संपति का सर्वे-विरासत टेक्स :कांग्रेस कटघरे में ( श्याम चौरासिया )
कांग्रेस के कोहिनूर राहुल गांधी के हर परिवार का आर्थिक सर्वेक्षण कराए जाने और कुछ दिग्गज कांग्रेसियो के विरासत टेक्स वसूलने की पैरवी ने आम मतदाताओं को झंझोर दिया। कर्नाटक,केरल में गैर सनातनियो को आरक्षण दिए जाने और उन्हें पिछड़े वर्ग में शामिल किये जाने के फैसले ने भी कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति को बेपर्दा कर दिया। कर्नाटक में कुछ देवालयों ओर कुछ अन्य संपत्तियों को वक्फ बोर्ड की जद में देने से दूसरे सूबो के निवासियों को सकते में डाल दिया।
Pm मोदी,उतर प्रदेश के cm योगी, असम के cm हेमंता सरमा, मप्र के cm मोहन यादव, सहित बीजेपी के अन्य स्टार प्रचारक कांग्रेस की इस दोगली,गैर संवैधानिक तुष्टिकरण के वरदान की खिलाफत में आक्रमक हो चुके है। चुनाव के बाकी 04 चरणों के चुनाव में ये मुद्दा कांग्रेस की गले की हड्डी बन चुका है।
आम मतदाता काफी जागरूक है । वह नही चाहता कि उसकी जीवन भर की गाड़े पसीने की कमाई उसके वारिसों की बजाय सत्ता के जरिये कांग्रेस हथिया ले। ये डर ये आशंका सिर्फ आम जनों को ही नही बल्कि अनेक कांग्रेसियो को भी सता, साल रहा है। इसी डर के प्रताप से कांग्रेस में भगदड़ मची है। इसी डर की वजह से मप्र के 03 कांग्रेसी विधायको ओर हजारो जिम्मेदार कांग्रेसियो ने चलते चुनाव में पाला बदल कांग्रेस की नाक उतार दी। इसी डर से राजस्थान, यूपी, झारखंड,उड़ीसा, छत्तीसगढ सहित अन्य सूबो के कांग्रेसियो में केशरिया धारण करने की होड़ लगी हुई है
दिलचस्प। पाला बदल की चलती सुनामी के दौर में कांग्रेस के कोहिनूर राहुल गांधी, नेत्री प्रियंका वाड्रा, कांग्रेस चीफ खड़गे के रवैये में लेस मात्र अंतर,परिवर्तन नही आया। उनके पास डोलते जहाज का स्थिर करने का समय ही नही है। वे सचेत होने या सम्हलने की बजाय और ताकत से हर परिवार का आर्थिक सर्वेक्षण कराने पर तुले है।
कांग्रेस की इस घातक मिसाइल से जहाँ सनातनी ख़ौफ़ में है। वही गैर सनातनी मौज में है। उसकी वजह पूर्व pm मनमोहन सिंह सहित अन्य दिग्गज कांग्रेस नेताओं की वह वकालत है। जिसमे उन्होंने भारत की संपत्ति पर गैर सनातनियो का पहला अधिकार घोषित कर दिया था। पूर्व pm मन मोहन सिंह के उस बयान का vdo झंझोर रहा है। वोट जिहाद में अंधे हो चुके कांग्रेसियो की कथित कारगुजारियों से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवारों, जमीनी कांग्रेसियों को जबाब देते नही बन रहा है। इस ख़ौफ़ ने उनकी दाल पतली कर रखी है। इसी ख़ौफ़ की वजह से इंदौर, छतरपुर, पूरी के कांग्रेस उम्मीदवारों ने कांग्रेस के टिकिट को ठुकरा दिया। वे नही चाहते सनातनियो की संपत्ति गैर सनातनियो को मिले।
सनातनियो के देवालयों के चढ़ावे से गैर सनातनियो के पालने, खेरातो से नवाजने का भंडाफोड़ होते ही सनातनियो की आंखे खुल गयी। संविधान की आड़ में खिलाए जाने वाले गैर बराबरी, धार्मिक भेदभाव का षड्यंत्र आम भारतीयों को समझ मे आने लगा। यदि आजादी के बाद से लगाम कस दी जाती या पूर्व pm इंद्रा गांधी वक्फ बोर्ड़ को अस्तित्व में न लाती तो सनातनी शायद इतने जागरूक,चेतन्य,सक्रिय,सचेत होकर कांग्रेस की दुरंगी नीतियों पर हमलावर न होते। इसके लिए बीजेपी,संघ नही बल्कि खुद कांग्रेस के भेदभाव भरे कारनामे जिम्मेदसर है। कांग्रेस
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