ज़रा हटके

क्यों करें देहदान या अंगदान प्रो. मनोज कुमार

दो दिन पहले हमारे परिवार के एक बुर्जुग की मृत्यु हो गई. मृत्यु प्रकृति की नियति है, यह होना ही...

काम करते हुए क्या किसी और अखबार या चैनल में आप लिख सकते हैं या नहीं ?

' दूसरे अखबार में लिखने से पहले संपादक से लिखित में स्वीकृति ले लें○○○○○○○○‍○○' एक अखबार या टीवी चैनल में...

“समाज के नए जेनरेशन को संदेश देती हुई सच्ची कहानी”

"समाज के नए जेनरेशन को संदेश देती हुई सच्ची कहानी" "पिता का अधिकार" मैं अपनी पत्नी और बच्चों के साथ...

भगवान ने जब इंसान की रचना की तो उसे दो पोटली दी

भगवान ने जब इंसान की रचना की तो उसे दो पोटली दी। कहा-एक पोटली को आगे की तरफ लटकाना और...

वो ना आए तो भी गुस्सा, वो आए तो भी – प्रो. मनोज कुमार

अरे यार, क्या लिखते हैं? क्या छापते हैं? समझ में नहीं आता कैसी पत्रकारिता कर रहे हैं. सब बिक गए...

फैमिली कोर्ट में एक फैमिली का मिलन हुआ

  ‘‘नमस्कार जज अंकल,’’ मैं ट्रेन में सीट पर सामान रख कर बैठा ही था कि सामने बैठी एक खूबसूरत...


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