एक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला; मोदी की सभा से 4 सीटों पर बीजेपी मजबूत

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‘मैं कई जगह घूमा। जहां भी गया, वहां लोगों के प्रमुख मुद्दे महंगाई-बेरोजगारी हैं। महंगाई गरीबों की कमर तोड़ रही है। जान ले रही है। कोई खुश नहीं है। एक ही आदमी मोदी खुश है। उनका स्लोगन है- सबका साथ, सबका विकास, बाकी लोगों का सत्यानाश।’ – मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष, 21 अप्रैल को सतना में

भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रहा है। कांग्रेस और इंडी अलायंस के लोग सनातन को डेंगू-मलेरिया कहते हैं। भगवान राम की पूजा को पाखंड बताते हैं। – नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, 19 अप्रैल को दमोह में

पीएम मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने जिन सीटों पर प्रचार किया है, वहां दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान है। उनके बयानों से साफ समझ आता है कि दोनों ने अपने-अपने तरीके से नरेटिव सेट करने की कोशिश की है। कांग्रेस ने महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया, तो पीएम मोदी ने सनातन, भगवान राम और पाकिस्तान की बदहाली का। इस बीच 20 अप्रैल को रीवा में बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली भी हो चुकी है।

इससे पहले दैनिक भास्कर ने दूसरे चरण की 6 सीटों के समीकरण 13 अप्रैल को बताए थे। नेताओं की रैली और दौरे के बाद अब ये समीकरण बदले हुए हैं। रीवा में कांटे का मुकाबला था, लेकिन अब कांग्रेस पिछड़ती दिख रही है। कांग्रेस को बसपा से नुकसान की आशंका है।

ऐसे ही सतना में बीएसपी प्रत्याशी नारायण त्रिपाठी को पहले बीजेपी के लिए वोट काटने वाला माना जा रहा था, वे अब सीधे मुकाबले में आ गए हैं। जबकि, होशंगाबाद और दमोह में मोदी की रैली ने भाजपा का काम आसान कर दिया है। खजुराहो में पहले से ही बीजेपी के लिए वॉकओवर की स्थिति है। टीकमगढ़ में भी बीजेपी बढ़त बनाए हुए है।

दूसरे चरण में हवा के रुख को 4 पॉइंट्स में समझिए

  • दमोह में कांग्रेस लोधी वर्सेस ‘लोभी’ का नरेटिव बनाने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष इससे पहले यहां टिकाऊ और बिकाऊ का स्लोगन दे चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी रैली में इन मुद्दों को छोड़कर भारत के अभिमान की बात की है।
  • खजुराहो और टीकमगढ़ में पानी और पलायन जैसे मुद्दे पीछे छूट गए हैं, यहां भी लाभार्थी स्कीम्स और मोदी की गारंटी की ज्यादा बात है।
  • होशंगाबाद में मोदी फैक्टर हावी है, इसलिए 14 अप्रैल को पिपरिया में पीएम मोदी ने सभा लेकर माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।
  • रीवा और सतना में प्रधानमंत्री मोदी न आए हैं, न आने का प्रोग्राम है। वजह ये है कि विधानसभा चुनाव में मोदी यहां गणेश सिंह के लिए वोट मांगने आए थे, लेकिन गणेश हार गए। यहां ब्राह्मणों को साधना बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

अब सिलसिलेवार समझते हैं कि क्या है इन 6 सीटों पर हवा का रुख और कैसे बदले समीकरण। सबसे पहले बात होशंगाबाद सीट की

होशंगाबाद: मोदी की रैली से मजबूत हुआ बीजेपी का माहौल

होशंगाबाद में बीजेपी प्रत्याशी दर्शन सिंह चौधरी पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं। वे किसान मोर्चा से जुड़े रहे हैं। शुरुआत में बीजेपी के भीतर उनके नाम पर सारे नेता सहमत नहीं थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की 14 अप्रैल को हुई रैली के बाद दर्शन के लिए राह आसान दिख रही है।

यहां कांग्रेस उम्मीदवार संजय शर्मा भाजपा की लहर में घिर गए हैं। हिंदुत्व और राम मंदिर के मुद्दे पर जनता बीजेपी के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। पान की दुकान चलाने वाले अनूप पाटिल कहते हैं कि होशंगाबाद बीजेपी का गढ़ रहा है, इसलिए यहां जीत में कोई संशय नहीं है।

गोलू राठौर ऑटो चलाते हैं। कहते हैं कि सरकार किसी की भी आए, रोजगार अच्छा मिलना चाहिए। वे साफ तौर पर ये नहीं बताते कि वोट किसे देंगे? मंजू निगम कहती हैं कि वह मोदी जी को देखकर ही वोट देंगी। मोदी जी महिलाओं के लिए योजनाएं ला रहे हैं तो महिलाएं भी उन्हें आगे बढ़ाएंगी।

रीवा: राजनाथ, शिवराज और मोहन का दौरा, मायावती की रैली

रीवा में पहले मौजूदा बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा और कांग्रेस की नीलम अभय मिश्रा के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा था, लेकिन हफ्ते भर के भीतर यहां के समीकरण तेजी से बदले हैं।

20 अप्रैल को रीवा में बसपा प्रत्याशी अभिषेक के लिए पार्टी सुप्रीमो मायावती की रैली हुई। मायावती ने कांग्रेस-भाजपा दोनों को एक जैसा बताया। उन्होंने कहा कि वह यहां एसटी, एससी, ओबीसी और मुस्लिम वोटर के दम पर चुनाव मैदान में हैं। जाहिर है कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा।

21 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के क्षेत्र सिमरिया में जनसभा ली। यादव इससे पहले रीवा में भी जनसभा ले चुके हैं। मऊगंज में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनसभा हो चुकी है।

भाजपा को जहां भी गड़बड़ रिपोर्ट मिल रही है, वहां वो डैमेज कंट्रोल में जुटी है। यहां दलबदल का दौर अब तक जारी है। 21 अप्रैल को यहां कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष त्रियुगी नारायण शुक्ल ने अपने समर्थकों के साथ सीएम के सामने बीजेपी की सदस्यता ले ली।

कांग्रेस प्रत्याशी नीलम अभय मिश्रा भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि यहां वोटर्स के जेहन में लोकल मुद्दे बने रहें, ताकि सांसद जनार्दन मिश्रा से नाराजगी का फायदा उसे मिले, लेकिन बीजेपी के तमाम नेता यहां पहुंचकर राष्ट्रीय मुद्दों की ही बात कर रहे हैं।

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल जनार्दन मिश्रा के नजदीकी माने जाते हैं। जाहिर है कि उनकी भी साख दांव पर है। कांग्रेस प्रत्याशी के लिए बीते हफ्ते यहां जीतू पटवारी, विवेक तन्खा और अरुण यादव की सभा हो चुकी है। यही वजह है कि वोटर्स भी कह रहे हैं कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों को एक-दूसरे से कमतर मानने को तैयार नहीं है।

सतना: ब्राह्मण वोटों की लामबंदी से त्रिकोणीय मुकाबला, नारायण आगे बढ़े

सतना में चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है। बसपा के नारायण त्रिपाठी के मजबूत होने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। 2 दिन पहले नारायण त्रिपाठी ने एक वीडियो जारी किया है। दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी ने उन्हें बीजेपी की बी टीम कहकर प्रचारित किया था। इस पर नारायण ने पलटवार किया ।

यहां नारायण के मजबूत होने की सबसे अहम वजह ये भी है कि भाजपा के गणेश सिंह और कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा के खिलाफ नाराजगी है। 4 बार सांसद रह चुके गणेश सिंह विधानसभा चुनाव हारने के बाद फिर लोकसभा चुनाव मैदान में हैं। उधर, सिद्धार्थ कुशवाहा 2018 में विधायक चुने गए। फिर मेयर का चुनाव हारे। 2023 में विधायक बने और अब फिर सांसद का चुनाव लड़ने उतर गए।

इसके अलावा जातीय समीकरण भी दोनों प्रत्याशियों के खिलाफ जा रहा है। यहां सवर्ण वोट ही निर्णायक हैं। इस पर स्वाभाविक तौर पर बसपा के नारायण त्रिपाठी दावा जता रहे हैं।

बीजेपी इस समीकरण को भांप चुकी है। यही वजह है कि ब्राह्मण वोटों की लामबंदी के लिए बीजेपी ने 2019 में कांग्रेस की टिकट पर लड़े राजाराम त्रिपाठी को अपना बना लिया है। त्रिपाठी की पहले से सिद्धार्थ कुशवाहा से अनबन चल रही है। कुशवाहा ने कांग्रेस विधायक रहते हुए पिछले लोकसभा चुनाव में त्रिपाठी का समर्थन नहीं किया था। पूर्व महापौर प्रत्याशी मनीष तिवारी ने भी दो दिन पहले भाजपा जॉइन कर ली है।

दमोह: टिकाऊ-बिकाऊ और लोधी-लोभी का स्लोगन बेअसर, बीजेपी आगे

दमोह में बीजेपी उम्मीदवार राहुल लोधी और कांग्रेस उम्मीदवार तरबर सिंह लोधी दोनों कांग्रेस के समय के पुराने दोस्त हैं। दोनों कांग्रेस से विधायक रहे हैं। राहुल लोधी 2020 में बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने दमोह विधानसभा सीट से उप चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद से पार्टी में वे हाशिए पर कहे जा रहे थे। इस चुनाव में जयंत मलैया को एक बार फिर टिकट मिला और वे जीते। उस समय राहुल लोधी ने मलैया के टिकट का विरोध नहीं किया था। अब राहुल लोकसभा के चुनावी मैदान में हैं। जयंत मलैया उनके साथ खड़े हैं।

राहुल के लिए प्रधानमंत्री मोदी यहां जनसभा कर चुके हैं। पीएम मोदी ने यहां स्थानीय मुद्दों पर कोई बात नहीं की। बल्कि, भगवान राम, सनातन की बात करते रहे। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि उसकी हालत बदतर हो चुकी है। लेकिन, भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

उधर, कांग्रेस उम्मीदवार तरबर के लिए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी 2 बार जनसभा कर चुके हैं। पटवारी जनता के बीच टिकाऊ या बिकाऊ का स्लोगन दे रहे हैं। वे जनता से कह रहे हैं कि अब आपको तय करना है कि लोधी को चुनेंगे या लोभी को? नामांकन के दिन तो यहां पटवारी के भाषण के दौरान तरबर फूट-फूटकर रो पड़े थे।

तरबर को यहां बाहरी भी बताया जा रहा है। दरअसल, वे सागर जिले की बंडा विधानसभा सीट के निवासी है। बंडा, दमोह लोकसभा सीट का हिस्सा है। ऐसे में तरबर को सजातीय वोटर्स का सहारा है।

​​​​​​​टीकमगढ़: मौजूदा सांसद से नाराजगी, लेकिन मोदी लहर से बीजेपी भारी

यहां 7 बार के सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार के सामने कांग्रेस से पंकज अहिरवार हैं। पंकज पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। यहां मौजूदा सांसद वीरेंद्र कुमार से लोग नाराज हैं। कहते हैं कि उन्होंने क्षेत्र के लिए कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया है। कांग्रेस प्रत्याशी उन्हें बाहरी बता रहे हैं।

एलआईसी एजेंट लक्ष्मीनारायण बिदुआ कहते हैं कि कांग्रेस का प्रत्याशी भाजपा के सामने बहुत कमजोर है, इसलिए भी यहां भाजपा मजबूत हैं।

ऐसी ही नाराजगी चाय की दुकान चलाने वाले अमर सिंह लोधी की भी है। कहते हैं कि 15 साल में सांसद ने कुछ नहीं किया, इसलिए इस बार कांग्रेस के साथ जाएंगे। लोधी बेरोजगारी का मुद्दा सबसे बड़ा मानते हैं। बताते हैं कि टीकमगढ़ के बेरोजगार दिल्ली, मुंबई भाग रहे हैं। उनके लिए यहां कोई काम नहीं है। टीकमगढ़ में सबसे ज्यादा तालाब हुआ करते थे, लेकिन इस पर कोई काम नहीं हुआ। सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है।

खजुराहो: वीडी शर्मा के सामने न कांग्रेस, न सपा उम्मीदवार

खजुराहो सीट पर अब मुकाबला नीरस हो गया है। यहां सपा प्रत्याशी मीरा यादव का पर्चा रद्द होने के बाद मैदान खाली सा है। सपा और कांग्रेस ने यहां फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार पूर्व आईएएस आरबी प्रजापति को अपना समर्थन दिया है। कांग्रेस और सपा दोनों ही प्रजापति के लिए बहुत ज्यादा ताकत नहीं लगा रहे हैं। खुद वीडी शर्मा भी प्रदेश की दूसरी सीटों पर फोकस किए हुए हैं। वे भी यहां खजुराहो में कम ही समय दे रहे हैं।

इस सीट पर 1999 के चुनाव को छोड़कर 1989 से लेकर अब तक बीजेपी का दबदबा रहा है। यहां राजनगर सीट पर विधानसभा चुनाव के दौरान गोलीकांड में आरोपी बनाए गए कांग्रेस उम्मीदवार विक्रम सिंह नातीराजा अब भी फरार चल रहे हैं। उनके बिना कांग्रेस यहां पहले से ही जूझ रही है।

सपा ने पहले डॉक्टर मनोज यादव को टिकट दिया, लेकिन फिर यादव का टिकट काटकर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया और पूर्व विधायक मीरा यादव को टिकट दे दिया। खजुराहो लोकसभा सीट से आए दिन कांग्रेस पदाधिकारी और कांग्रेस नेता बड़ी संख्या में बीजेपी की सदस्यता जॉइन कर रहे हैं। इससे भी कांग्रेस मुश्किल में है।

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