हमीदिया अस्पताल की लापरवाही उजागर: सरकारी शव वाहन योजना फेल, दो घंटे तक शव के साथ भटकते रहे परिजन
हमीदिया अस्पताल की लापरवाही उजागर: सरकारी शव वाहन योजना फेल, दो घंटे तक शव के साथ भटकते रहे परिजन
भोपाल |
राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया अस्पताल में मध्य प्रदेश सरकार की बहुचर्चित ‘शव वाहन सुविधा’ योजना अब सिर्फ फाइलों तक सीमित दिख रही है। शुक्रवार को सागर जिले के एक मृतक के परिजनों को शव ले जाने के लिए करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन अस्पताल प्रशासन कोई वाहन उपलब्ध नहीं करा सका।
दो घंटे तक अस्पताल के बाहर बैठा रहा परिवार
जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के रहवासी ओमप्रकाश राठौर (45) को ब्रेन हैमरेज के बाद गंभीर हालत में हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया था। शुक्रवार दोपहर करीब चार बजे उनकी मौत हो गई। नियमानुसार अस्पताल से मृतक के गृह जिले तक शव वाहन (Hearse Van) की सुविधा नि:शुल्क दी जानी चाहिए थी, लेकिन दो घंटे बीत जाने के बाद भी परिजनों को कोई वाहन नहीं मिला।
थके-हारे परिजन अस्पताल प्रबंधन के चक्कर काटते रहे। बताया गया कि कई बार सीएम हेल्पलाइन और हेल्थ डिपार्टमेंट की कंट्रोल रूम में फोन करने के बाद भी कोई ठोस मदद नहीं मिली। आखिरकार मृतक के बेटे ने निजी एंबुलेंस से शव को सागर ले जाने का इंतजाम किया, जिसके लिए उसे लगभग ₹8,000 का किराया देना पड़ा।
योजना का उद्देश्य और हकीकत
प्रदेश सरकार ने कुछ साल पहले ‘शव वाहन सुविधा’ शुरू की थी, ताकि गरीब परिवारों को मृतक का शव ले जाने के लिए आर्थिक परेशानी न झेलनी पड़े। योजना के तहत प्रत्येक जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में शव वाहन 24 घंटे उपलब्ध रखने के निर्देश हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश जिलों में यह सुविधा या तो बंद पड़ी है या फिर वाहनों की संख्या बेहद सीमित है।
प्रशासन की सफाई
इस मामले में हमीदिया अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि शव वाहन चालकों की कमी और फंड की देरी के कारण यह स्थिति बनी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया, “वाहन उपलब्ध न होने की जानकारी मिली है, हम इसकी जांच कर रहे हैं। जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी।”
परिजनों ने जताई नाराजगी
मृतक के भाई श्याम राठौर ने कहा, “सरकारी अस्पतालों में गरीबों के लिए बनी योजनाएं सिर्फ कागजों में चल रही हैं। हमारे भाई का शव घंटों ठंडघर में पड़ा रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
सवालों के घेरे में अस्पताल प्रशासन
यह पहला मौका नहीं है जब हमीदिया अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी एम्बुलेंस और शव वाहन की अनुपलब्धता को लेकर मरीजों के परिजन विरोध जता चुके हैं। हर बार जांच के आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन स्थितियों में कोई सुधार नहीं आता।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शव वाहन जैसी सेवाओं का कॉन्ट्रैक्ट प्राइवेट एजेंसियों को सौंपे जाने के बाद जवाबदेही खत्म हो गई है। सरकार को इन सेवाओं की निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
हमीदिया जैसे बड़े अस्पताल में यदि शव वाहन सुविधा न मिले तो यह स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर विफलता है। सरकार को इस योजना की समीक्षा कर प्रत्येक अस्पताल में वाहन की उपलब्धता और संचालन की सख्त मॉनिटरिंग करनी होगी।
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