*०प्रतिदिन विचार* (05/05/2024)-राकेश दुबे  2024

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*यह रवैया तो जनतंत्र के लिए कोढ़ है*

 

भारत का यह दुर्भाग्य है राजनीति में कई क्षत्रप परिवारों से ऐसा नेता भी सामने आए हैं जिन्होंने सत्तामद में चूर होकर तमाम नैतिकताओं व मर्यादाओं को ताक पर रखा दिया है । पिछले दिनों कर्नाटक में हासन सीट से जनता दल (सेक्यूलर) के सांसद प्रज्वल रेवन्ना पर सैकड़ों महिलाओं के साथ दुराचार के जो गंभीर आरोप लगे, उसने राजनीति में पतन की पराकाष्ठा को दर्शाया है।

 

फिर उस कथित आरोपी सांसद का दुस्साहस भी देखिए कि वह मतदान के दिन तक चुनाव क्षेत्र में रहा और फिर जर्मनी भाग गया। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पौत्र और पूर्वमंत्री एचडी रेवन्ना के पुत्र प्रज्वल के यौन उत्पीड़न व दुराचार दर्शाते करीब तीन हजार वीडियो सार्वजनिक हुए। चुनाव प्रचार के दौरान वीडियो पेन ड्राइव के जरिये बांटे जाते रहे। निस्संदेह इस मामले के खुलासे की टाइमिंग के राजनीतिक निहितार्थ हैं।

 

परंतु, भाजपा के एक नेता ने एक साल पहले भाजपा नेतृत्व को पत्र लिखकर चेताया था कि प्रज्वल के कुकृत्यों की पेन ड्राइव कांग्रेस के पास पहुंच चुकी है। जिसका उपयोग लोकसभा चुनाव में हथियार के रूप में किया जाएगा। सवाल भाजपा नेतृत्व पर भी है कि हकीकत से वाकिफ होने के बावजूद क्यों प्रज्वल रेवन्ना को गठबंधन के सहयोगी कोटे से टिकट दिया गया? जब राज्य में कांग्रेस की सरकार है तो एक साल पहले जानकारी होने के बावजूद प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? दरअसल, एक समुदाय विशेष में एचडी देवगौड़ा परिवार की पकड़ होने की वजह से भाजपा व कांग्रेस कड़ी कार्रवाई से बचते रहे हैं।

 

इस सेक्स स्कैंडल के उजागर होने और उसके बाद तमाम सफाई के बावजूद जनता दल सेक्यूलर और उसकी सहयोगी भाजपा को राहत मिलना मुश्किल है। वजह है कि आरोप गंभीर और महिलाओं की अस्मिता से जुड़े हैं।

 

कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्य व सांसद ने जो कुकृत्य किये हैं, उससे भारतीय लोकतंत्र शर्मसार हुआ है। विडंबना देखिये कि जो बड़े राजनेता महिलाओं की प्रशंसा में कसीदे पढ़ने से नहीं थकते हैं, वे व्यावहारिक जीवन में दुराचार की पराकाष्ठा देखकर भी आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं। वे इस शर्मनाक कांड की व्याख्या अपनी सुविधा के अनुसार कर रहे हैं।

 

एक पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार का सांसद अपने घर में काम करने वाली महिलाओं तक को न बख्शे, इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है? आरोप है कि प्रज्वल रेवन्ना ने किसी भी आयु और वर्ग की महिला को नहीं बख्शा। इतना ही नहीं, सरकारी महिला अधिकारियों, कर्मचारियों व पार्टी कार्यकर्ताओं तक को हवस का शिकार बनाकर वीडियो बनाने तक के गंभीर आरोप प्रज्वल पर लगे। वीडियो इसलिये बनाये ताकि शोषण के बाद लोकलाज के भय से उन्हें चुप रखा जा सके।

 

आरोपों के निशाने पर पूर्व मंत्री व प्रज्वल के पिता एचडी रेवन्ना भी हैं। हालांकि, प्रज्वल का आरोप है कि एआई के जरिये उसके फोटों से छेड़छाड़ करके वीडियो बनाए गए हैं। लेकिन यदि वह निर्दोष है तो फिर उसे चुपके से जर्मनी भागने की क्या जरूरत पड़ी? बिना सरकारों की मिलीभगत के क्या वह जर्मनी भाग सकता था? क्या यह जन विश्वास सही है कि घोर विरोधी राजनीतिक दल व्यावहारिक जीवन में एक दूसरे के बड़े नेताओं को बचाने के लिये कवच का काम करते हैं?

 

सवाल स्वाभाविक है कि जनता दल (एस) ने अश्लील वीडियो मामले में प्रज्वल को पार्टी से निलंबित करने में इतनी देर क्यों की? निस्संदेह, ऐसे यौन कुंठित जनप्रतिनिधि का चुना जाना लोकतंत्र के दामन पर एक दाग सरीखा है। प्रज्वल के जैसे विकृतिपूर्ण वीडियो सार्वजनिक हुए हैं उसे देखते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की जरूरत है। बहरहाल, अब कर्नाटक सरकार द्वारा मामले में एसआईटी के गठन और प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ बलात्कार व अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बाद उम्मीद जगी है कि दोषी को दंडित करके पीड़िताओं को न्याय मिल सकेगा।

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