गैस पीड़ित एक हजार महिलाओं को सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण देकर बनाया जायेगा आत्म-निर्भर

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भोपाल गैस पीड़ितों एवं उनके परिजनों के कल्याण एवं आर्थिक पुनर्वास के लिये राज्य सरकार नये कदम उठा रही है। जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह की पहल पर अब भोपाल गैस पीड़ितों एवं उनके परिवारों के आर्थिक पुनर्वास के लिये ठोस प्रयास किये जा रहे हैं। विभागीय मंत्री डॉ. शाह के निर्देशानुसार भोपाल गैस पीड़ितों व उनके आश्रितों को स्व-रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में गैस राहत विभाग द्वारा एक कारगर प्रस्ताव तैयार किया गया है। जनजातीय कार्य विभाग के अधीन मध्यप्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद् (मेपसेट) के माध्यम से गैस पीड़ितों को स्व-रोजगार का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

संचालक, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास श्री स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिये चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर मंजूरी के लिये राज्य शासन को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि गैस पीड़ितों के आर्थिक पुनर्वास कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव के अनुसार भोपाल गैस पीड़ित एक हजार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिये इन्हें सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इससे वे आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बन सकेंगी। इन महिलाओं को चार साल में चार चरणों में यह प्रशिक्षण दिया जायेगा। हर साल 250 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर इनके आर्थिक स्वावलंबन की राह प्रशस्त की जायेगी। महिला हितग्राहियों का चयन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर किया जायेगा।

गैस पीड़ित महिलाओं को सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण गैस राहत विभाग द्वारा चयनित 2 प्रशिक्षण केन्द्रों में दिया जायेगा। इन दोनों प्रशिक्षण केन्द्रों में एक दिन में 125-125 महिलाओं को 2 शिफ्टों (सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक एवं दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक) सिलाई-बुनाई प्रशिक्षण 6 माह तक दिया जायेगा। प्रशिक्षण के संबंध में जनजातीय कार्य विभाग के अधीन मध्यप्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (मैपसेट) से चर्चा की जा रही है।

गैस पीड़ित एवं उनके आश्रितों को भी स्व-रोजगार से जोड़ेंगे

मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि गैस पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को स्व-रोजगार से जोड़ने के लिये जरूरतमंद व इच्छुक युवाओं को भारी वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इच्छुक युवाओं को जेसीबी, पोकलेन, वायब्रेटर, रोड रोलर आदि भारी वाहन चलाने के लिये प्रशिक्षित कर इन्हें स्वरोजगारी बनाया जायेगा। विभाग द्वारा करीब 100 युवाओं का इस तरह का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रशिक्षण भी मैपसेट के जरिये ही दिलाने का प्रस्ताव है।

उन्होंने बताया कि भोपाल गैस पीड़ितों के ऐसे बच्चे, जो चिकित्सकीय सेवाएं देना चाहते हैं, ऐसे बच्चों को आवश्यकतानुसार 6 माह या एक साल के पैरामेडिकल कोर्सेस का प्रशिक्षण दिलाया जायेगा। इसके लिये भोपाल के शासकीय/अशासकीय कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे गैस पीड़ित और उनके बच्चों को चिन्हित किया जायेगा। इनके प्रशिक्षण का शुल्क गैस राहत विभाग द्वारा वहन किया जायेगा।

संचालक, गैस राहत ने बताया कि प्रशिक्षण देने वाली सभी संस्थाओं की गुणवत्ता मॉनिटरिंग के लिये एक विभागीय कमेटी का गठन भी किया जायेगा। यह कमेटी प्रशिक्षणार्थियों से फीडबैक भी लेगी और आपसी समन्वय का कार्य भी करेगी। उन्होंने बताया कि इन तीनों श्रेणी के प्रशिक्षण के लिये विभागीय मद से आर्थिक पुर्नवास कार्यक्रम मद से राशि व्यय की जायेगी।

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