वन्य प्राणी तेन्दुआ की खाल की तस्करी करने वाले आरोपीगण को हुई
04-04 वर्ष के कठोर कारावास की सजा
श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया, भोपाल ने बताया कि दिनांक 23/12/2025 माननीय न्यायालय श्री अग्नीन्ध्र कुमार द्विवेदी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोदय, द्वारा प्रतिबंधित वन्य प्राणी तेन्दुआ की दो नग खाल की तस्करी के मामले मे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 51 के अंर्तगत आरोपी बिल्लौर सिंह सोलंकी एवं कैलाश सोलंकी को दोषसिद्ध पाते हुये दोनो आरोपीगण को 04-04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25,000-25,000 रू अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का निर्णय पारित किया है । उक्त प्रकरण में शासन द्वारा की ओर से विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ भोपाल श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया द्वारा पैरवी की गई है।
घटना का संक्षिप्त विवरण :-
विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ श्रीमती भदौरिया ने बताया कि घटना का विवरण इस प्रकार है, दिनांक 19/02/2018 को एसटीएफ कार्यालय जबलपुर मे पदस्थ निरीक्षक हरिओम दीक्षित को मुखबीर द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि दो व्यक्ति खरगौन निवासी (आरोपीगण) तेन्दुए की खाल बेचने का प्रयास कर रहे है, उक्त सूचना से भोपाल मे वरष्ठि अधिकारियो को अवगत कराते हुये निरीक्षक टीम सहित मुखबीर के बताये स्थान पर दिनांक 20/02/2018 दोपहर 02 बजे रवाना हुये। दिनांक 21/02/2018 को पुन: निरीक्षक के पास मूखबीर से सूचना प्राप्त हुई कि संदिग्ध बिल्लौर सिंह सोलंकी एवं कैलाश सोलंकी दोपहर के समय खाल बेचने के लिये निकलेगे। निरीक्षक टीम सहित मौका स्थल पर पुहचे जहा पर दो व्यक्तियों की तरफ मुखबीर द्वारा इशारा करते हुये मुखीबर द्वारा सूचना को पुख्ता किया गया दोनो संदेहियों के हाथ मे एक-एक झोला था घेराबंदी करके एसटीएफ टीम ने उन्हे पकडा और अपना परिचय देते हुये उनका नाम एवं पता पूछा एक व्यक्ति ने अपना नाम बिल्लौर सिंह सोलंकी एवं दूसरे ने कैलाश सोलंकी निवासी खरगौन म.प्र. बताया। दोनो के हाथ मे लिये दोनो थैलो की तलाशी लेने पर कपडे मे लिपटी हुई वन्य जीव तेन्दुए (Leopard) की खालें पाई गई जो चार हिस्सों मे थी। धड पूछ सहित, जबडा पूरा केनाईन दांतो सहित, मौके पर जप्ती इत्यादी आवश्यक कार्यवाही कर आरोपीगण को गिरफतार कर देहाती नालसी लेखबद्ध की गई और थाना एसटीएफ भोपाल मे अपराध क्रमाक 05/2018 धारा 9, 41, 51 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंर्तगत प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गई। सम्पूर्ण विवेचना उपरान्त अभियोग पत्र आरोपीगण के विरूद्ध सक्षम न्यायालय मे प्रस्तुत किया गया।
माननीय न्यायालय के समक्ष अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्क, दस्तावेज, वैज्ञानिक साक्ष्य सहित छ: साक्षियो की साक्ष्य कराते हुये अपने मामले को आरोपीगण के विरूद्ध संदेह से परे प्रमाणित किया गया। न्यायालय के समक्ष अभियोजन द्वारा प्रस्तुत न्यायाद़ष्टात एवं तर्को से सहमत होते हुये माननीय न्यायालय द्वारा दोनो आरोपीगण बिल्लौर सिंह सोलंकी एवं कैलाश सोलंकी को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 51 के अंर्तगत दोषसिद्ध पाते हुये 04-04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25,000-25,000 रू अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का निर्णय पारित किया गया।
