ICU के वो 24 घँटे

जिंदगी चल रही थी जैसी लगभग सबकी ही चलती है, वही पैदाइश ,बचपन, ज्ञान नहीं बल्कि नौकरी / व्यवसाय के लिये स्कूल, कॉलेज जाना, फिर रोजगारोन्मुखी शिक्षा ले के जीवनयापन के लिये नौकरी या व्यवसाय करना I पैसे , ओहदे, इज्जत के पीछे अंधी दौड़, शादी , बच्चे, परिवार, यार रिश्तेदारों के गम और खुशी में सम्मिलित होना, बस इसी सबको जीवन मानकर सुखी होने के दिखावे का कार्यक्रम चल ही रहा था कि एक दिन अचानक सीने में दर्द उठा और मैं सीधा एक बड़े से फाइव स्टार अस्पताल के इमरजेंसी मे खड़ा था, ECG निकाला गया, और मुझे ICU ( कार्डियक केयर यूनिट ) पहुंचा दिया गया, , प्राइवेट कॉलेज के 2 – 3 करोड़ रुपए में बने भृष्टाचारी मां – बाप के प्रशिक्षु डॉक्टर और मध्य प्रदेश के लापता प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज से पढ़ी लिखी सजी – संवरी नर्सों ने मुझे घेर लिया, कई इंजेक्शन घुसेड दिय गये, बॉटल चढ़ा दी गयी, पेशाब में नली और मुंह में मास्क पहना दिया गया, इको, डॉप्लर पता नहीं क्या क्या ?
भविष्य में मेरे साथ क्या होगा ये सोच कर आशंकित हो रहा था कि बाजू में लेटे 50 – 55 साल के मरीज के शरीर से एक आवाज निकली और मेरी निद्रा टूटी तो देखा भाई साहब की की तोंद फटने को तैयार थी, पेट हिचकोले खा ही रहा था कि एक सज्जन 3 – 4 सिल्वर फॉयल की थैली ले आया, थैली के अंदर से शाही पनीर , नान, अचार निकले , भाई साहब मुंह से अंदर ले रहे थे पीछे से बाहर की हवा गंदी कर रहे थे I खैर भाई साहब खा पी के लेट गये, इतने में डॉक्टर राउंड पे आये, खर्राटे मारते मरीज को हिला के जगाया गया, डॉक्टर बोले सांस लेने में तकलीफ कब से है ? 15 दिन से ! 15 दिन से और अब आये हो ? जब रुकने ही लगी तो आपकी याद आई डॉक्टर साहब ! आपके पर्चे में लिखा है कि आपको हार्ट अटेक आया था ? जी डॉक्टर साहब ! 4 महीने तक दवाई खाई फिर छोड़ दी थी ! शराब, सिगरेट ,तंबाकू, गुटखा वगैरह कुछ लेते हो ? मरीज गर्व से बोला सब लेता हूं साहब ! आदमी एक पशु की तरह ही भूख, सेक्स, अपनी प्रजाति को बढ़ाने की जंगली भोग विलास में अपना जीवन व्यतीत कर देता है या कहें बर्बाद कर लेता है I अब मुझे बिस्तर पर लेटा कोई इंसान नही गेंडा नजर आ रहा था !
मेरे पास अस्पताल से खाना आया, दलिया, दाल, दो रोटी और लौकी की सब्जी, बाजू तोंद वाले अंकल को नर्स ने देने कि कोशिश की तो बोला ले जाओ इसे, मैं घाँस – फूंस नहीं खाता, भोला आदमी अमृत काल में जहर को अमृत समझ रहा था और अमृत को जहर, तभी तो सांस नहीं ले पा रहा था ये आँख का बहरा और कान का अंधा ! खैर थोड़ी में जब पनीर पेट में चिल्लाने लगा तो तोन्दु मल चीखा मुझे टट्टी जाना है, वार्ड बॉय लेट्रिन पॉट ले आया , पर्दे लगा दिये गये, पॉट टूट गया लेकिन कुछ ना हुआ फिर स्टैंड बुलाया गया और फिर उसके बाद भप्पी लाहिड़ी के म्युज़िक से पूरा कार्डियक वार्ड गुंजायमान हो गया I हम इंसान नहीं हैं, हमारी चेतना घास चरने गयी है, हमे मालूम ही नहीं की क्या खाना है ? कितना खाना है ? हगना, खाना, सोना , सस्ती मौज और सेक्स ही हमारी जिंदगी बन चुके हैं I ऑर्केस्ट्रा बंद ही हुआ था , मैं बमुश्किल नींद के आगोश में जाने ही वाला था कि एक पके बाल की बूढ़ी महिला कहराती हुई, चिल्लाते हुए स्ट्रेचर पर वार्ड में दाखिल हुई, कोई तो भैया को बुला दो, ये कहाँ ले आये मुझे कोई तो भैया को बुला दो रे, कोई तो भैया को बुला दो रे लगातार चिल्ला रही थी बुजुर्ग महिला, नर्स जाकर बोली , दादी क्यों चिल्ला रही हो ? तुम्हारे भैया को बुला देते हैं ! क्या नाम है तुम्हारे भाई का ? बुढ़िया बोली भाई नहीं है, मेरा बेटा है, मेरे भाई तो तब से गायब हैं जब से उनकी कलमुहिं बीबियाँ आई हैं , मेरे भाई बाप की जायदाद हड़प गये और भाभियां मेरे भाई I
इतने में वार्ड बॉय उसकी बहू को पकड़ लाया, सास बहु को देख कर चिल्लाने लगी ” अरे कोई तो भैया को बुला दो रे “, नर्स बोली कोई काम हो तो बहू से बोल दो, मां के अंदर से सास प्रकट हुई और बोली दो भाईयों को मेरी भाभियों ने जुदा कर दिया और अब ये मेरे बेटे को मुझसे अलग कर देगी, इसको ले जाओ यहां से I हमारी पारिवारिक व्यवस्था का ही तो परिणाम है कि भारत हृदय रोग और मधुमेह का कैपिटल ऑफ था वर्ल्ड बना हुआ है, महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन बनी हुई हैं, हम पूरा जीवन क्लेश, इर्ष्या, दुख, बेचैनी, अपेक्षाओं, मान्यताओं और निंदा से भरे सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था में बिता देते हैं और यमराज के नजदीक आ कर भी सुधरने को तैयार नहीं होते , मैं सोचने लगा कि बुढ़िया बच भी गयी तो क्या समाज में वापिस जा के कोई रोशनी फैलायेगी ? या गेंडा भी अगर बच गया तो क्या बोध और समझ से जीवन जीने लग जायेगा ? बल्कि इनके लिये तो ऊपर भी नर्क है नीचे भी !
बुढ़िया से नर्स बोली तेरे बेटा फाइव स्टार अस्पताल में इलाज करा रहा है, बुढ़िया बोली वो तो भला हो मोदी जी का और आयुष्मान भारत का कि मेरा भैया मुझे यहाँ ले आया नहीं तो ये दुष्ट बहु मुझे सरकारी अस्पताल में मार डालती ? इतने में बेटा आया और बोला अम्मा आयुष्मान भारत का पैसा तो पूरा खर्च हो चुका है तेरे इलाज में, तेरी बहु के बाप ने तेरे इलाज के लिये पैसा दिया है, सास को काँटों तो खून नहीं, क्या बोलती ? थोड़ी देर बाद सोच के बोली, ठीक है कौन सा एहसान कर रहा है, ये उसकी अनपढ़, बोड़म बेटी को भी तो हम ही पाल रहे हैं !
ये सब देख के मेरी जीने कि इच्छा खत्म सी हो गयी लेकिन प्रभु ने मुझे फिर से इसी बुढ़िया और गेंडे के समाज में पटक दिया है I मैं बाहर निकलते हुए अस्पताल की विशालकाय इमारत को देखता रहा और सोचने लगा कि पूंजीपतियों के अस्पताल और सरकारी आयुष्मान भारत के गठबंधन की कहानी आपको जरूर बताऊंगा !
नमस्कार
राजेंद्र सोनी
संपादक, लेखक , चिंतक
मुक्ति की उड़ान ( निष्पक्ष सत्य के लिये उत्कृष्ट पत्रिका ) , भोपाल
Email : muktikiudaan@gmail.com
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