्व में उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले का घेराव कर हल्ला बोला। यहां इन घोटालों को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए जमकर नारेबाजी की।

इसे देखते हुए मंत्री परमार एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच आना पड़ा और सभी मुद्दों को सुना। इसके बाद मंत्री परमार ने कहा कि आरजीपीवी में हुई गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। कहा कि एमपी ऑनलाइन के मामले का परीक्षण कराया जा रहा है। विभाग स्तर पर जांच समिति बना रहे हैं। आने वाले समय में एमपी ऑनलाइन से वसूली की जाएगी। 4 जून को लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद 5 तारीख से कार्रवाई की जानकारी सामने आ जाएगी।

फीस की राशि के 18 करोड़ कम मिले…

उच्च शिक्षा विभाग वर्ष 2018-19 से एमपी ऑनलाइन की सहायता से प्रदेशभर के कॉलेजों के लिए ऑनलाइन एडमिशन करा रहा है। एनसीटीई से अप्रूव्ड काेर्सेस में प्रवेश के लिए 2008 से एमपी ऑनलाइन काम कर रहा है। इसके लिए दोनों के बीच एमओयू हैं। छात्रों से ली जाने वाली रजिस्ट्रेशन फीस व पोर्टल शुल्क का हिस्सा विभाग को तय समय में दिया जाना चाहिए। इसमें कई विसंगतियां हैं। शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। पिछले पांच वर्षों में सिर्फ पंजीयन और पोर्टल शुल्क से ही एमपी ऑनलाइन द्वारा विभाग को 18 करोड़ रुपए कम दिए जाने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले में की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

वीसी की नियुक्ति पर उठाए सवाल
एबीवीपी के आह्वान पर आरजीपीवी के कर्मचारी/श्रमिक संघ ने आरजीपीवी में हो रही गड़बड़ियों को सामने रखा है। 524 पन्नों में दस्तावेजों सहित 35 बिंदुओं को शामिल कर जांच कराने की मांग की है। इसमें आरजीपीवी के प्रोफेसर व वर्तमान में बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए थे।

एएफआरसी को भंग किया जाए…
एडमिशन एंड फी रेगुलेटरी कमेटी (एएफआरसी) की भूमिका पर सवाल खड़े कर इसे भंग करने की मांग की। सवाल किया गया कि क्या कॉलेजों के मेंटनेंस, कैंपस एवं फैकल्टी के खर्च के रिकार्ड को ध्यान में रखा गया था? फीस कमेटी द्वारा फीस निर्धारित करने में कठोरता और सावधानी रखी जाती तो भ्रष्टाचार पर समय पर अंकुश लग गया होता।

^एएफआरसी के स्तर से कोई लापरवाही नहीं हुई है। नर्सिंग कॉलेजों की पूर्व में तय की गई फीस सभी आदेश निरस्त किए जा चुके हैं। अब तक के मेरे कार्यकाल में नर्सिंग ही नहीं सभी कोर्स की फीस निर्धारित करने की प्रक्रिया में सख्ती की जा रही है। एएफआरसी संबंधित अपेक्स काउंसिल का अप्रूवल और विश्वविद्यालय की संबद्धता पत्र देखती है। इसके बाद ही फीस तय करती है। –प्रो. आरआर कान्हेरे, चेयरमैन, एएफआरसी

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