आंधी से चलती वंदे भारत पर झुका लोहे का स्ट्रक्चर

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देश में सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेनों में से एक वंदे भारत एक्सप्रेस भोपाल में बड़े हादसे का शिकार होने से बच गई। भोपाल से करीब 30 किलोमीटर दूर तेज स्पीड से जा रही वंदे भारत ट्रेन पर अचानक कई टन वजनी लोहे का स्ट्रक्चर झुक गया। कुछ सरिए ट्रेन की विंडो से रगड़ खा गए। जिसके बाद इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोका गया। डेढ़ घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ट्रेन आगे बढ़ सकी।

दैनिक भास्कर उस जगह पहुंचा, जहां ये घटना हुई। पता लगाया कि आखिर घटना कैसे हुई? यदि ट्रेन की स्पीड 130 किमी प्रतिघंटा तक रहती तो कितना बड़ा हादसा हो जाता।

सबसे पहले जानिए, क्या है मामला? बुधवार को दोपहर के 3.30 बजे थे। वंदे भारत एक्सप्रेस भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) से आगे बढ़ी। कुछ दूर जाकर ट्रेन की स्पीड बढ़ गई। जैसे ही ट्रेन मंडीदीप क्रॉस हुई, तेज हवाएं चलने लगी। ट्रेन 4 से 5 किलोमीटर आगे पहुंची ही थी कि कोच C-3 से C-7 तक सरिए से रगड़ते हुए निकले। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी रोकी। ब्रेक लगने से यात्री डर गए।

यात्रियों ने बाहर झांककर देखा तो औबेदुल्लागंज रेलवे स्टेशन से पहले रेलवे की गति शक्ति परियोजना के तहत निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के सामने ट्रेन रुकी हुई थी। निर्माणाधीन पुल के सरिए तेज आंधी के कारण तिरछे होकर ट्रैक की ओर मुड़ गए थे।

तस्वीरों में देखिए पूरी घटना…

भोपाल से 30 किलोमीटर दूर औबदुल्लागंज रेलवे स्टेशन से पहले लोहे के स्ट्रक्चर के पास खड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस।
भोपाल से 30 किलोमीटर दूर औबदुल्लागंज रेलवे स्टेशन से पहले लोहे के स्ट्रक्चर के पास खड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस।
लोहे का स्ट्रक्चर कई टन वजनी था। इससे यात्री दहशत में आ गए।
लोहे का स्ट्रक्चर कई टन वजनी था। इससे यात्री दहशत में आ गए।
गैस कटर की मदद से सरियों को काटा गया।
गैस कटर की मदद से सरियों को काटा गया।
जिस समय हादसा हुआ, उस समय करीब 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही थी आंधी।
जिस समय हादसा हुआ, उस समय करीब 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही थी आंधी।

ट्रेन की खिड़कियों के कांच टूटे, दहशत में आ गए यात्री इस हादसे में यात्रियों को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ट्रेन की खिड़कियों के कांच जरूर टूट गए। ट्रेन में सवार यात्रियों ने कुछ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किए। जिसमें बताया जा रहा है कि लोहे की छड़ ट्रेन के कांच फोड़कर अंदर तक आ गई है।

रेलवे की टीम ने गैस कटर की मदद से लोहे के सरियों को काटा। 12mm के सरिये कई टन वजनी थी। इस कारण डेढ़ घंटा बीत गया। जब सब क्लियर हुआ, तब ट्रेन आगे बढ़ी। इस घटना के कारण भोपाल से इटारसी जाने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस, स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, पंजाब मेल समेत कुछ ट्रेनें एक से डेढ़ घंटे लेट हो गई।

ग्राफिक्स से समझिए कैसे हुआ हादसा
ग्राफिक्स से समझिए कैसे हुआ हादसा

दैनिक भास्कर ने जाना, कैसे हुई घटना? मामला वंदे भारत एक्सप्रेस से जुड़ा था। इसलिए दैनिक भास्कर की टीम बरसते पानी में मौके पर पहुंची। मंडीदीप से कुछ दूर होशंगाबाद रोड के पास ब्रिज का निर्माण हो रहा है। मौके पर रेलवे के आला अफसर तैनात थे, लेकिन कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए। भास्कर ने प्रत्यक्षदर्शियों से बात की। तब हादसे की पूरी कहानी सामने आई।

जिस जगह ब्रिज के पिलर का निर्माण हो रहा है, वह रेलवे ट्रैक से कुछ फीट दूर ही है। पिलर के लिए कई टन वजनी लोहे के सरियों का स्ट्रक्चर खड़ा किया गया है। दो-तीन दिन बाद ही सीमेंट भरी जानी थी। इसके लिए सीमेंट की बोरियों से लदा ट्रॉला भी मौके पहुंचा था।

80Km प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने लगी आंधी इसी दौरान करीब 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चलने लगी। इस वजह से मंडीदीप से औबदुल्लागंज की ओर जाने वाले रास्ते पर 10 से ज्यादा बिजली के पोल गिर गए थे। इससे 200 मीटर दूर ही ब्रिज का निर्माण हो रहा था। आंधी की वजह से सीमेंट की बोरियों के ऊपर ढंकी त्रिपाल उड़कर रेलवे की ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) रेलवे लाइन पर चली गई। ओएचई लाइन से ही ट्रेन को बिजली की सप्लाई होती है।

त्रिपाल की वजह से लाइन में फॉल्ट हो गया। तभी वहां से वंदे भारत एक्सप्रेस गुजर रही थी। ट्रेन की स्पीड कम हो गई। तभी निर्माणाधीन ब्रिज के सरिये कोच से रगड़ खाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है, अच्छी बात ये रही कि ट्रेन की रफ्तार ज्यादा नहीं थी। इस कारण इमरजेंसी ब्रेक भी तुरंत लगा दिए गए। यदि ट्रेन अपनी फुल स्पीड में होती तो सरियों की वजह से कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

करीब डेढ़ घंटे खड़ी रहने के बाद ट्रेन आगे की ओर रवाना की गई।
करीब डेढ़ घंटे खड़ी रहने के बाद ट्रेन आगे की ओर रवाना की गई।

यात्री बोले- ऐसा लगा कोच से कुछ टकरा गया घटना के समय वंदे भारत ट्रेन में यात्रा कर रहे अभिनव महापात्रा ने बताया, वे भोपाल से ट्रेन में बैठे थे और जबलपुर जा रहे थे। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से कुछ किलोमीटर आगे बढ़े ही थे कि तेज बारिश शुरू हो गई। विंडो से देखा तो तूफान भी था। तभी ऐसा लगा कि कोच से कुछ टकरा रहा है। जब ट्रेन रुकी तो देखा कि सरिये बहुत पास में थे। इससे पूरे कोच में डर का माहौल हो गया, लेकिन शुक्र है कि बड़ी घटना होने से बच गई। सबकुछ क्लियर होने के बाद ट्रेन आगे बढ़ी।

रेलवे की टीम जांच में जुटी, कुछ भी बोलने को तैयार नहीं घटना के बाद रेलवे के इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। इस दौरान इंजीनियर्स ने कैमरे के सामने मीडिया से बात करने से मना कर दिया।

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