भगवान भाष्यकार आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य जयन्ती के पावन अवसर पर




“भव शंकर देशिक मे शरणम् ..!”
भगवान भाष्यकार आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य जयन्ती के पावन अवसर पर “आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास” द्वारा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में परम पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य प्रभुश्री जी” की अध्यक्षता एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज के मुख्य आतिथ्य में आचार्य शंकर प्रकटोत्सव “एकात्म पर्व” आयोजित किया गया।
न्यास द्वारा अद्वैत वेदान्त दर्शन के सनातन प्रवाह को त्वरा एवं उत्कर्ष प्रदान करने हेतु संन्यास परम्परा एवं अकादमिक जगत के सम्मान हेतु रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द शैक्षणिक एवं शोध संस्थान के प्रति-कुलपति पूज्य स्वामी आत्मप्रियानन्द जी एवं मद्रास संस्कृत कॉलेज के आचार्य प्रो. महामहोपाध्याय ब्रह्मश्री मणि द्रविड शास्त्री जी को अलंकृत किया गया। अलंकरण समारोह के उपरान्त पूज्य आचार्यों की सन्निधि में सम्पन्न “अद्वैत जागरण शिविर” का दीक्षांत समारोह भी सम्पन्न हुआ।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में “पूज्य प्रभुश्री जी” ने कहा कि मध्य प्रदेश की धरा धन्य है जहाँ भगवद्पाद अपने गुरु से मिले। नर्मदा के तट से गुरुसत्ता प्रकट हुई, जो देश को आस्तिक बनाने की ओर प्रवृत्त हुई थी। वेदान्त की यात्रा अनन्त की यात्रा है, जो शाश्वत है, समीचीन है और सार्वभौम है। मनुष्य को स्वयं को जानने का प्रयास करना चाहिए। सत्य नित्य विद्यमान सत्ता है। जिसमें परिवर्तन हो, वह सत्य नहीं हो सकता। महापुरुषों की संगति से सत्य की प्राप्ति होती है। भगवान भाष्यकार का अद्वैत दर्शन पूरे विश्व का मार्गदर्शन करेगा। आने वाली शताब्दी अद्वैत दर्शन की शताब्दी है। जिस समय से आचार्य शंकर के विग्रह की स्थापना हुई है, अनुभूत हो रहा है कि देश के वास्तु, प्रकृति, स्वभाव में परिवर्तन आया है और धर्म की वृद्धि हुई है। आध्यात्मिक विचारों की ओर आकर्षण बढ़ा है। यह सब भगवान शंकराचार्य जी का पुण्य प्रताप है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन एवं न्यासी सचिव आदरणीय श्री शिवशेखर शुक्ला जी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
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