क्या मंत्री विश्‍वास सारंग की लगातार खुल रही पोल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्री सारंग से लेंगे इस्तीफा?

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कोरोनाकाल के दौरान मेडिकल उपकरण खरीदी में लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी कर चुके हैं घोटालेबाज मंत्री विश्वास सारंग!

अपने काले कारनामों को छुपाने के लिये न सिर्फ अफसरों पर दबाव बनाया बल्कि मंत्रालय में दो बार आग जैसी घटनाओं को दिया अंजाम

क्या मंत्री विश्‍वास सारंग की लगातार खुल रही पोल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्री सारंग से लेंगे इस्तीफा?

विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
पहले व्यापमं, पटवारी परीक्षा, नर्सिंग कॉलेजों को फर्जी मान्यता से संबंधित घोटाले के बाद अब प्रदेश में फर्जी ढंग से मेडिकल उपकरण खरीदी का एक नया घोटाला उजागर हुआ है। यह मामला भले ही अभी सामने आय़ा है, लेकिन इस पूरे मामले को अमलीजामा पहनाया गया है कोरोना के संकट काल मेँ। कोरोना का वह संकट जब इंसान के जीने-मरने का लगा हुआ था, लोगों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा था। ऑक्सीजन के लिये लोग दर-दर भटक रहे थे। ऐसे संवेदनशील माहौल में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा और घोटालेबाज मंत्री विश्वास सारंग मेडिकल उपकरण की फर्जी खरीदी करने में व्यस्त थे। सूत्रों के अनुसार कोरोना के लगभग दो वर्षों के इस संकटकाल के दौरान प्रदेश में लगभग ढ़ाई हजार करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी खरीदी की गई। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर, वेंटिलेटर, अस्पतालों में उपयोग होने वाले इंजेक्शन, पीपीपी किट, जरूरी दवाईयां, स्टेथोस्कोप, मेडिकल किट सहित अन्य आवश्यक चिकित्सीय उपकरणों में जबरदस्त फर्जीवाड़ा प्रदेश के तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा मो. सुलेमान की जोड़ी ने किया। कोरोना का संकटकाल का समय जब समाप्त हुआ और मेडिकल उपकरण की खरीदी से जुड़े मामले में हुए फर्जीवाड़े की शंका अन्य अफसरों व तत्‍कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हुआ तो दोनों ने मिलकर इस पूरे मामले को समाप्त करने की योजना बनाई और उस योजना के क्रियान्वयन में वे सफल भी हुए।

दो बार मंत्रालय में आग लगना सबसे बड़ा सबूत
सूत्रों का मानना है कि कोरोना के बाद जैसे ही इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने लगी तो घोटालेबाज मंत्री विश्वास सारंग के इशारे पर उन्हीं के गुर्गों ने मंत्रालय के उसी कक्ष में आग की घटना को अंजाम दिया जहां कोरोना काल के दौरान रखी गई फाइलें मौजूद थी। इन फाइलों में हर उस कार्य का पूरा हिसाब था जो उस समय में सारंग के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किया था। दबाव बनाकर फर्जी ढंग से फाइलों पर दस्तखत करवाना, मनचाहे ढंग से बजट की स्वीकृति देना और उस बजट को अपने स्वार्थवश उपयोग करना यह सब सारंग के ही इशारे पर होता था। यही कारण है कि सारंग ने इन सभी फर्जी दस्तावेज को नेस्तानाबूद करने के लिये मंत्रालय में दो बार आगजनी की घटना को अंजाम दिया।

निविदा में गड़बड़ी की मिली थी शिकायत
दरअसल, संयुक्त संचालक कोष व लेखा की टीम को कोरोनाकाल में मेडिकल में दवाओं व उपकरणों की खरीदी से लेकर मरीजों के इलाज में उपयोग की जाने वाले अन्य सामग्री की खरीदी व निविदा आदि में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। जिसे गंभीरता से लेकर जांच की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दस्तावेजों का मिलान किया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि मेडिकल के स्टोर कीपर पर आरोप है कि जिन दवाओं व उपकरणों का स्थानीय स्तर पर क्रय किया गया, उनकी कीमत बाजार के भाव से अधिक दर्शाई गई है। बताया जा रहा है कि क्रय प्रक्रिया में भंडार गृह के निर्धारित नियमों की भी अनदेखी की गई है। इसीलिए गहराई से जांच की जा रही है। एक-एक कागज का मिलान करके गलती पकड़ी जा रही है। जांच पूरी होने पर कोरोनाकाल में हुए घोटाले की परत खुल सकती है। ऐसे में दोषी लपेटे में आ जाएंगे। उन पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। यही वजह है कि सुगबुगाहट के साथ जिनकी दाड़ी में तिनका है, उनके चेहरों का रंग फीका नजर आने लगा है।

जांच में निकली सच्चाई तो फंस सकते हैं कई बड़े अधिकारी
जबलपुर का मेडिकल कालेज अस्पताल जबलपुर संभाग सहित महाकौशल, विंध्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। इसके साथ ही प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों में भी जबलपुर मेडिकल कालेज का नाम है। अगर वैश्विक आपदा के दौरान यहां बड़ी गड़बड़ी हुई है और इसकी जांच में सत्यता पाई जाती है तो एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है, जो कि मेडिकल कालेज के कई बड़े अधिकारियों की गले की फांस बन सकता है। इसे लेकर अब चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। यही नहीं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित हमीदिया अस्पताल, सुल्तानिया अस्पताल, जयप्रकाश अस्पताल में सभी फर्जी और कमजोर मेडिकल उपकरणों की खपत को अंजाम दिया।

आंख में पट्टी बांधे रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री
घोटालेबाज मंत्री विश्वास सारंग द्वारा जिस समय इस घोटाले को अंजाम देने की योजना बनी थी उस समय ही तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस घोटाले के संकेत मिल गये थे। लेकिन मुख्यमंत्री कोरोना संक्रमण को रोकने के उपाय, जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त रहे और उन्होंने आंख पर पट्टी बांधते हुए सारंग द्वारा बताये गये हर एक उपकरण की खरीदी की मौखिक मंजूरी लेते चले गये।

24 करोड़ की फर्जी स्कालरशिप डकार गए थे पैरामेडिकल कालेज, शिवराज सरकार ने वसूले थे सिर्फ 04 करोड़
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों और कॉलेजों की मिलीभगत से वसूली में ढिलाई बरती जा रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त नाराजगी दिखाई। दरअसल, राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में जवाब पेश कर बताया गया था कि घोटाले के 24 करोड़ में से सिर्फ 04 करोड़ की राशि वसूली जा सकी है। दरअसल साल 2010 से 2015 तक प्रदेश के सैकड़ों निजी पैरामेडिकल कॉलेज संचालकों ने फर्जी छात्रों का प्रवेश दिखाकर सरकार से करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति की राशि डकार ली थी। जांच में खुलासा हुआ कि जिन छात्रों के नाम पर राशि ली गई थी, वो कभी एग्जाम में बैठे ही नहीं थे। इसके अतिरिक्त एक ही छात्र के नाम पर कई कॉलेजों में एक ही समय में छात्रवृत्ति निकाली गई थी। घोटाले की जांच के बाद प्रदेश भर में 100 से ज्यादा कॉलेज संचालकों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। पूरे प्रदेश में 93 निजी पैरामेडिकल कॉलेजों से 24 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी। इसमें से केवल 20 कॉलेजों से वसूली हुई। इस पूरे मामले में जांच के बाद प्रदेश भर में 100 से ज्यादा कॉलेज संचालकों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। साथ ही पूरे प्रदेश में निजी पैरामेडीकल कॉलेजों से करोड़ों रुपए की वसूली के आदेश जारी हुए थे, लेकिन अधिकारियों और कॉलेजों की मिलीभगत से करोड़ों रुपयों की वसूली आज तक नहीं हो सकी है।

नर्सिंग घोटाले का मुद्दा उठाने वाले रवि परमार को जान का खतरा, सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र
नर्सिंग घोटाले का मुद्दा उठाने वाले रवि परमार ने अपनी जान का खतरा बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इसे लेकर एक पत्र भी लिखा है। इसके रवि परमार का कहना है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नर्सिंग घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सौंपना चाहता हूं। मैं चाहता हूं शिक्षा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को स्वच्छ बनाया जाना चाहिए। नर्सिंग घोटाले में कई बड़े शिक्षा माफिया और अधिकारी शामिल हैं। रसूखदार लोग मेरे खिलाफ षडयंत्र कर मेरी हत्या और झूठे प्रकरण दर्ज करवा सकते हैं। बता दें कि नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े को लेकर मध्य प्रदेश में जमकर सियासत हो रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले की जांच जिन सीबीआई अधिकारियों को दी गई थी वे ही रिश्वत लेकर कॉलेजों को क्लीन चिट दे रहे थे। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने भी उन कॉलेजों को बेहतर संस्थानों में शामिल कर दिया जिनके संचालक पहले से ही जांच एजेंसी की रिमांड पर हैं।

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