16 साल से मिल रही हार; बूथ स्तर पर दलबदल, कांग्रेस समर्थित सरपंच टारगेट पर
मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीट जीतने के लिए बीजेपी ने हर बूथ पर 370 वोट बढ़ाने का टारगेट तय किया है। पार्टी की चिंता प्रदेश के वे 7 हजार 526 पोलिंग बूथ हैं, जहां बीजेपी पिछले 16 साल से लगातार हार रही है। इन बूथ के लिए पार्टी ने खास रणनीति बनाई है। इसमें कांग्रेस समर्थित सरपंच से लेकर कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं को टारगेट पर रखा गया है कि इन्हें भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए राजी किया जाए।
पार्टी ने विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद से ही लोकसभा की सभी 29 सीटें जीतने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया था। इसी के तहत प्रदेश की सभी बूथ पर हुई वोटिंग के ट्रेंड पर रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट में उन मतदान केंद्रों की विधानसभावार सूची भी है जहां 2008 में हुए परिसीमन के बाद से पार्टी बढ़त नहीं ले पाई।
इनमें सीएम डॉ. मोहन यादव की उज्जैन दक्षिण सीट के 16 बूथ, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की बुधनी के 6, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के 23 और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की दिमनी सीट के 44 बूथ भी शामिल हैं। बीजेपी के प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी का कहना है कि ऐसे बूथों पर माइक्रो लेवल पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई है। हर बूथ पर अर्ध पन्ना प्रभारी बनाए गए हैं।
इसके अलावा पार्टी ने उन सीटों का भी आकलन किया है जहां कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले नेताओं के प्रभाव का फायदा उठा सकती है। ऐसी 8 लोकसभा सीटें हैं।


आदिवासी बहुल 4 सीटों पर बीजेपी की हालत खराब
4 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां आधे से ज्यादा बूथों पर बीजेपी पिछले 4 – 5 चुनावों से हारते आ रही है। बीजेपी सूत्रों की मानें तो ये बूथ ऐसे हैं जहां 2008 के परिसीमन के बाद बीजेपी जीत ही नहीं सकी।
लखनादौन: सिवनी जिले की लखनादौन विधानसभा में करीब 396 मतदान केंद्र हैं। इस विधानसभा में 169 पोलिंग बूथ ऐसे हैं, जहां बीजेपी पिछले 5 चुनावों में कभी नहीं जीत सकी। लखनादौन विधानसभा में 2013 से लगातार कांग्रेस के योगेंद्र सिंह बाबा विधायक चुने जा रहे हैं।
कुक्षी: धार जिले की कुक्षी विधानसभा में करीब 270 मतदान केंद्र हैं। इस विधानसभा में 160 पोलिंग बूथ ऐसे हैं जो बीजेपी पिछले 4 – 5 चुनावों में कभी नहीं जीत सकी। इस सीट पर कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह हनी बघेल 2013 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं।
डिंडोरी: विधानसभा क्षेत्र में 300 से ज्यादा मतदान केन्द्र हैं। बीजेपी पिछले 4 – 5 चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र के 144 बूथ नहीं जीत सकी। इस सीट पर कांग्रेस के ओमकार सिंह मरकाम लगातार चार बार से चुनाव जीत रहे हैं।

अब जानिए बीजेपी के दिग्गज नेताओं के क्षेत्र में क्या स्थिति…
नरेन्द्र सिंह तोमर की सीट पर एक चौथाई बूथ नहीं जीत पा रही बीजेपी
मुरैना जिले की दिमनी सीट से बीजेपी के सीनियर लीडर और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर विधायक हैं। दिमनी विधानसभा क्षेत्र में 44 मतदान केंद्र ऐसे हैं जो परिसीमन के बाद भाजपा नहीं जीत सकी। दिमनी विधानसभा क्षेत्र में 262 मतदान केंद्र हैं इनमें से करीब एक चौथाई बूथ भाजपा जीत नहीं सकी है।
महेंद्र हर्डिया 5 बार से विधायक, फिर भी 76 बूथ पर हो रही हार
इंदौर की विधानसभा सीट नंबर 5 ऐसी सीट है, जहां से बीजेपी के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री महेन्द्र हार्डिया लगातार 5 बार से विधायक चुने जा रहे हैं। यहां 341 मतदान केंद्र हैं। इनमें से 76 पोलिंग बूथ ऐसे हैं, जहां बीजेपी नहीं जीत पा रही है। यानी करीब 22 फीसदी मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां परिसीमन के बाद बीजेपी कभी नहीं जीत पाई।

करण वर्मा 7 बार के विधायक, फिर भी 35 बूथों पर हार
मप्र सरकार के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा सीहोर जिले की इछावर सीट से 7वीं बार के विधायक हैं। इछावर विधानसभा में करीब 275 मतदान केंद्र हैं। 2008 में हुए परिसीमन के बाद बीजेपी इस विधानसभा क्षेत्र के 35 पोलिंग बूथों पर कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी।
MSME मंत्री चैतन्य काश्यप के क्षेत्र में 22 बूथ नहीं जीत सकी बीजेपी
मप्र सरकार के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप, रतलाम सिटी से तीसरी बार के विधायक हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में 259 मतदान केंद्र हैं। इनमें से 22 पोलिंग बूथों पर बीजेपी चुनाव नहीं जीत पाई।

पर्यटन मंत्री के क्षेत्र में 32 बूथों पर हार
मप्र के पर्यटन एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेन्द्र लोधी दमोह जिले की जबेरा सीट से दूसरी बार के विधायक हैं। जबेरा विधानसभा क्षेत्र में 295 मतदान केंद्र हैं। इनमें से 32 बूथ ऐसे हैं, जहां बीजेपी लगातार चुनाव हार रही है।
पथरिया के 16 बूथ आज तक नहीं जीती बीजेपी
मप्र सरकार के पशुपालन मंत्री लखन पटेल दमोह जिले की पथरिया सीट से विधायक हैं। इस विधानसभा में 286 मतदान केंद्र आते हैं। पथरिया विधानसभा के 16 पोलिंग बूथ ऐसे हैं जहां बीजेपी पिछले 7 चुनाव में कभी नहीं जीत सकी।

कृषि मंत्री के क्षेत्र में 24 बूथों पर लगातार मिल रही हार
कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना के विधानसभा क्षेत्र सुमावली में 295 मतदान केंद्र हैं। यहां 24 पोलिंग बूथ ऐसे हैं जो बीजेपी 2008 के परिसीमन के बाद से जीत नहीं पा रही है। ऐंदल सिंह इस सीट से 2 बार बसपा और 2 बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए हैं। 2023 में वे पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने हैं।
मेहगांव में 14 बूथ बीजेपी के लिए चुनौती
भिंड जिले की मेहगांव विधानसभा से मप्र के नवकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री राकेश शुक्ला विधायक हैं। इस विधानसभा में 320 मतदान केंद्र हैं। मेहगांव विधानसभा में 14 बूथ ऐसे हैं, जहां बीजेपी नहीं जीत सकी।

नरोत्तम के गढ़ में 23 बूथ नहीं जीत सकी बीजेपी
एमपी बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की दतिया सीट पर 257 मतदान केंद्र हैं। इनमें से 23 बूथ बीजेपी आज तक जीत नहीं सकी है। पूर्व गृह मंत्री दतिया से 3 बार विधायक रहे हैं।
खुरई बीजेपी का गढ़, मगर 8 बूथ चुनौती
एमपी बीजेपी के सीनियर ओबीसी लीडर और पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह सागर जिले की खुरई सीट से तीसरी बार विधायक बने हैं। 2008 में परिसीमन के पहले यह सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व थी। परिसीमन होने के बाद हुए चुनावों में आठ मतदान केन्द्र ऐसे हैं जो कभी बीजेपी नहीं जीत सकी।

बुधनी- 6 बूथ, शिवराज सिंह चौहान
2005 से 2019 तक मप्र के चार बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा से छठवीं बार के विधायक हैं। बुधनी विधानसभा में 363 मतदान केंद्र आते हैं। इस विधानसभा क्षेत्र के 6 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां बीजेपी पिछले 7 चुनावों में नहीं जीत सकी।
इन 4 विधानसभा क्षेत्रों के भी 100 से ज्यादा बूथ हारते रही बीजेपी
छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा के 123, बालाघाट जिले की बैहर के 104, अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ के 103 और भोपाल जिले की उत्तर विधानसभा क्षेत्र के 100 बूथ ऐसे हैं जहां बीजेपी नहीं जीत सकी।

यहां दलबदलुओं के प्रभाव से जीत की उम्मीद
- भोपाल-रायसेन : पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, कैलाश मिश्रा, सुनील सूद समेत बाकी नेताओं के भाजपा में आने से नरेला-उत्तर विधानसभा में स्थित बूथों की स्थिति बदलेगी।
- रीवा-सतना : रीवा से कांग्रेस के पूर्व सांसद देवराज सिंह, नागौद से पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह, पूर्व महापौर रेणु शाह, पूर्व जिपं अध्यक्ष बबीता साकेत, सतना से पूर्व नगर निगम अध्यक्ष सुधीर सिंह तोमर, सतना की पूर्व महापौर एवं नगर निगम अध्यक्ष पुष्कर सिंह समेत बड़े नेता शामिल हुए। इनका लाभ दोनों सीटों पर मिलने की उम्मीद है।
- जबलपुर : महापौर जगत बहादुर सिंह, पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी, शशांक शेखर सिंह, पाटन से पूर्व बीएसपी विधानसभा प्रत्याशी राममनोहर तिवारी के साथ स्थानीय कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
- इंदौर : संजय शुक्ला, विशाल पटेल जैसे नेता भाजपा में आ चुके हैं। इनका लाभ होगा।
- सागर : पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे, पारुल साहू व अन्य का लाभ खुरई और सुरखी में मिलने की उम्मीद।
- धार : पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का लाभ मिलने की उम्मीद है।

अब जानिए हारे हुए बूथों को जीतने के लिए बीजेपी की क्या है रणनीति
बीजेपी ने मतदाता सूची के एक पन्ने के 30 वोटर्स पर एक अर्द्ध पन्ना प्रभारी बनाया है। इसके साथ ही पूरी पन्ना समिति बनाई है। औसतन एक बूथ पर करीब एक हजार मतदाता होते हैं। एक हजार वोटर की मतदाता सूची में 33 पेज होते हैं। 2 से 3 सदस्यों को मिलाकर पन्ना समिति बनाई गई है। पन्ना समिति ने वोटर्स का 3 प्रकार के वर्गीकरण किया है।
- पहला- बीजेपी का वोटर
- दूसरा- अन्य दलों के वोटर
- तीसरा- फ्लोटिंग वोटर
अब जानिए कैसे काम कर रहा बीजेपी संगठन
बीजेपी की सबसे शुरुआती इकाई है अर्द्ध पन्ना प्रभारी। इसके ऊपर पन्ना समिति बनाई गई है। इस पन्ना समिति के सदस्यों में से 11 लोग बूथ समिति में लिए जाते हैं। 5 से 6 बूथों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनाया है। 10 शक्ति केंद्र मिलाकर एक मंडल बनाया गया है। मंडल के ऊपर जिला, संभाग और प्रदेश की टीम है।

जिस जाति के वोटर ज्यादा उसी के नेताओं की शक्ति केंद्र पर तैनाती
बीजेपी ने बूथ पर पूरा फोकस कर रखा है। ऐसे में हर बूथ और शक्ति केंद्र पर जाति के हिसाब से वोटर्स का डेटा तैयार किया गया है। जिस शक्ति केंद्र में जिस जाति के वोटर्स की संख्या ज्यादा है, उस जाति के मंत्री, विधायक, सांसद, प्रदेश पदाधिकारी, दर्जा प्राप्त मंत्री और पूर्व मंत्रियों को भेजा जा रहा है। हर नेता अपनी जाति के प्रभावशाली वोटर्स के बीच जाकर बैठकें कर रहे हैं, ताकि बीजेपी का वोट शेयर बढ़ाया जा सके।
बूथ पर 370 वोट बढ़ाने की रणनीति
मप्र की 29 लोकसभा सीटों में से 28 बीजेपी के कब्जे में हैं। कांग्रेस के कब्जे वाली एकमात्र छिंदवाड़ा सीट को जीतने के लिए बीजेपी पूरी ताकत लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर बूथ पर 370 वोट बढ़ाने के टारगेट पर एमपी बीजेपी माइक्रो लेवल की प्लानिंग की है। बूथों को लेकर 2 तरह की रणनीति है।
पहला: जो बूथ बीजेपी जीती है, वहां मतदान बढ़ाने के लिए वोटर्स की ट्रैकिंग करना और उन्हें बीजेपी के पक्ष मतदान के लिए प्रेरित करना।
दूसरा: जिन बूथ पर हार मिली है, वहां बाकी दलों के समर्थक वोटर्स को संगठित करना। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों की सूची लेकर उन्हें बताना कि किस योजना से आपके परिवार में क्या फायदा हुआ है।
