विश्व बाजार में भारत ने फूंका है स्वदेशी का बिगुल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। दुनिया में जारी आर्थिक युद्ध के बीच भारत ने स्वदेशी का बिगुल फूंका है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के नागरिकों, व्यापारियों और उद्यमियों को इस आर्थिक युद्ध में “स्वदेशी ब्रह्मास्त्र’ सौंपा है। आज सभी क्षेत्रों में स्वदेशी को महत्व देते हुए भारत की सनातन संस्कृति और विरासत से विकास के पथ पर देश अग्रसर है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को मिशन बनाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी का अर्थ यह नहीं कि हम दुनिया से अलग हो जाएं। इसका मतलब है कि जो चीज़ हम अपने देश में बना सकते हैं, उसे बाहर से न लाएं और अपने देश में बनी वस्तुओं का ही उपयोग करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मोतीलाल विज्ञान आदर्श महाविद्यालय प्रांगण में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेला परिसर में स्थापित प्रभु श्रीराम की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर श्रीराम स्तुति की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अंगवस्त्रम एवं ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिकृति भेंटकर आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री जी ने लघु उद्यमियों द्वारा लगाए विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया एवं स्वदेशी उत्पादों की जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी, स्वामी दयानंद, लाला लाजपत राय एवं बाल गंगाधर तिलक जैसे अनेक महापुरुषों ने देशवासियों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाते हुए आजादी की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। यह स्वदेशी की ही ताकत थी कि बंगाल विभाजन के विरोध में बंग-भंग आंदोलन प्रारंभ हुआ और अंग्रेजों को झुकना पड़ा था। वर्तमान समय में एक देश के नेता दुनिया को टैरिफ की धमकी देते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी का संकल्प अडिग है। भारत किसी के सामने नहीं झुकेगा। ऐसे समय में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल से पड़ोसी दुश्मन देश को चारों खाने चित कर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज दुनिया को भारत में बड़ा बाजार दिखाई दे रहा है। वे अपनी कमाई के लिए उत्पादों को भारत लाना चाहते हैं। लेकिन हम अपने स्वदेशी के भाव से नई तकनीक अपनाते हुए खेती को भी संरक्षित कर रहे हैं और विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ा रहे हैं। इस मेले में उत्तरप्रदेश भदौही के व्यापारी तक अपने कालीन बेचने यहां आए हैं।

स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय मेला प्रमुख श्री साकेत राठौर ने कहा कि स्वदेशी मेला कोई आम मेला नहीं है। हमें स्वदेशी से एक अगल पहचान मिलती है। स्वदेशी जब समाज के साथ जुड़ता है तो वह आंदोलन में परिवर्तित होता है। स्वदेशी वस्तुओं में हमारी मिट्टी की खुशबू होती है। भारत आर्थिक स्थिति में चौथे पायदान पर है। अगर हमें अमेरिका, चीन और जापान को पीछे छोड़ना है तो स्वदेशी के भाव को अपनाना होगा। वर्षभर में देश में 150 स्वदेशी मेले लगाए जाएंगे।

विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि देशभर में वन्देमातरम के आयोजन के दिन स्वदेशी मेले का आयोजन एक ऐतिहासिक क्षण है। हमें स्वयं स्वदेशी अपनाते हुए साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

स्वदेशी मेला संयोजक एवं भोपाल के व्यापारी श्री सतीश विश्वकर्मा ने कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन किया। स्वदेशी मेले की शुभारंभ अवसर पर श्री रमणवीर सिंह अरोड़ा, श्री सुधीर दाते एवं श्री सुशील अग्रवाल सहित स्वदेशी आंदोलन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित थे।

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