विजय शाह केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

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पिछले साल 11 मई 2025 को मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने एक कार्यक्रम (हलमा सभा) में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। जिसमें उन्होंने कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बता दिया था। इस बयान को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

छह महीने बाद होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह के बयान मामले पर पिछले साल 28 जुलाई को सुनवाई हुई थी। इसके छह महीने बाद आज सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई होगी। जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर फटकार लगाई थी

महू में पिछले साल 11 मई को दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम को मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- ‘उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’

शाह ने आगे कहा- ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।’

मंत्री शाह ने एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती बता दें कि मंत्री विजय शाह ने 11 मई को महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताया था। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर मंत्री के खिलाफ 14 मई को महू के मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके खिलाफ विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

सोमवार 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विजय शाह के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट ने माफी मांग ली है। इस पर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप लोगों के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। आप पब्लिक फिगर हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए।

जुलाई में सुनवाई पर कोर्ट ने माफी पर जताई थी नाराजगी पिछले साल 28 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शाह के मामले में सुनवाई की थी।

कोर्ट ने शाह द्वारा सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को निष्ठाहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। यह देखते हुए कि अपने माफीनामे वाले वीडियो में शाह ने जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात स्वीकार नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा– वह आत्मचिंतन करें कि अपनी सजा कैसे चुकाएं। आपकी वह सार्वजनिक माफी कहां है? हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।

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