35 दिन बीते, शिकारियों को नहीं ढूंढ पाया वन विभाग

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भोपाल में काले हिरण के शिकार को करीब 35 दिन बीत चुके हैं। बावजूद वन विभाग शिकारियों को ढूंढ नहीं पाया है। पुराने शिकारी-संदिग्धों से पूछताछ की गई, जबकि जंगल में गश्त भी बढ़ाई गई। फिर भी शिकारी पहुंच से दूर है।

बता दें कि 23 अक्टूबर को भोपाल से 40 किलोमीटर दूर बरखेड़ा सालम में ब्लैक बक यानी काले हिरण का शव मिला था। गर्दन के नीचे शॉटगन की गोली आर-पार हो गई थी। इसका खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ। तब से लेकर अब तक वन विभाग ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। पुराने शिकारियों को भी तलाशा और उनका रिकॉर्ड भी खंगाला गया। ताकि, कड़ी से कड़ी जोड़कर शिकारियों तक पहुंचा जा सके, लेकिन शिकारी हत्थे नहीं चढ़ सके हैं।

इस मामले में डीएफओ लोकप्रिय भारती का कहना

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शिकार के मामले में स्पेशल टीम जांच कर रही है। मुखबिर तंत्र भी मजबूत किया, लेकिन शिकारी पकड़ में नहीं आए हैं।

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काले हिरण का शव 23 अक्टूबर को खेत में पड़ा मिला था। इसके बाद उसे पशु चिकित्सालय लाया गया था।
काले हिरण का शव 23 अक्टूबर को खेत में पड़ा मिला था। इसके बाद उसे पशु चिकित्सालय लाया गया था।

15 से 20 घंटे पुराना था शव भोपाल के बरखेड़ा सालम में काले हिरण का 15 से 20 घंटे पुराना शव एक खेत में पड़ा मिला था। जेल पहाड़ी स्थित पशु चिकित्सालय में डॉ. संगीता धमीजा ने शव का पोस्टमॉर्टम किया था। इसके बाद वन विभाग ने शव का दाह संस्कार किया था।

हिरण की गर्दन के पास गहरा घाव था। इसके अलावा शरीर में कहीं भी चोट के निशान नहीं थे। इसी दिन वन विभाग ने शिकार की पुष्टि करते हुए अज्ञात शिकारी पर केस दर्ज किया था। डॉ. धमीजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद साफ हो गया कि काले हिरण का शिकार गोली मारकर ही किया गया था।

खुले में घूमते हैं काले हिरण, इसलिए आसान शिकार वन विभाग के अफसरों का कहना है कि जिस जगह काले हिरण का शिकार हुआ वह खुला वन क्षेत्र है। आमतौर पर काले हिरण खुले इलाकों में ही विचरण करते हैं। यही वजह है कि शिकारियों को शिकार करने का मौका मिल गया। शिकार के मामले के बाद गश्त बढ़ा दी गई। उन जगहों पर 24 घंटे गश्त की जा रही है, जहां काले हिरणों का मूवमेंट रहता है।

भोपाल के आसपास बड़ी संख्या में काले हिरण

  • भोपाल से सीहोर जुड़ा है। वहीं, कुछ किलोमीटर दूर कालापीपल है। जहां बड़ी संख्या में काले हिरण पाए जाते हैं। ऐसे में उनके शिकार के मामले सामने आते हैं। यही कारण है कि पिछले 8 महीने में ही भोपाल में 4 हिरणों का शिकार हो चुका है।
  • इससे पहले बिशनखेड़ी स्थित भोज वेटलैंड में कुत्तों ने 6 महीने पहले जहां काले हिरण को नोंचा था, उसके 200 मीटर के दायरे में 2 महीने के अंदर 2 और हिरणों का शिकार हुआ था। यानी, इस जगह पर 3 हिरणों का शिकार हो चुका है।

गुना में 5 हिरण मारे, पुलिसवालों की हत्या भी मई 2022 में प्रदेश के गुना में शिकारियों ने अपनी भतीजी की शादी में काले हिरण का गोश्त परोसने के खातिर न सिर्फ 5 हिरण मारे बल्कि तीन पुलिस वालों की भी हत्या कर दी थी। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था।

काले हिरण के बारे में ये भी जानिए…

  • नर काले हिरण का वजन 35 से 45 किलो तक का होता है, जबकि मादा काले हिरण का वजन 30 से 40 किलो होता है। साथ ही ये कद में छोटे होते हैं और इनके सींग भी नहीं होते। इसी कारण नर काले हिरण का शिकार ज्यादा होता है।
  • नर काले हिरण का रंग सर्दी के मौसम में काले से भूरा हो जाता है। जबकि दक्षिण भारत में ऐसे काले हिरण पाए जाते हैं, जो कभी काले नहीं होते, आजीवन भूरे ही रहते हैं।
  • काले हिरण की गति काफी तेज होती है। ये 70 मील प्रति घंटे के हिसाब से दौड़ते हैं। साथ ही इनकी नजर भी काफी तेज होती है।
  • 20 एकड़ इलाके में एक ही काला हिरण होता है, जो बच्चे पैदा करता है। 6 महीने तक वह अपने बच्चे को साथ रखता है और बाद में छोड़ देता है। काला हिरण एक साल में दो बच्चे पैदा करता है।

तीन राज्यों का है राज्य पशु काला हिरण देश के तीन राज्यों का राज्य पशु है। हरियाणा, पंजाब और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों ने इसे राज्य पशु घोषित कर रखा है। हरियाणा में काले हिरण ज्यादातर खुले खेतों में पाए जाते हैं। एक समय में पूरे हरियाणा में काले हिरण पाए जाते थे, लेकिन अब ये महज दक्षिण-पश्चिम हिस्से में ही हैं।

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