भ्रष्टाचार का अड्डा रहे रोडवेज की मध्यप्रदेश में बहाली..? -श्री प्रकाश दीक्षित

उनके कुछ ताजा फैसलों से तो यही लगता है की मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने-न्यूनतम सरकार,अधिकतम शासन{MINIMUM GOVERNMEMT,MAXIMUM GOVERNANACE} वाला मोदी मंत्र बिसरा दिया है.तभी तो वो दशकों पहले भ्रष्टाचार के कारण बंद राज्य सरकार के सड़क परिवहन निगम को फिर जिन्दा करने का होम वर्क करा रहे हैं.कैपिटल प्रोजेक्ट को भी प्रारंभ कर रहे हैं.याद करें जनधन को करोड़ों का चूना लगाने वाला एयर इंडिया टाटा को सौंपा जा चुका है.देश के बड़े बंदरगाह अडाणी के सुपुर्द हैं. अब तो देश के रेलवे स्टेशनों का प्रबंध भी निजी हाथों में दिया जा रहा है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन का प्रबंधन जाना माना बंसल समूह लम्बे समय से कर रहा है.
प्रदेश और प्रदेश के बाहर बस से यात्रा कराने वाले राज्य परिवहन निगम को अधिकतम भ्रष्ट होने की वजह से बंद किया गया था.जहाँ उसका मुख्यालय था वहां अब भाजपा का प्रदेश कार्यालय लग रहा है क्योंकि इसका वर्तमान भवन सात मंजिला सितारा कार्यालय में तब्दील हो रहा है.निगम को फिर शुरू करने के बारे में दैनिक भास्कर में छपी खबर इसका श्रेय खुद की पुरानी खबर को देकर बता रही है की इसमें हमने ही निगम को फिर शुरू करने का सुझाव दिया था.आज की खबर में इस समय दौड़ रहीं निजी बसों की खामियों को तो खूब गिनाया गया है पर रोडवेज की बसों की कारगुजारियों का कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है.जो खामियां गिनाई गईं हैं वह राज्य की सत्ता संस्कृति की देन हैं जो इन पर आसानी से काबू पा सकती है.
प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मोतीलाल वोरा को तब के मुख्यमंत्री सेठी ने निगम का उपाध्यक्ष और सीताराम जाजू को अध्यक्ष बनाया था.जाहिर है वोरा निगम की रग रग से वाकिफ थे पर उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसके उद्धार में कोई दिलचस्पी नहीं ली.आप प्रदेश की सत्ता के केंद मंत्रालय,सतपुड़ा और विन्ध्याचल भवनों के आसपास चले जाइये जहाँ ढेरों सरकारी वाहन खड़े रहते हैं.कहते हैं की इन वाहनों से निकाला जाने वाला पेट्रोल आदि सस्ते दाम पर मिल जाएगा..! इससे रोडवेज की बसों के भ्रष्टाचार का अंदाजा तो हो ही जाता है.रोडवेज को फिर शुरू करने के मोहन यादव सरकार के फैसले का सख्त विरोध होना चाहिए.
