राइटहैंड बैट्समैन और टेनिस के नेशनल-प्लेयर रहे हैं मुख्य सचिव

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वह अपनी स्टूटेंड लाइफ में बहुत ब्रिलियंट था, उसे मेरी ज्यादा हेल्प की जरूरत नहीं पड़ती थी। मैं उसे मेथ्स की थ्योरी पढ़ाता था। जो प्रॉब्लम्स साधारण स्टूडेंट एक दिन में सॉल्व करता है, उसे वह डेढ़ घंटे में सॉल्व करता था। यदि वह मैथेमेटिक्स में आगे बढ़ता तो दुनिया का टॉप रिसर्चर होता।

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ये कहना है ग्वालियर के साइंस कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर आरके जोहार का। जोहार अपने जिस स्टूडेंट की बात कर रहे हैं, वो कोई और नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के नए मुख्य सचिव अनुराग जैन हैं। दरअसल, अनुराग जैन ग्वालियर के सेंट्रल स्कूल में पढ़े हैं और प्रोफेसर आरके जोहार उन्हें मैथ्स पढ़ाते थे। जोहार कहते हैं कि अनुराग जब भी ग्वालियर आते हैं, मेरे घर जरूर रुकते हैं।

मुख्य सचिव अनुराग जैन 3 अक्टूबर को पदभार ग्रहण कर सकते हैं। वे टेनिस और क्रिकेट के भी प्लेयर रहे हैं। टेनिस में उन्हें 11 नेशनल मेडल मिल चुके हैं। दैनिक भास्कर ने जैन के करीबियों से बात कर उनकी जिंदगी के अनछुए पहलुओं को जानने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट…

आईआईटी की कोचिंग नहीं ली बल्कि खुद ही तैयारी की नए मुख्य सचिव अनुराग जैन ग्वालियर के रहने वाले हैं। उन्हें मैथ्स पढ़ाने वाले प्रोफेसर आरके जोहार बताते हैं, ‘अनुराग के पिता एजी ऑफिस में जॉइंट डायरेक्टर पद से रिटायर हुए। बड़े भाई दिल्ली में डॉक्टर हैं और बड़ी बहन रेणु जैन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति रह चुकी हैं। वे भी मेरी स्टूडेंट थीं।’

प्रोफेसर जोहार से पूछा कि अनुराग जैन कैसे स्टूडेंट थे तो उन्होंने कहा- अनुराग पढ़ने में बहुत ही ब्रिलियंट थे। मैं उन्हें मैथ्स पढ़ाता था। उन्हें मेरी ज्यादा हेल्प की जरूरत नहीं पड़ती थी। सारी प्रॉब्लम्स खुद ही सॉल्व करते थे। जो समस्या होती, वो मुझसे पूछते थे।

वे कहते हैं कि एक साधारण स्टूडेंट को मैथ्स की जिस प्रॉब्लम को सॉल्व करने में पूरा दिन लग जाता है, उन्हें अनुराग एक या डेढ़ घंटे में सॉल्व कर देते थे। उन्हें आईआईटी में जाना चाहिए, इसके लिए मैंने ही मोटिवेट किया था। उन्होंने आईआईटी की कोई कोचिंग नहीं ली बल्कि खुद ही तैयारी की थी।

प्रोफेसर आरके जोहार (दाएं) प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ (बीच में)। ये तस्वीर उस समय की है, जब प्रोफेसर जोहार उन्हें मैथ्स पढ़ाते थे।
प्रोफेसर आरके जोहार (दाएं) प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ (बीच में)। ये तस्वीर उस समय की है, जब प्रोफेसर जोहार उन्हें मैथ्स पढ़ाते थे।

जितना पढ़ने में तेज, उतने ही खेलकूद में अव्वल प्रोफेसर जोहार बोले- अनुराग पढ़ने में जितने होशियार थे, उतने ही खेलकूद में भी अव्वल थे। सेंट्रल स्कूल की हर टीम का वो हिस्सा रहे। टेबल टेनिस और क्रिकेट तो उनके पसंदीदा गेम थे। उनके टेनिस खेलने की शुरुआत मैंने ही कराई थी। सिविल सर्विस की टीम में वह हमेशा से ही रहे।

उनसे पूछा कि छात्र अक्सर एग्जाम या पढ़ाई के दौरान नर्वस हो जाते हैं तो बतौर स्टूडेंट क्या कभी उनके साथ ऐसा हुआ? प्रोफेसर जोहार बोले- नर्वस होने का सवाल ही नहीं, वह बहुत जॉली नेचर के इंसान हैं। एग्जाम के दौरान उन्हें किसी तरह की घबराहट नहीं होती थी। इसके साथ ही वे एक अच्छे इंसान भी हैं। सभी की मदद करते हैं।

वे जब भी ग्वालियर आते हैं, मुझसे मुलाकात करते हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने ग्वालियर आए थे, तब भी थोड़ी देर के लिए मुझसे मिलने आए थे।

निर्णय तेजी से लेते हैं, मगर जल्दबाजी में नहीं अनुराग जैन के करीबी रहे रिटायर्ड आईएएस आरके जैन कहते हैं, ‘वे टेनिस के नेशनल खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने 11 मेडल भी जीते हैं। टेनिस के अलावा क्रिकेट भी उनका पसंदीदा खेल रहा है। आईआईटी खड़गपुर में जब वे पढ़ते थे तो इंटर स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में अपनी टीम के सबसे धाकड़ बल्लेबाज थे। उन्होंने मध्यप्रदेश की टीम से भी क्रिकेट खेला है।’

आरके जैन कहते हैं कि बचपन से ही अनुराग जैन जीनियस रहे हैं। उनकी याददाश्त बहुत तेज है। खास तौर पर उन्हें आंकड़े बहुत याद रहते हैं। वे प्रशासनिक निर्णय तेजी से लेते हैं, मगर जल्दबाजी में नहीं। जो भी निर्णय लेते हैं, उसके दोनों पक्षों को समझते हैं।

अनुराग जैन वर्ष 2004 में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक के रूप में काम कर चुके हैं। यह फोटो उसी वक्त का है।
अनुराग जैन वर्ष 2004 में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक के रूप में काम कर चुके हैं। यह फोटो उसी वक्त का है।

बेटी को इंजीनियर बनाना चाहते थे, डिजाइनिंग फील्ड चुना अनुराग जैन की पत्नी होम साइंस की प्रोफेसर हैं। उनकी दो बेटियां हैं- अनुमिता और अनन्या। अनुमिता ने एनआईएफडी से डिजाइनिंग की पढ़ाई की है। छोटी बेटी अनन्या ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से आर्ट में ग्रेजुएशन किया है। अनुमिता ने कहा- पापा मुझे भी अपनी तरह इंजीनियर बनाना चाहते थे लेकिन मैंने डिजाइनिंग में अपना करियर बनाया।

अनुराग जैन की बड़ी बहन रेणु जैन भी गणित की प्रोफेसर हैं। वे देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की कुलपति रही हैं। इससे पहले जीवाजी यूनिवर्सिटी में गणित की एचओडी थीं। बहन रेणु जैन ने बताया कि व्यस्तता इतनी ज्यादा है कि भाई से बात ही नहीं हो पाई है।

अनुराग जैन के तीन सबसे अहम आइडिया

1. पीएम जन-धन योजना अनुराग जैन साल 2011 से लेकर 2014 तक केंद्रीय वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे हैं। यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने वित्तीय समावेशन योजना लागू करने में मदद की थी। साल 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनी। योजना का पूरा ड्राफ्ट तैयार था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले से पीएम जन-धन योजना लागू करने का ऐलान किया। 28 अगस्त को ये योजना पूरे देश में लागू हो गई।

खास बात ये है कि योजना लागू होने से एक हफ्ते पहले यानी 23 अगस्त से 29 अगस्त के बीच बैंकों ने 1 करोड़ खाते खोले थे। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली है। इसी के बाद अनुराग जैन लाइम लाइट में आए और उनकी अगली पोस्टिंग पीएमओ में हो गई।

2. पीएम गति शक्ति योजना पीएमओ में संयुक्त सचिव रहने के दौरान उनका काम सभी विभागों से समन्वय बनाने का था। इसी दौरान पीएम गति शक्ति योजना का प्रस्ताव भी तैयार हुआ। इसे तैयार करने में अनुराग जैन की अहम भूमिका रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान का ऐलान किया।

इस योजना का मकसद अलग-अलग मंत्रालयों के बीच गतिरोध को खत्म करना है। इस मास्टर प्लान के तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है। जिसमें रेल और रोडवेज समेत 16 मंत्रालयों को जोड़ा गया है ताकि इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की इंटीग्रेटेड प्लानिंग और इम्प्लीमेन्टेशन हो सके।

इससे जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स को जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) मोड में डाल दिया गया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है।

सोर्स- नेशनल पोर्टल ऑफ इंडिया।
सोर्स- नेशनल पोर्टल ऑफ इंडिया।

3. मप्र लोकसेवा गारंटी अधिनियम 2010 अनुराग जैन जब मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिव थे, तब उन्होंने मप्र लोकसेवा गारंटी कानून की रूपरेखा तैयार की थी। इस कानून के तहत आम लोगों को तय सीमा में 49 विभागों की 561 सेवाएं दी जाती हैं। जिसमें जाति, जन्म, विवाह और मूल निवासी प्रमाण पत्र, पीने के पानी का कनेक्शन, राशन कार्ड, भू-अभिलेखों की प्रतियां, बिजली का कनेक्शन जैसी सेवाएं हैं।

शुरुआत में इस कानून के दायरे में 26 विभागों की सेवाएं थीं। बाद में कई और विभागों की सेवाओं को जोड़ा गया। साल 2020 में इस कानून को 10 साल पूरे हो चुके हैं।

सरकार के मुताबिक, इन 10 सालों में 7 करोड़ लोगों को इस कानून के तहत सेवाएं दी गई हैं। खास बात ये है कि इस कानून में तय समय सीमा में सेवा न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान है। सेवा से संतुष्ट न होने पर लोग अपील भी कर सकते हैं।

सोर्स- मध्यप्रदेश सरकार।
सोर्स- मध्यप्रदेश सरकार।

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