सुकन्या स्कीम का फायदा मिलेगा, अपना अकाउंट नंबर दें
मेरे पास फोन आया था कि मातृ वंदन योजना के 5 हजार रुपए मिलने वाले हैं। फोन करने वाले ने मुझसे मोबाइल पर आया ओटीपी मांगा। मैंने दिया और मेरे अकाउंट से 40 हजार रुपए निकल गए। ये रकम मैंने अपने होने वाले बच्चे के लिए जमा की थी।

ये कहना है भोपाल के जाटखेड़ी में रहने वाली काजल थापा का। काजल प्रेग्नेंट है। कुछ दिन पहले ही सरकारी योजना के नाम पर वह साइबर ठगी का शिकार हो गई। ऐसा केवल काजल के साथ नहीं हुआ है, बल्कि पिछले दिनों भोपाल, इंदौर से लेकर उज्जैन, गुना समेत अलग-अलग जिलों में कई गर्भवती महिलाएं साइबर ठगी की शिकार हुई हैं।
मामले की जांच कर रही साइबर क्राइम पुलिस को आशंका है कि ठगों ने पोषण आहार ट्रैकर ऐप के जरिए गर्भवती महिलाओं का डेटा हासिल किया होगा। इसमें उनके नाम, आधार कार्ड और बैंक अकाउंट की पूरी जानकारी दर्ज है। साइबर क्राइम टीम ने जब और जांच की तो पता चला कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के यूजरनेम और पासवर्ड को हैक कर ये डेटा चुराया गया है।
भास्कर ने महिला बाल विकास अधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं को पासवर्ड बदलने के लिए कहा गया है। किस तरह से साइबर ठगों ने गर्भवती महिलाओं को ठगा? महिला बाल विकास विभाग की इसमें क्या लापरवाही रही? पढ़िए ये रिपोर्ट…

तीन केस से समझिए, कैसे हुई गर्भवती महिलाओं से ठगी
केस 1: बेटी के भविष्य के लिए रखे 5 हजार उड़ा दिए बैरागढ़ निवासी अदिति ने सरकारी सुविधाओं का लाभ पाने के लिए आंगनवाड़ी में नाम दर्ज कराया था। अदिति बताती हैं- मैं जैसे ही प्रेग्नेंट हुई, मैंने अपने होने वाले बच्चे के लिए बचत शुरू कर दी। बड़ी मुश्किल से सालभर में 5000 रुपए बचाए। मेरी बेटी हुई तो मैंने सोचा कि इन रुपयों को सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाकर जमा कर दूंगी।
इस बीच एक दिन मुझे कॉल आया कि बैरागढ़ की आंगनवाड़ी में आपकी बेटी का नाम दर्ज है। आप उसे वैक्सीन लगवा रहे हैं। उनके पास मेरी सारी जानकारी थी। मुझे भरोसा हो गया कि यह कॉल सरकारी डिपार्टमेंट से आया है। फिर कॉल करने वाले ने कहा कि बेटी जब तीन महीने की होगी तब आपको रुपए मिलेंगे। अपना बैंक अकाउंट नंबर हमें बताइए।
आंगनवाड़ी भी मैं पहली बार ही गई थी। मुझे पता नहीं था कि कैसे प्रक्रिया होती है, मैंने अकाउंट नंबर बताया। कुछ देर बाद उन्होंने वेरिफिकेशन के नाम पर ओटीपी मांगा और वह देते ही मेरे अकाउंट से पूरे 5000 रुपए उड़ गए। मेरी बेटी की नाम की पूरी बचत चली गई।

केस 2: बैंक अकाउंट में एक हजार ही थे, चुरा लिए भोपाल के बागसेवनिया में रहने वाली तनीषा गोस्वामी बताती है- प्रेग्नेंसी के दौरान मैंने और बाकी महिलाओं ने आंगनवाड़ी में नाम दर्ज कराया था। इसके बाद मेरे पास एक कॉल आया। कॉल करने वाला बोला- आपका आठवां महीना चल रहा है। उसने मेरा नाम बताया और ये भी बताया कि हमारी आंगनवाड़ी दीदी का नाम क्या है?
उसने कहा कि मेरे पास आपकी सारी डिटेल हैं लेकिन इस क्रॉस चेक कर रहे हैं, आप फिर से डिटेल दे दीजिए। इस तरह मैंने उसे सारी डिटेल शेयर कर दी। इसके बाद उसने कहा कि आपके मोबाइल पर एक नंबर आया होगा। आपका नाम यह है, आपकी आंगनवाड़ी की दीदी काे जानते हैं न।
उसने कहा कि हमारे पास सभी डिटेल हैं। आप बस फिर से बता दें, ऐसे में हमने उन्हें डिटेल दे दी। इसके बाद कॉल करने वाले ने कहा- एक नंबर आया होगा, वह बता दीजिए। हमने नंबर बताया और इसके बाद मेरे अकाउंट से रुपए कट गए।

केस 3: बेटी की परवरिश के लिए जोड़े 40 हजार निकल गए मिसरोद के जाटखेड़ी में रहने वाली काजल थापा ने भी अपनी डिलीवरी और होने वाली संतान के लालन-पालन के लिए 40 हजार रुपए जोड़े थे। काजल के पति मंजीत प्राइवेट काम करते हैं। ऐसे में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए काजल की यह बचत ही परिवार का सहारा थी।
गर्भावस्था के दौरान काजल ने आंगनवाड़ी में रजिस्ट्रेशन कराया। जिसकी जानकारी पोषण ट्रैकर एप पर अपडेट हो गई। इस अपडेट के चंद दिनों बाद ही काजल के पास महिला एवं बाल विकास विभाग के नाम पर कॉल आया और उन्हें पूरी व्यक्तिगत जानकारी बताकर विश्वास दिलाया गया कि कॉलर सरकारी विभाग से ही बोल रहा है।
इसके बाद मातृ वंदन योजना के 5 हजार रुपए आने की बात कहकर काजल से ओटीपी हासिल कर लिया। ओटीपी बताते ही काजल के अकाउंट में जमा पूरे 40 हजार रुपए निकल गए। इस अप्रत्याशित घटना ने काजल को हिलाकर रख दिया। वह तब से इस नुकसान के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही है।
वहीं, पति मंजीत की चिंता रुपयों के साथ यह भी है कि ठगी की घटना से काजल के परेशान होने के कारण होने वाली संतान पर बुरा असर न पड़े। दंपती कठिन समय में हुई इस ठगी से उबरने की कोशिश कर रहा है।

ठग ने 19 महिलाओं को कॉल किया, कई झांसे में आईं जाटखेड़ी में रहने वाली पिंकी गिरी बताती है- हमारे इलाके की आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 785 में करीब 19 गर्भवती महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। इन सभी के पास कॉल आया है। तीन-चार ने तो ओटीपी भी बता दिया और उनके रुपए निकल गए। मेरी पहचान में सांई बोर्ड के पास एक महिला के तो 50 हजार रुपए इसी तरह निकल गए हैं।
फोन आने के बीच हमने कई लोगों को बताया है कि ऐसा फोन आए तो उठाना नहीं है। कुछ बताना नहीं है लेकिन तब तक कई से ठगी हो चुकी थी।
इसी इलाके की मंजू बाई बताती है- मेरे पास फोन आया था, उन्होंने मुझसे सारी जानकारी ली और मेरे अकाउंट से 1000 रुपए कट गए। हमें तो पता ही नहीं चला कि रुपए निकले हैं। हमने इसके बाद एक बार फिर रुपए जोड़े लेकिन दूसरी बार फिर ऐसे ही कॉल आया और हमसे ओटीपी पूछा। फिर रुपए निकल गए। ठगों ने मुझसे दो बार में 3000 रुपए ठग लिए।

महिला बाल विकास विभाग ने पत्र जारी कर औपचारिकता निभाई प्रदेशभर में पोषण ट्रैकर एप के डेटा के आधार पर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक पत्र जारी किया है। विभाग ने पत्र में लिखा कि विभाग कई योजनाएं संचालित कर रहा है। इन योजनाओं के लॉग इन, पासवर्ड संबंधित कर्मचारियों से शेयर किए गए हैं।
इनकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए निर्देशित भी किया गया है। पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर दिन केंद्र की गतिविधियों की जानकारी फीड करती हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लॉग इन और पासवर्ड से उनके क्षेत्र के हितग्राहियों की पूरी जानकारी देखी जा सकती है।
ये हितग्राहियों की व्यक्तिगत जानकारी होती है, इसलिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने लॉग इन पासवर्ड को समय-समय पर बदलती रहें और इसे किसी के साथ शेयर न करें।

एक्सपर्ट बोले- सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की साइबर लॉ एक्सपर्ट यशदीप चतुर्वेदी बताते हैं- इस मामले में देखना यह जरूरी है कि सरकार ने यह एप किस कंपनी से डेवलप कराया है? एप में डेटा की सुरक्षा के लिए क्या मापदंड अपनाए गए हैं? चतुर्वेदी बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति की हेल्थ से संबधित जानकारी आईटी एक्ट में संवदेनशील व्यक्तिगत जानकारी के रूप में शामिल की जाती है।
आईटी एक्ट के सेक्शन 43 ए के अनुसार, विशेष प्रावधान है कि यदि कोई भी संस्था किसी की संवेदनशील जानकारी को स्टोरी करती है, हैंडल करती है तो वह आईएसओ 27001 सर्टिफाइड होनी चाहिए। इसके साथ ही हर साल ऐसे एप का सर्टइन (CERT-In) यानी भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (Indian Computer Emergency Response Team) से ऑडिट भी होना चाहिए।
यशदीप बताते हैं- सर्टइन (CERT-In) का नियम है कि डिफॉल्ट क्रेडेंशियल्स यानी किसी भी विभाग या डेवलपर की ओर से बनाए गए पासवर्ड को पहली बार में ही बदलना जरूरी है। बैंकिंग सिस्टम में जब कोई भी कस्टमर ई बैकिंग शुरू करता है, फर्स्ट टाइम का पासवर्ड वन टाइम पासवर्ड होता है, उस पासवर्ड से लॉग इन करते ही चेंज योर डिफॉल्ट पासवर्ड मैसेज आने लगता है, ऐसे में पासवर्ड बदलना ही पड़ता है।

अफसर बोले- कार्यकर्ताओं को दे रहे ट्रेनिंग ठगी के मामले सामने आने के बाद महिलाएं कहीं न कहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, लेकिन इसमें इनकी कोई गलती नजर नहीं आती। महिला बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग ही नहीं दी। दरअसल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी के लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास है। ऐसे में ये महिलाएं एप के बारे में इतनी जानकारी नहीं रखती है।
इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव बताते हैं- साइबर ठग आजकल लगभग सभी पर अटैक कर रहे हैं। ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना सबसे महत्वपूर्ण है। जहां तक पोषण ट्रैकर एप की बात हैं, इससे डेटा लीक होने की आशंका ही नहीं है।
ऐसे मामले सामने आते ही हमने प्रदेशभर में पासवर्ड बदलने के निर्देश जारी किए। साथ ही सभी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

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