सऊदी में फंसे 4,000 भारतीय, इनमें 300 MP के
मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव के बीच उड़ानें रद्द होने से उमराह करने गए करीब 4 हजार भारतीयों की वापसी अटक गई है। कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज के मुताबिक, इनमें मध्यप्रदेश के 300 से ज्यादा और भोपाल-इंदौर के 120 से अधिक लोग शामिल होने की आशंका है।
अब्बास हफीज ने केंद्र सरकार से यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की है। उनके मुताबिक, यात्रियों को होटल, खाने और स्थानीय परिवहन पर रोजाना प्रति व्यक्ति 4 से 5 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
हफीज बोले- दूसरे देश के रास्ते भारत लौटना पड़ा
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद-दम्माम की उड़ानें 7 नवंबर तक और जेद्दा की उड़ानें 31 अक्टूबर तक रद्द की हैं। हफीज ने बताया कि उनकी फ्लाइट भी रद्द हुई थी। तीन-चार दिन की परेशानी के बाद उन्हें दूसरी एयरलाइन से दूसरे देश के रास्ते भारत लौटना पड़ा।

सिर्फ हेल्पलाइन नंबर जारी करने से नहीं लौटेंगे यात्री
अब्बास हफीज ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से यात्रियों की वापसी के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी करने और वीजा अवधि बढ़ाने में मदद करने से वापसी की समस्या हल नहीं होगी।
सरकार को एयरलाइंस के साथ समन्वय कर वैकल्पिक उड़ानों या विशेष विमानों की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
परिवार के 11 सदस्यों के साथ गए थे अनस, अब फंसे
भोपाल के खानू गांव निवासी अनस खान परिवार के 11 सदस्यों के साथ उमराह करने मदीना गए हैं। उनका 29 अक्टूबर का इंडिगो का रिटर्न टिकट था, लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने के बाद अब तक दूसरी फ्लाइट नहीं मिल सकी है।
अनस के मुताबिक, ट्रैवल एजेंसी अब दूसरे देश के रास्ते भारत लौटने का विकल्प देख रही है। इसके लिए परिवार को पुराने टिकट के अलावा करीब 20 से 22 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।

यात्रियों को निकलने में मुश्किल हो सकती है
हफीज ने बताया- एयरलाइंस सुरक्षा कारणों से उड़ानें संचालित नहीं कर रही हैं, लेकिन वापसी का टिकट ले चुके यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर यात्रियों को निकालने में और मुश्किल हो सकती है।

होटल और खाने की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं
बर्रा ट्रैवल्स के मैनेजर हमजा नदवी ने कहा कि उड़ानें रद्द होने के बाद यात्रियों को होटल और खाने की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं। एयरलाइंस ने टिकट का पूरा रिफंड देने की बात कही, लेकिन दूसरी उड़ानों के टिकट सामान्य किराए से कई गुना महंगे मिल रहे थे।
नदवी के मुताबिक, कई यात्रियों ने कर्ज लेकर, तो कुछ ने अपनी गाड़ी और सामान बेचकर महंगे टिकट खरीदे और भारत लौटने का इंतजाम किया। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने यात्रियों को वापस लाने के लिए कोई चार्टर्ड विमान नहीं भेजा। उन्होंने मांग की कि बाकी यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार जरूरी व्यवस्था करे।

टूर ऑपरेटरों के नुकसान की भरपाई की मांग
नदवी ने कहा- उड़ानें रद्द होने से टूर ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान हुआ। सरकार को यात्रियों के साथ-साथ टूर ऑपरेटरों की परेशानियों पर भी ध्यान देना चाहिए। नुकसान की भरपाई और प्रभावित कारोबारियों की समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठाने की मांग की।
7 नवंबर तक रियाद-दम्माम की उड़ानों पर रोक
मिडिल ईस्ट में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने सऊदी अरब के लिए उड़ानों में बदलाव किया है।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, रियाद और दम्माम की उड़ानें 7 नवंबर 2026 तक निलंबित रहेंगी। जेद्दा आने-जाने वाली उड़ानें 31 अक्टूबर तक रद्द रहेंगी।
एयर इंडिया ने 24 अक्टूबर या उससे पहले की कन्फर्म बुकिंग वाले पात्र यात्रियों को मुफ्त रीबुकिंग और टिकट रद्द कराने पर पूरा रिफंड देने की घोषणा की है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी निर्धारित शर्तों के तहत एक बार मुफ्त रीबुकिंग का विकल्प दिया है।

वैकल्पिक सीट मिलने की गारंटी नहीं
अकासा एयर ने जेद्दा की उड़ानें 10 नवंबर और रियाद की उड़ानें 30 नवंबर तक निलंबित रखने की घोषणा की थी। इससे यात्रियों की वापसी के विकल्प सीमित हो गए हैं। हालांकि, रीबुकिंग या रिफंड की सुविधा मिलने से यात्रियों को तत्काल भारत लौटने के लिए वैकल्पिक सीट मिलने की गारंटी नहीं है।
मक्का-मदीना में सुरक्षा को लेकर चिंता
सऊदी अरब में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने का दावा किया है। मक्का और मदीना में मिसाइलों का मलबा गिरने की आशंका को लेकर चेतावनी जारी किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे हालात में उमराह यात्रियों की सुरक्षित वापसी महत्वपूर्ण हो गई है।

टूर ऑपरेटरों पर भी बढ़ रहा आर्थिक दबाव
उड़ानें रद्द होने से यात्रियों के साथ टूर ऑपरेटरों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। तय कार्यक्रम से अधिक समय तक यात्रियों के रुकने पर होटल, भोजन, स्थानीय परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च बढ़ता है। अब्बास हफीज के मुताबिक, कई यात्रियों का बजट सीमित है और वे अतिरिक्त खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं।

सऊदी अरब और हूतियों की दुश्मनी क्यों है
इस संघर्ष की शुरुआत यमन के गृहयुद्ध से हुई। हूतियों ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।
सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे, लेकिन सऊदी गठबंधन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में कामयाब नहीं हो पाया।
हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनके साथ संघर्ष का असर सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।

