शिक्षक की महिमा?
प्रतिदिन विचार राकेश दुबे
05 09 2025
शिक्षक की महिमा?
हनारे देश भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर बहुत से सम्मान समारोह भी किए जाते हैं, लेकिन शिक्षक की महिमा शिक्षक दिवस तक ही सीमित न रह जाए, इसके लिए हमें गहराई से विचार करना होगा, क्योंकि आए दिन टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में देखने और सुनने को मिलता है कि कहीं पर अध्यापक पर हमला किया गया तो कहीं मारपीट की गई जिससे शिक्षक वर्ग ही नहीं, बल्कि पूरा समाज कलंकित होता है। इसलिए विद्यार्थियों को चाहिए कि घिनौनी हरकतें न करें, वे शिक्षक को इस तरह सम्मान दें जिस तरह गुरुकुल में दिया जाता था।
शिक्षक समाज से भी आग्रह है कि वे छात्रों की भावनाओं को पूरी तरह से समझें, ताकि वे कोई भी ऐसी घिनौनी हरकत पर न उतरें। यही नहीं, वे छात्रों को उसी नजर से देखें जिस तरह वे अपने बच्चों को देखते हैं और किसी भी तरह का अपराध करने से बचें। शिक्षक का हर मानव के जीवन में विशेष स्थान होता है। यह शिक्षक ही है, जो किसी मनुष्य को इनसान बनाता है। शिक्षक का स्थान मानव जीवन में भगवान और माता-पिता से भी ऊपर है। यही वजह है कि शिक्षक के बारे में जितना भी कहा जाए, कम ही है।
कबीर दास इस विषय पर कहते हैं, ‘सब धरती कागज करूं, लिखनी सब बनराय/सात समुद्र की मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाय।’ इसका अर्थ यह है कि यदि संपूर्ण पृथ्वी को कागज के रूप में परिवर्तित कर दिया जाए, साथ ही सातों समुद्र की स्याही बना ली जाए और क्यों न सभी जंगलों की कलम भी बना ली जाए, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक की महिमा का संपूर्ण गुणगान किया जा सके, यह मुमकिन नहीं है। भारत में प्राचीन काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा का बहुत अधिक महत्व रहा है। हमारी संस्कृति के निर्माण में गुरु-शिष्य परंपरा का बहुत अधिक योगदान है। मानव के जीवन निर्माण के सभी स्तंभों में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। शिक्षक अपने शिष्य के जीवन के साथ-साथ उसके चरित्र निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कहा जाता है कि इनसान की सबसे पहली गुरु उसकी मां होती है, जो अपने बच्चों को जीवन प्रदान करने के साथ-साथ जीवन के आधार का ज्ञान भी देती है। इसके बाद अन्य शिक्षकों का स्थान होता है। किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करना बहुत ही विशाल और कठिन कार्य है। व्यक्ति को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उसके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करना उसी प्रकार का कार्य है, जैसे कोई कुम्हार मिट्टी से बर्तन बनाने का कार्य करता है। अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाने वाला गुरु ही होता है। समस्त गुरुजनों को नमन।
