एक वो आपातकाल था एक ये आपातकाल है …? राजेंद्र सिंह जादौन

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एक वो आपातकाल

भारत में 1975-77 के आपातकाल को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय माना जाता है, जब इंदिरा गांधी की सरकार ने प्रेस की स्वतंत्रता पर कठोर नियंत्रण लगाया, पत्रकारों को जेल में डाला और सेंसरशिप लागू की। हाल के वर्षों में, कुछ आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने वर्तमान भाजपा सरकार पर भी मीडिया की स्वतंत्रता को दबाने और एक “अघोषित आपातकाल” की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है।

1975 में इंदिरा गांधी सरकार ने प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लागू की थी। समाचार पत्रों को सरकार की अनुमति के बिना कुछ भी प्रकाशित करने की अनुमति नहीं थी। भारतीय एक्सप्रेस जैसे अखबारों ने खाली संपादकीय छापकर इसका विरोध किया था।
लगभग 200 पत्रकारों, जिनमें विदेशी संवाददाता भी शामिल थे, गिरफ्तार किया गया था।

आपातकाल में नागरिक स्वतंत्रता निलंबित कर दी गई थी, और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था।

एक ये आपातकाल

भाजपा सरकार और मीडिया
आलोचकों का दावा है कि वर्तमान में मीडिया पर “अघोषित आपातकाल” जैसी स्थिति है, हालांकि यह 1975 के औपचारिक आपातकाल से जो भिन्न है।
गोदी मीडिया शब्द उन मीडिया हाउसेज के लिए इस्तेमाल होता है, जो कथित तौर पर भाजपा सरकार के पक्ष में प्रचार करते हैं। इसमें कई नामी चैनल शामिल हैं, जिन्हें आलोचकों ने सरकार के “मुखपत्र” के रूप में वर्णित किया है।
वही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार पत्रकारों पर दबाव डाल रही है और सच्चाई को दबाने के लिए मीडिया को नियंत्रित कर रही है। साथ ही ये भी दावा किया गया कि असम में एक पत्रकार को सिर्फ सवाल पूछने के लिए हिरासत में लिया गया।

2014 के बाद से, कई मीडिया हाउसेज का स्वामित्व बड़े कॉरपोरेट्स, जैसे मुकेश अंबानी द्वारा, जो सरकार के करीबी माने जाते हैं, अधिग्रहण किया गया है। इससे स्वतंत्र पत्रकारिता पर सवाल उठे हैं।

विपक्षी नेताओं और पत्रकारों ने दावा किया है कि 700 से अधिक पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज किए गए और कई मामलों में पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।
2021 में, किसान आंदोलन की कवरेज के लिए आठ पत्रकारों पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिसे मानवाधिकार संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया था।
2023 में, बीबीसी के दिल्ली कार्यालय पर आयकर विभाग की छापेमारी को कई लोगों ने एक वृत्तचित्र के खिलाफ प्रतिशोध के रूप में देखा, जिसे सरकार ने “प्रोपेगैंडा” करार दिया था।

तो बही आईटी नियम 2021 और 2023 में संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत, सरकार ने डिजिटल मीडिया पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है। 2022 में छह महीनों में 1,122 ट्विटर यूआरएल को ब्लॉक किया गया, जो 2014 की तुलना में काफी अधिक है।
2023 में प्रस्तावित डिजिटल इंडिया एक्ट और अन्य नियमों को प्रेस स्वतंत्रता पर और अंकुश के रूप में देखा जा सकता है ।

आज के समय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने स्वतंत्र पत्रकारिता को बढ़ावा दिया है।
हालांकि, सरकार ने सोशल मीडिया सामग्री को हटाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया है, जैसे कि बीबीसी के वृत्तचित्र के लिंक को ब्लॉक करना।
अब आप इसे यही कह सकते है कि एक वो आपातकाल था एक ये आपातकाल है …? क्योकि दोनों ही मामलों में सरकार पर प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने और विपक्षी आवाजों को चुप कराने का आरोप है।

पत्रकारों और आलोचकों की गिरफ्तारी और सेंसरशिप के उदाहरण सामने आए हैं।

1975 में औपचारिक आपातकाल घोषित किया गया था, जिसमें संवैधानिक अधिकार निलंबित थे। वर्तमान में कोई औपचारिक आपातकाल नहीं है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि अनौपचारिक रूप से प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है।
आज की स्थिति में, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने प्रेस को कुछ हद तक स्वतंत्रता दी है, जो 1975 में संभव नहीं था।
क्या यह “मीडिया का आपातकाल” है?
हां: विपक्ष और कुछ पत्रकारों का मानना है कि सरकार का मीडिया पर नियंत्रण, पत्रकारों पर मुकदमे, और कॉरपोरेट्स के माध्यम से मीडिया हाउसेज का अधिग्रहण 1975 जैसी स्थिति की याद दिलाता है।
वही भाजपा का कहना है कि पत्रकार स्वतंत्र रूप से लिख और बोल रहे हैं, और कुछ मामलों में कार्रवाई “फर्जी खबरों” और हिंसा भड़काने की आशंका के कारण की गई है। इसके अलावा, आज की विविध और सक्रिय सोशल मीडिया की मौजूदगी 1975 जैसी पूर्ण सेंसरशिप को मुश्किल बनाती है।
हालांकि वर्तमान स्थिति को 1975 के आपातकाल के समान मानना अतिशयोक्ति हो सकता है, क्योंकि आज का मीडिया परिदृश्य अधिक जटिल और डिजिटल है, फिर भी प्रेस की स्वतंत्रता पर दबाव के कई उदाहरण मौजूद हैं। पत्रकारों पर मुकदमे, डिजिटल सामग्री पर नियंत्रण, और सरकार समर्थक मीडिया हाउसेज का वर्चस्व चिंता का विषय है। दूसरी ओर, स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया ने सरकार के नियंत्रण को चुनौती दी है। यह स्थिति एक “अघोषित आपातकाल” की तरह हो सकती है, लेकिन इसकी तीव्रता और प्रकृति 1975 से भिन्न है। इस लिए इसे अघोषित आपातकाल कहा जा सकता है .?

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